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हामिद मीर पर हमला लोकतंत्र के लिए खतरा

दुनिया में लोग जानते हैं कि हामिद लोकतंत्र की आवाज बुलंद करने करने वाले पत्रकारों में शुमार हैं।

हामिद मीर पर हमला लोकतंत्र के लिए खतरा
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पाकिस्तान में जीयो न्यूज के संपादक हामिद मीर पर हुआ जानलेवा हमला वहां के हालात की भयावह तस्वीर बयां करता है। हामिद मीर पर हमला उस समय हुआ जब वे कराची हवाई अड्डे से अपने कार्यालय जा रहे थे। रास्ते में घात लगाकर बैठे कुछ लोगों ने उन पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस हमले के बाद हामिद के भाई ने बताया कि हाल ही में मीर ने पाकिस्तान की मुख्य खुफिया एजेंसी-आईएसआई से धमकी मिलने की बात की थी। वे पिछले कई दिनों से इस धमकी को लेकर चिंतित थे और शनिवार को हमला हो गया। हालांकि हामिद की हालत अब खतरे से बाहर है, लेकिन लोकतंत्र में विश्वास रखने वालों के लिए यह हमला किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।
दुनिया में लोग जानते हैं कि हामिद लोकतंत्र की आवाज बुलंद करने करने वाले पत्रकारों में शुमार हैं। इस हमले की अमेरिका ने भी कड़ी निंदा की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कराची में शनिवार को हुआ हमला सभी लोकतंत्र में विश्वास रखने वालों के लिए सतर्क होने का समय है। अमेरिका ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि इसके जिम्मेदार लोगों को तलाश कर उनके खिलाफ कार्रवाई हो। यह पहला मौका नहीं है जब अलगाववादियों ने मीर को अपना निशाना बनाया हो। 2012 में भी पाक राजधानी इस्लामाबाद में उनके घर के बाहर पाकिस्तानी तालिबान ने उनकी गाड़ी के नीचे आधा किलो का विस्फोटक रखा था, लेकिन रिमोर्ट कट्रोल से चलने वाला यह बम फटने में विफल रहा था। उसी दिन से तय हो गया था कि मीर अलगावादियों के निशाने पर हैं। अकेले मीर ही नहीं पाक के अनेक लोकतंत्र सर्मथक पत्रकार अलगावादियों के निशाने पर रहे हैं।
तालिबान ने मीर और अन्य पत्रकारों को स्कूली छात्रा मलाला यूसफजई को चरमपंथियों के द्वारा गोली मारने के सिलसिले में की गई कवरेज के लिए धमकाया था। केवल धमकियां ही नहीं ये चरमपंथी 2013 में पाकिस्तान में पांच पत्रकारों की हत्या को अंजाम दे चुके हैं। वहां पचास से ज्यादा पत्रकार 1990 से अब तक मारे जा चुके हैं। पिछले महीने एक्सप्रेस न्यूज चैनल के पत्रकार राजा रूमी लाहौर में हुए हमले में बाल-बाल बचे थे, लेकिन उनके ड्राइवर की हमले में मौत हो गई थी।
पाकिस्तान में चुनाव के बाद नवाज शरीफ के सत्ता संभालने के बाद माना जा रहा था कि अब वहां लोकतंत्र की जड़ें जमने लगी हैं, लेकिन चरमपंथी अभी भी सक्रिय है और लोकतंत्र की जमीन खोदने में जुटे हैं। पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने हमले की निंदा करते हुए देश के सभी पत्रकारों की सुरक्षा का ऐलान किया, लेकिन उनकी इस घोषणा को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा क्योंकि ऐसा ही वादा उन्होंने बीते माह भी किया था। उसके बाद भी लगातार पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। पाकिस्तान में एक के बाद एक हो रहे ये हमले लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं। वहां की सरकार ने अगर इन हमलों को नियंत्रित नहीं किया और अलगाववादी-कट्टरपंथी शक्तियों पर लगाम नहीं लगाई, तो इसके परिणाम खतरनाक होंगे। दुनिया के स्तर पर भी। लोकतंत्र के खिलाफ इस तरह के हमले की जितनी भी निंदा की जाय, वह कम है।
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