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निवेशकों को आकर्षित करने की बड़ी कोशिश

सीईओज ने प्रधानमंत्री को बताया कि निवेशक इस बात से चिंतित रहते हैं कि भारत में कारोबार करना काफी कठिन है।

निवेशकों को आकर्षित करने की बड़ी कोशिश
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान वित्तीय क्षेत्र, मीडिया और फॉच्र्यून 500 में शामिल 42 कंपनियों के सीईओज के साथ अलग-अलग बैठक और बातचीत आने वाले दिनों में देश में मेक इन इंडिया कार्यक्रम के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। इसमें निवेश करने का तुरंत भले ही फैसला नहीं हुआ हो, लेकिन देश में इस दिशा में मौजूदा संभावनाओं को विश्व पटल पर उभारने में बड़ी मदद मिली है। इस बात का भी पता चला हैकि इस दिशा में विश्व के दिग्गज स्वयं किन-किन बाधाओं का सामना करते हैं। सीईओज ने प्रधानमंत्री को बताया कि निवेशक इस बात से चिंतित रहते हैं कि भारत में कारोबार करना काफी कठिन है। उद्योग लगाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। कर नीतियों में एकरूपता नहीं है। इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की गति बेहद धीमी है। हालांकि उन्होंने हाल के दिनों में देश में हुए नीतिगत सुधारों पर संतोष व्यक्त किया है, लेकिन इस बात पर जोर दिया हैकि सरकार को निवेशकों को आकर्षित करने के लिए और भी सुधार करने होंगे। इस पर प्रधानमंत्री ने उचित ही सभी सीईओ को भरोसा दिया कि भारत में कारोबार से जुड़ी जो दिक्कतें नहीं होनी चाहिए, वो आने वाले दिनों में नहीं रहेंगी।

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अगले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री वहां के सिलिकन वैली में तकनीकी क्षेत्र के दिग्गजों से भी मिलेंगे, जिससे माना जा रहा है कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को गति मिलेगी। जाहिर है, देश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए उनकी चिंताओं को दूर करने पर आने वाले दिनों में ध्यान देना होगा क्योंकि जिन कंपनियों के सीईओज से मुलाकात हुई है, वे अपने अपने क्षेत्र के दिग्गज हैं। माना जाता हैकि ये विश्व कारोबार को दिशा देते हैं। जाहिर है, ऐसे में इनका भारत के संबंध में कोईभी फैसला दूसरों को भी प्रेरित करने का काम करेगा। आज दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2014-15 में जीडीपी दर 7.3 फीसदी पर पहुंच गई थी। जबकि दुनिया में मंदी छाई हुई है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के धाराशायी होने के बाद हाल के दिनों तक चीन विश्व अर्थव्यवस्था का केंद्र बना हुआ था, लेकिन उसका भी बुलबुला अब फूट गया है।

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इन दिनों निर्यात आधारित उसकी अर्थव्यवस्था मंदी में फंस गई है। उससे निकलने का कोई मार्ग नहीं दिख रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ कहने लगे हैंकि आने वाले दिनों में भारत चीन का स्थान ले लेगा। इसमें वह क्षमता है कि जिसका यदि उचित दोहन किया जाए तो यह विश्व अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने में मददगार हो सकता है। वल्र्ड बैंक, आईएमएफ और मूडीज जैसी संस्थाओं का भी मानना है कि भारत में अच्छी संभावनाएं हैं। यहां लोकतंत्र है। बड़ी आबादी है, जिसकी अच्छी क्रय शक्ति है। साथ ही युवाशक्ति है। बड़े पैमाने पर र्शम शक्ति है। केंद्र में ऐसी सरकार आई है जो तेजी से फैसले ले रही है जिससे माहौल बेहतर हुआ है। यही वजह है कि दुनिया का भारत में भरोसा बढ़ा है। दूसरे देशों में जहां निवेश गिर रहा है, वहीं भारत में इस साल एफडीआई में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। ऐसे में अमेरिकी निवेशकों को इस बदली हुई परिस्थितियों का लाभ उठाना चाहिए।

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