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क्रिकेट को साफ-सुथरा बनाने की बड़ी पहल, बीसीसीआई दूर करेगा गंदगी

अदालत ने अपने फैसले से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में बड़े बदलाव का आधार तैयार कर दिया है।

क्रिकेट को साफ-सुथरा बनाने की बड़ी पहल, बीसीसीआई दूर करेगा गंदगी

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के छठवें संस्करण में बड़े पैमाने पर सामने आए स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हर क्रिकेट प्रेमी को शिद्दत से इंतजार था। इसमें कोई दो राय नहीं कि आईपीएल ने क्रिकेट जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और प्रतिष्ठा कायम की है, परंतु जब इसमें स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के मामले सामने आए तो हर क्रिकेट प्रेमी खुद को छला हुआ महसूस कर रहा था। तभी से हर कोई उम्मीद कर रहा था कि सुप्रीम कोर्ट क्रिकेट में फैली इस गंदगी को दूर करेगा। हालांकि थोड़ी देर से ही सही, लेकिन शीर्ष अदालत ने अपने फैसले से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में बड़े बदलाव का आधार तैयार कर दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को अपनी गिरफ्त में लेने वाले एन श्रीनिवासन को साफ कह दिया है कि वे बोर्ड के अध्यक्ष पद और अपनी आईपीएल टीम में से किसी एक का चुनाव कर लें। श्रीनिवासन पर इस तरह से सख्त पाबंदी की जरूरत इसलिए भी थी, क्योंकि वे कुछ सालों से भारतीय क्रिकेट में हितों के टकराव का शर्मनाक उदाहरण पेश कर रहे थे। वे क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष भी थे और आईपीएल टीम के मालिक भी, जिसे बीसीसीआई प्रतिवर्षआयोजित करता है। उसके बाद भी श्रीनिवासन की बेशर्मी देखिए कि वे इस बात से लगातार इंकार कर रहे थे कि उन पर किसी तरह के हितों के टकराव का कोई मामला बनता है। इससे भी बड़ी विडंबना की बात यह थी कि क्रिकेट बोर्ड के दूसरे कई अधिकारी भी उन्हें बचाने में लगे थे।

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हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनिवासन को सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग का दोषी नहीं माना है, परंतु यह साफ है कि उन्होंने क्रिकेट में पनप रही इन बुराइयों को नजरअंदाज किया। देखा जाए तो श्रीनिवासन ने बीसीसीआई को हर तरह से अपने अधीन कर लिया था। उनका वश चलता तो वे अपने दामाद गुरुनाथ मयप्पन पर किसी तरह की कार्रवाईनहीं होने देते। वे कहते रहे कि मयप्पन सिर्फ एक क्रिकेट प्रशंसक हैं। जबकि यह साबित हो गया है कि गुरुनाथ न सिर्फ आईपीएल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के अधिकारी थे, बल्कि सट्टेबाजी में भी लिप्त थे। इसके साथ ही राजस्थान रॉयल्स के सहमालिक राज कुंद्रा भी सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग में दोषी पाए गए हैं। क्रिकेट बोर्ड ने तो अपनी जांच रिपोर्ट में इन दोनों को पाक साफ करार दे दिया था। इस प्रकार खेल प्रेमियों के सामने यह सच आना महत्वपूर्ण है कि आईपीएल टीमों-चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स के अधिकारी और कुछ खिलाड़ी सट्टेबाजी तथा स्पॉट फिक्सिंग में शामिल थे।

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कहा जा सकता है कि आईपीएल में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हो गई थीं। किसी भी खेल संस्था में ऐसे लोगों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए जो न सिर्फ खेल की प्रतिष्ठा के लिए घातक हों, बल्कि खिलाड़ियों को भी भ्रष्टाचार के लिए उकसा रहे हों। अब समय आ गया है कि क्रिकेट को साथ-सुथरा बनाया जाए, नहीं तो खेल प्रेमियों का इससे मोहभंग होते देर नहीं लगेगा। सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग से आईपीएल की साख में जो गिरावट आई है, उसकी भरपाई जरूरी है। यह कुछ इस तरह से हो की फिर से क्रिकेट प्रेमियों के मन में इस बात के लिए कहीं कोई संदेह न रहे कि खेल के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन जैसे लोगों के पर कतर इसकी शुरुआत कर दी है।

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