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बांग्लादेश को नहीं भूलनी चाहिए खेल भावना

इस पोस्टर के जरिए भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में मुस्तफिजुर के प्रदर्शन को जताने की कोशिश की गई है।

बांग्लादेश को नहीं भूलनी चाहिए खेल भावना

क्रिकेट इतिहास में पहली बार वनडे सीरीज में भारत पर जीत दर्ज करने के बाद से बांग्लादेश में क्रिकेट फैन्स और मीडिया बेकाबू नजर आ रहे हैं। इस क्रम में वहां की एक मैगजीन ने तो सारी हदें ही पार कर दी है। ढाका से प्रकाशित होने वाले अंग्रेजी न्यूजपेपर ग्रुप की वीकली काटरून मैगजीन प्रथम आलो रोश आलो ने अपने कवर पेज पर एक शर्मनाक पोस्टर छापा है, जिसमें टीम इंडिया के खिलाड़ी आधे गंजे नजर आ रहे हैं। इस पोस्टर पर लिखा है, मुस्तफिजुर कटर मीरपुर के स्टेडियम मार्केट में उपलब्ध है। इसे हम प्रयोग कर चुके हैं, आप भी कर सकते हैं। इस पोस्टर के जरिए भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में मुस्तफिजुर के प्रदर्शन को जताने की कोशिश की गई है।

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गौरतलब है कि पहले दो मैचों में 11 विकेट लेकर उन्होंने बांग्लादेश के मैच और सीरीज जीतने में अहम भूमिका निभाई थी। ये वही गेंदबाज हैं, जिनका महेंद्र सिंह धोनी के साथ भी विवाद हुआ था। इससे पहले भी एक विज्ञापन के जरिए बांग्लादेश भारत को नीचा दिखा चुका है। वहीं सीरीज के दौरान भारत के सबसे बड़े क्रिकेटफैन सुधीर गौतम पर वहां जानलेवा हमला का मामला सामने आया था। कुछ दिनों पहले द डेली स्टार ने टीम इंडिया की हार और बांग्लादेश की जीत को वल्र्ड कप में हार का बदला बताया था। बांग्लादेशी मीडिया ने वल्र्ड कप की उस हार के बाद बीसीसीआई और आईसीसी पर कई आरोप लगाए थे। इस प्रकार देखा जाए तो बांग्लादेश में क्रिकेट फैन्स और मीडिया का रवैया असंवेदनशील नजर आ रहा है। यह बिल्कुल भी खेल भावना के अनुरूप नहीं है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने कहा हैकि खिलाड़ियों का अपमान देश का अपमान है। भारत सरकार और बीसीसीआईको इस घृणित कृत के लिए बांग्लादेश के समक्ष कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराना चाहिए, जिससे उसे अपनी गलतियों का अहसास हो सके। एक जीत से इतना उत्तेजित होना ठीक नहीं। इस उत्तेजना में सभी मान र्मयादाओं को ताक पर रखना शोभा नहीं देता है। इससे तो उसकी छवि अर्मयादित मेजबान देश की बन रही है।

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भारत-पाकिस्तान चिर-प्रतिद्वंद्वी टीमें हैं, लेकिन इनके बीच हुए क्रिकेट मैच के इतिहास में खिलाड़ियों के प्रति ऐसी शर्मनाक घटना कभी नहीं देखी गई। बांग्लादेश को याद रखनी चाहिए कि यह उसकी पहली जीत है, अंतिम नहीं। इस पर इतना घमंड करने की जरूरत नहीं है। क्रिकेट में भारत की बराबरी करने में उसे दशकों लगेंगे। कहीं उसे स्वयं के विश्व चैंपियन होने का भ्रम तो नहीं हो गया है। ऐसा नहीं है कि आप एक बार जीत गए तो हमेशा जीतते रहेंगे। आगे क्या होगा कोई नहीं जानता। खेल में हार-जीत उतना ज्यादामायने नहीं रखती जितनी उसमें निहित भावना। लिहाजा, जीतने वाले के साथ-साथ हारने वाली टीम भी उतने ही सम्मान की हकदार होती है। बांग्लादेश को इसका अहसास होना चाहिए। वैसे भी जिस सीरीज की जीत पर बांग्लादेश को इतना गुमान है, उसके अंतिम मैच में भारत ने उसे 76 रनों से हराया था। बांग्लादेश को अपने इस घृणित कृत के लिए भारत के क्रिकेट प्रेमियों से माफी मांगनी चाहिए।

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