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सामरिक क्षमता को सुदृढ़ करेगा अग्नि-5 मिसाइल

परमाणु हमला करने में सक्षम यह देश की अब तक की सबसे घातक मिसाइल है।

सामरिक क्षमता को सुदृढ़ करेगा अग्नि-5 मिसाइल
देश की सामरिक तैयारियां तेजी से मजबूती की ओर बढ़ रही हैं। स्वदेशी तकनीक से निर्मित पांच हजार किलोमीटर की मारक क्षमता वाले अंतर महाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-पांच का शनिवार को ओडिशा के बालासोर से तीसरी बार सफल परीक्षण इस बात का सबूत है। अब इस प्रक्षेपास्त्र के उत्पादन और इसे सेना में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके सेना में आने से दुनिया में भारत की सामरिक विश्वसनीयता असंदिग्ध रूप से बढ़ेगी। परमाणु हमला करने में सक्षम यह देश की अब तक की सबसे घातक मिसाइल है। इस मिसाइल को सड़क या रेल मार्ग के रास्ते ले जाकर कहीं से भी छोड़ा जा सकता है। यानी सड़क किनारे एक मोबाइल लांचर से भी छोड़ा जा सकता है। पुरानी तकनीक के जरिए किसी मिसाइल को किसी अड्डे से ही छोड़ा जा सकता था। ऐसे में उसकी पहचान किए जाने और दुश्मन की ओर से उस पर हमला कर नष्ट किए जाने का खतरा मौजूद रहता था। 2012 में इसका पहला सफल और 2013 में दूसरा परीक्षण किया गया था। तभी से दुनिया की निगाहें इसके तीसरे परीक्षण पर टिक गई थीं। यह सिर्फ बीस मिनट में पांच हजार की दूरी तय कर सकता है। अब चीन समेत पूरा एशिया और यूरोप के करीब सत्तर फीसदी हिस्से इसकी जद में होंगे अर्थात आधी दुनिया अग्नि-पांच की जद में होगी। ऐसी सामरिक क्षमता कम ही देशों जैसे-अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के पास थी, लेकिन अब भारत ने भी यह क्षमता हासिल कर ली है, वह भी अपने बलबूते पर। जाहिर है, अब भारत भी मिसाइल सुपर पावर कहलाने वाले इन चुनिंदा देशों की र्शेणी में शामिल हो गया है। भारत अपने मिसाइल कार्यक्रमों का तेजी से विकास कर रहा है। अग्नि-एक, दो, तीन और चार र्शेणी की मिसाइलें पहले ही सेना में शामिल की जा चुकी हैं। यह देश के वैज्ञानिकों की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। सीमित संसाधन होने के बावजूद हमारे वैज्ञानिक नई-नई तकनीक और मारक क्षमता से लैस जमीन से जमीन, जमीन से हवा, समुद्र से हवा, जमीन से समुद्र और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें बनाने में सफलता हासिल कर रहे हैं। अग्नि-पांच की सफलता ने देश के लिए लंबी दूरी के मिसाइलों के विकास का दरवाजा खोल दिया है। देखा जाए तोजल, थल और नभ तीनों ही क्षेत्रों में भारतीय सेना आहिस्ता-आहिस्ता मजबूती हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। उधर इसरो ने भी अंतरिक्ष में कई ऐसे उपग्रह स्थापित किए हैं, जिससे देश की सुरक्षा तैयारियों को और मजबूती मिली है। हालांकि मिसाइल कार्यक्रम के साथ स्वदेश में हथियारों के निर्माण की जो योजनाएं हैं, वे भी गति पकड़ें तो बेहतर होगा। रक्षा जरूरतों को पूरा करने के मामले में आत्मनिर्भर बनने के बाद ही भारत खुद को एक महाशक्ति के रूप में बेहतर तरीके से पेश कर सकेगा। यह सच है कि यह रातों रात नहीं हो सकता, लेकिन इससे अनदेखी नहीं की जा सकती है कि कई रक्षा परियोजनाएं समय से पीछे चल रही हैं। आर्थिक दृष्टि से महाशक्ति बनने जा रहे भारत के लिए जरूरी है कि उसकी सामरिक तैयारियां भी पुख्ता हों, ताकि कोई देश इस पर हमला करने से पहले सौ बार सोचे।
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