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विमान दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी चिंताजनक

करीब तेरह वर्ष पूर्व अमेरिका में 9/11 की घटना भी सुरक्षा चूक का परिणाम थी।

विमान दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी चिंताजनक

इंडोनेशिया से सिंगापुर की ओर जा रहे एयर एशिया के एक विमान के रविवार की सुबह उड़ान भरने के कुछ ही घंटों बाद लापता हो जाने की घटना से दुनिया स्तब्ध है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक विमान उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद राडार से गायब हो गया। संपर्क टूटने से पहले विमान के चालक दल ने खराब मौसम के कारण उड़ान की योजना में परिवर्तन का अनुरोध किया था। विमान में कू्र मेंबर सहित 161 लोग सवार थे। एयर एशिया मलेशिया की एक कंपनी है, जो किफायती विमान सेवा के लिए जानी जाती है। यह करीब सौ स्थानों की यात्रा कराती है। कई एशियाई देशों में इसकी सहायक कंपनियां हैं। जाहिर है, इसकी खोज के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर दिया गया है।

हालांकि इस खबर ने दुनिया को एक और बड़े हादसे के अंदेशे से भर दिया है। यदि ऐसा होता है तो इस साल की यह तीसरी बड़ी विमान दुर्घटना होगी। इस साल हुए ये तीनों हादसे मलेशिया से ही जुड़े हैं। इससे पहले जुलाई में नीदरलैंड्स की राजधानी ऐम्सटरडम से क्वालालंपुर जा रहा मलेशियाई एयरलाइन का विमान एमएच-17 जब यूक्रेन के ऊपर से उड़ रहा था, तभी इसे विद्रोहियों ने मिसाइल से मार गिराया था। जिससे विमान में सवार सभी 298 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए थे। यूक्रेन में सेना और रूस समर्थक विद्रोहियों के बीच जारी हिंसक संघर्ष कितना भयानक है वह घटना उसकी एक बानगी थी। वहीं मार्च में मलेशियाई एयरलाइन का ही विमान एमएच-370 लापता हो गया था, जिसका आज तक कोई सुराग हाथ नहीं लग सका है। इस विमान के गायब होने की घटना सबसे बड़ी पहेली बनी हुई है।

हालांकि उसके हिंद महासागर में डूब जाने के कयास लगाए गए हैं। उस विमान में पांच भारतीय सहित 239 लोग सवार थे। खोज के लिए चलाए गए अभियान में 34 विमान, 40 पोत और दस देशों के दल लगे हुए थे। देखा जाए तो हर साल छोटी-बड़ी विमान दुर्घटनाओं की खबरें आ ही जाती हैं। ज्यादातर हादसों में विमान में किसी तकनीकी खराबी या फिर आतंकी साजिश का हाथ रहा है। हालांकि कभी-कभी प्रतिकूल मौसम और पक्षियों के टकराने से भी बड़े हादसे हो जाते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि हवाई यात्रा ने दूरी और समय को एक हद तक पाटने का काम किया है। जिसका लाभ अंतत: मानव जीवन को ही हो रहा है, लेकिन हाल के दिनों में जिस तरह से विमान दुर्घटनाएं बढ़ी हैं, वह चिंता का विषय है। इन हादसों से सबक लेते हुए हवाई यात्राओं को हर तरह से सुरक्षित किए जाने की जरूरत है। एयरपोर्ट पर कैसी सुरक्षा व्यवस्था हो, इसके लिए मानक भी बने हुए हैं। जरूरत है उनको अमल में लाने की।

करीब तेरह वर्ष पूर्व अमेरिका में 9/11 की घटना भी सुरक्षा चूक का परिणाम थी। वहीं खासकर जो लंबी उड़ानें हैं और जिन विमानों को समुद्र के ऊपर से यात्रा पूरी करनी पड़ती है, वैसे विमानों में तकनीकी परीक्षण हाई लेवल के होने चाहिए। समय की मांग है कि हर स्तर पर अचूक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो। क्योंकि जिन लोगों की जान ऐसे हादसों में चली जाती है उनके परिवार के लोगों पर क्या गुजरती है, इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है।

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