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अशरफ गनी भारत यात्रा: भारत-अफगान रिश्तों में गर्मजोशी के संकेत

करजई पाकिस्तान की इस मंशा को समझते थे। इसीलिए वे उससे दूरी बनाए रखे।

अशरफ गनी भारत यात्रा: भारत-अफगान रिश्तों में गर्मजोशी के संकेत
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी भारत की यात्रा पर हैं। राष्ट्रपति चुने जाने के सात माह बाद वे यहां आए हैं। इसके पहले वे पाकिस्तान, चीन, सऊदी अरब, ईरान, ब्रिटेन और अमेरिका जा चुके हैं। उनका यह दौरा दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके राष्टÑपति बनने के बाद से ही दोनों देशों के रिश्तों में कुछ ठंडापन महसूस किया जा रहा है। उनका झुकाव भारत की तरफ न हो कर पाकिस्तान व चीन की ओर प्रतीत हो रहा है।
अशरफ गनी की सरकार ने पाकिस्तानी सेना को अपनी जमीन इस्तेमाल करने, अफगान बलों के साथ साझा कार्रवाई करने और पाक खुफिया अधिकारियों को अफगान बंदियों से पूछताछ करने की अनुमति दी है। हामिद करजई जब अफगानिस्तान के राष्ट्रपति थे तब ऐसी स्थिति नहीं थी। भारत यह जानना जरूर चाहेगा कि अशरफ गनी आखिर किन वजहों से पिछली सरकारों से अलग पाकिस्तान और एक हद तक चीन की ओर देखने लगे हैं? कहीं इसकी वजह अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से वापसी के बाद पैदा हुई सुरक्षा संबंधी मजबूरियां तो नहीं हैं? अथवा वे इन दोनों देशों को अफगानिस्तान का बेहतर दोस्त समझते हैं? भारत अफगानिस्तान के संबंधों की दिशा बहुत हद तक इन सवालों के जवाब पर निर्भर करेगी। हालांकि अफगानिस्तान के प्रति भारत के रुख में कोईबदलाव नहीं आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत-अफगानिस्तान के बीच सदियों से दिल का रिश्ता बना हुआ है। साथ ही स्पष्ट किया हैकि भारत वहां शांति व स्थिरता लाने में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा। भारत अफगानिस्तान को हमेशा से रणनीतिक रूप से काफी नजदीक मानता रहा है। युद्ध से जर्जर होने के बाद उसके पुनर्निर्माण में भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है। वहां भारत ने सड़क, बिजली, शिक्षा और कृषि संबंधी परियोजनाओं में भारी निवेश किया है। अब तक दो अरब डॉलर से अधिक आर्थिक मदद दी गई है। वहां की संसद के निर्माण में भी भारत की सराहनीय भूमिका रही है।
अफगानिस्तान और भारत एक दूसरे के पड़ोस में स्थित दक्षिण एशिया के दो प्रमुख देश हैं। दोनों दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के भी सदस्य हैं। दोनों देशों के बीच प्राचीन काल से ही गहरे संबंध रहे हैं। तालिबान के पतन के बाद दोनों देशों के संबंध फिर से मजबूत हो गए थे। यही वजह है कि गनी का पाकिस्तान की ओर झुकाव से नई दिल्ली में थोड़ी बेचैनी है। दरअसल, अफगानिस्तान पर अरसे से पाकिस्तान की कुदृष्टि रही है। पाकिस्तान की नजर उसके संसाधनों पर है।
भारत की वहां उपस्थिति भी उसे खलती है। करजई पाकिस्तान की इस मंशा को समझते थे। इसीलिए वे उससे दूरी बनाए रखे। वे भारत के साथ मिलकर चरमपंथी ताकतों को परास्त करना चाहते थे क्योंकि पाक आतंकवाद का इस्तेमाल अफगानिस्तान को अस्थिर करने में करता रहा है। गनी को भी पाक की मंश समझनी चाहिए। अफगानिस्तान के सामने अभी भी ढेरों चुनौतियां हैं। ऐसे में उसे भारत की हर कदम पर जरूरत महसूस होगी। आतंकवाद को परास्त करने के लिए भी दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते की दरकार है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अशरफ गनी अपनी यात्रा के दौरान भारत की अहमियत समझ पाते हैं या नहीं।
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