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अमेरिका के दवाब का नतीजा है पाकिस्तान में आतंकी संगठनों पर बैन

अमेरिकी खुफिया एजेंसी के हवाले से भी कहा गया है कि ओबामा की भारत यात्रा के दौरान हाफीज सईद भारत में बड़ा आतंकी हमला करवा सकता है।

अमेरिका के दवाब का नतीजा है पाकिस्तान में आतंकी संगठनों पर बैन
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पाकिस्तान ने जमात उद दावा और हक्कानी नेटवर्क सहित बारह आतंकवादी संगठनों को प्रतिबंधित करने का फैसला किया है। इस खबर पर बहुत उत्साहित होने की बजाय यह सोचने की जरूरत है कि उसने आखिर ऐसा क्यों किया है? दरअसल, इस समय अमेरिका का पाकिस्तान पर काफी दबाव है। अमेरिका से उसे हर साल मिलने वाली करोड़ों डॉलर की सहायता रुकी हुई।
गत दिनों अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी भारत के बाद पाकिस्तान गए थे। वहां उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान अपने लिए हानिकारक आतंकी संगठनों पर तो कार्रवाई कर रहा है जबकि दूसरे आतंकी संगठनों को शह दे रहा है जो भारत, अमेरिका और अफगानिस्तान में दहशत फैला रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
पाकिस्तान को सभी आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करना चाहिए। जाहिर है, यह अमेरिका के दबाव में ही हुआ है। सवाल उठता है कि वहां पहले से ही करीब साठ आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन पाकिस्तानी सरकार और सेना ने उन पर क्या कार्रवाई की है? इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह प्रतिबंध महज दिखावटी और कागजी ही हो। भले ही अमेरिका की खरी खरी के बाद उसने यह निर्णय लिया है, परंतु इस तरह उसका मकसद अमेरिका सहित समूचे विश्व की आंखों में धूल झोंकने का भी हो सकता है।
पाकिस्तान इस तरह का काम लंबे समय से करता आ रहा है। एक तरफ वह प्रतिबंधित करने का स्वांग करता है, तो दूसरी तरफ वे ही आतंकी संगठन अलग नाम और प्रतीक से सक्रिय हो जाते हैं। उनकी सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। साफ है, पाकिस्तान उन आतंकी समूहों के सरगनाओं की धर पकड़ नहीं करता है, बल्कि उन्हें दूसरे नाम से संगठन खड़ा करने में पाकिस्तानी सत्ता की ओर से सहूलियत ही मिलती है। यही वजह है कि वहां दो दर्जन से अधिक प्रतिबंधित आतंकी संगठन ऐसे हैं जो छद्म नाम से भारत और दूसरे देशों में आतंक फैलाने का काम कर रहे हैं।
जमात उद दावा का जन्म भी इसी तरह हुआ है। पहले इसका नाम भी लश्कर ए तैयबा था। अब दोनों अस्तित्व में हैं और इन दोनों का मुखिया हाफीज सईद है। जो मुंबई हमलों का मास्टर माइंड है। ऊपर से विडंबना यह है कि पाकिस्तान की सरकार और सेना उसे समाजसेवी बताते हैं और मदद करते हैं। बीते दिनों उसके एक आयोजन के लिए पाकिस्तान में एक विशेष ट्रेन चलाई गई थी। आज भी हाफीज सईद खुलेआम घूम रहा है। अपनी रैलियों में भारत के खिलाफ आग उगल रहा है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी के हवाले से भी कहा गया है कि ओबामा की भारत यात्रा के दौरान हाफीज सईद भारत में बड़ा आतंकी हमला करवा सकता है। वहीं मोस्ट वांटेड आतंकी दाउद इब्राहिम भी पाक में ही छिपा है। जहां तक हक्कनी नेटवर्क की बात है तो यह अफगानिस्तान के लिए खतरा बना हुआ है। यह भी कम विचित्र बात नहीं है कि एक तरफ पाकिस्तान आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध की बात कर रहा है और दूसरी तरफ यह सूचना आ रही है कि सौ से ज्यादा आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने को तैयार हैं। सीमा पर पाक की ओर से गोलीबारी इसी का नतीजा है।

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