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घोटाले के आरोपियों से मुलाकात पर CBI निर्देशक पर कसा शिकंजा, SC ने लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को पिंजरे में बंद तोता की संज्ञा दी।

घोटाले के आरोपियों से मुलाकात पर CBI निर्देशक पर कसा शिकंजा, SC ने लगाई फटकार
केंद्रीय जांच ब्यूरो के निर्देशक रंजीत सिन्हा एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार उन पर गंभीर आरोप लगे हैं। जो तथ्य सामने आ रहे हैं वे चिंताजनक हैं और चौंकाने वाले भी। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्टसे वे फटकार सुन चुके हैं, वह कोयला घोटाले की जांच से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट से छेड़छाड़ का मामलाथा। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को पिंजरे में बंद तोता की संज्ञा दे डाला था। फिर बलात्कार के संबंध में दिए गए एक बयान ने भी उनकी काफी निंदा करायी थी, परंतु मौजूदा विवाद कुछ अलग है। उन पर आरोप है कि वे टूजी और कोयला घोटाले के आरोपियों से अपने घर पर बार-बार मिलते रहे हैं। इन आरोपों में कितनी सच्चाईहै अभी उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। यदि मुलाकात हुई है और उसमें घोटाले की जांच प्रभावित करने की कोशिश हुई है तो वह गंभीर मामला हो सकता है। अब सुप्रीम कोर्टने एक हफ्ते में रंजीत सिन्हा से हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखने को कहा है। सुप्रीम कोर्टने स्पष्ट कर दिया है कि यदि रंजीत सिन्हा पर लगे आरोप सही पाए गए तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यदि जांच को प्रभावित करने के सबूत सामने आए तो अब तक के उनके फैसले को भी सुप्रीम कोर्टरद्द कर देगा। और फिर उन्हें आगे की जांच प्रक्रिया से भी अलग होना पड़ेगा। ऐसे में क्या वे सीबीआई के प्रमुख बने रह पाएंगे? यह प्रश्न भी अब पूछा जाने लगा है। इन घोटालों का पूरा सच देश जानना चाहता है पर सच्चाई सामने तभी आएगी जब जांच निष्पक्ष होगी। दोनों घोटाले पूर्व की यूपीए सरकार से जुड़े हैं। कोयला घोटले को प्रभावित करने की तमाम कोशिशें इससे पहले भी सामने आती रही हैं। पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार द्वारा सीबीआई जांच की स्टेटस रिपोर्ट से छेड़छाड़ का मामला जगजाहिर है, वहीं कोयला मंत्रालय से अहम फाइलों के गायब होने की खबरें भी आम रही हैं। और अब खुद सीबीआई प्रमुख पर आरोपियों से मिलने का मामला सामने आया है। यहां तो जांच एजेंसी और उसके निदेशक की साख ही कटघरे में है। क्योंकि घोटालों में घिरे लोगों की उनसे होने वाली मुलाकातों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। दरअसल, इसे उचित नहीं माना जाता है कि घोटाले के आरोपियों और दूसरे संदिग्ध लोगों से खुद जांचकर्ता खुलकर मिले। और इस संबंध में जब सवाल खड़े होने लगे तो यह तर्क दे कर मामले से पल्ला झाड़े कि इसमें गलत क्या है? हालांकि किसी जांचकर्ता को मनाही नहीं है कि वह ऐसे लोगों से अपने घर पर नहीं मिल सकता जिनके मामलों की जांच वह कर रहा है, परंतु रंजीत सिन्हा के घर रखे गए विजिटर्स डायरी में उनकी आरोपियों के साथ मुलाकातों की दर्ज संख्या सामान्य नहीं हैं। इसमें उनके नाम बड़ी संख्या में हैं जिन पर टूजी व कोयला घोटाले का आरोप है। जाहिर है ऐसे में सवाल तो खड़े होंगे ही। कोलगेट मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है, ऐसे में वह जवाब भी मांगेगा। हालांकि सीबीआई प्रमुख की ओर से यह कहा गया है कि उनसे मुलाकात करने आने वालों का अदालत में जो रजिस्टर पेश किया गया है वह सही नहीं। और उन्होंने किसी भी आरोपी को फायदा नहीं पहुंचाया है। अब मामला सुप्रीम कोर्टके संज्ञान में है। वह किस नतीजे पर पहुंचती है देखना दिलचस्प होगा। कुल मिलाकर सीबीआई के निदेशक पर सवाल तो खड़े हो ही गए हैं।
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