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चुनाव के पहले चंदे के सवाल पर घिरी आप, कालेधन को सफेद कर रही हैं AAP

आवाम ने दावा किया हैकि ये कंपनियां कालेधन को सफेद करने का काम करती हैं।

चुनाव के पहले चंदे के सवाल पर घिरी आप, कालेधन को सफेद कर रही हैं AAP

चुनावी चंदे में पारदर्शिता की मांग करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) खुद चंदे के कथित हेरफेर को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। वह भी तब जब दिल्ली विधानसभा के चुनाव में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। आप वॉलंटियर्स एक्शन मंच (आवाम) नामक एक संगठन ने आरोप लगाया है कि आप को कालेधन से फंडिंग हो रही है। इस संगठन का दावा है कि आप ने बीते वर्ष लोकसभा चुनावों के दौरान चार ऐसी कंपनियों से दो करोड़ रुपए का चंदा लिया, जो झुग्गी-झोपड़ी के पते पर पंजीकृत हैं। इन कंपनियों के पास खरीद बिक्री का भी कोई रिकॉर्ड नहीं है, इनकी कमाई का भी कुछ पता नहीं है। इनमें से तीन के निदेशक एक ही व्यक्ति है।

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आवाम ने दावा किया है कि ये कंपनियां कालेधन को सफेद करने का काम करती हैं। आप को अपने ऊपर लगे इन गंभीर आरोपों का जवाब देना होगा, क्योंकि वह राजनीति में शुचिता और पारदर्शिता के मुद्दे पर ही अस्तित्व में आई है। वह अपनी स्थापना के समय से ही कहती रही हैकि देश में अलग राजनीति करने के लिए उसका गठन हुआ है, ऐसे में जनता को उससे उम्मीद है कि वह हर आरोपों का बिना किसी लागलपेट के जवाब देगी। इससे पहले जब आप के चंदे पर सवाल उठे थे तब पार्टी के सदस्य योगेंद्र यादव ने कहा था कि उसकी फंडिंग पारदर्शी है, क्योंकि नियत राशि से ऊपर का चंदा मिलने पर बैठक में चर्चा होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आप के खाते में जब एक ही समय में चार कंपनियों ने पचास-पचास लाख रुपए का चंदा दिया था तब उसकी जांच हुई थी कि नहीं या हुई थी तब किसने इसकी स्वीकृति दी थी।

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यदि आप वास्तव में दूसरे दलों से खुद को अलग रखना चाहती है तो उसे यह समय रहते स्पष्ट कर देना चाहिए, क्योंकि देश का कानून कहता हैकि कोई भी कंपनी अपने लाभांश का महज सात प्रतिशत रकम ही चंदे के रूप में किसी राजनीतिक दल को दे सकती है। यह भी तब जब कंपनी पिछले तीन साल से लगातार लाभ कमा रही हो। हालांकि आप अपनी सफाई में यह जरूर कह रही है कि वे कंपनियां पंजीकृत हैं और उन्होंने चंदा चेक द्वारा दिया है, ऐसे में पार्टी ने उनसे चंदा लेकर कुछ गलत नहीं किया। आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वह हर तरह की जांच का सामना करने भी तैयार हैं। आप ने तो सुप्रीम कोर्ट से चंदे की एसआईटी जांच की मांग तक की है। हालांकि चुनाव के मौके पर इस तरह के खुलासे का आना भी कई प्रश्न खड़ा करता है। साथ ही संदेह पैदा करता है।

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बहरहाल, आप इस मुद्दे को यह कहकर भी खारिज नहीं कर सकती है कि विरोधी दलों के इशारे पर आवाम ऐसा कर रही है, क्योंकि इन आरोपों में दम है। अकसर देखा जाता है कि आप दूसरे दलों और नेताओं पर आरोप लगाने में बढ़ चढ़कर भाग लेती है और जब उस पर किसी तरह का आरोप लगता है तो उसका जवाब देने की बजाय ऐसा व्यवहार करती है जैसे उससे सवाल करना कोई गुनाह हो! भाजपा कई दिनों से आप से रोज पांच सवाल पूछ रही है, परंतु उसकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। आवाम संगठन के आरोपों को भी वह दूसरा रुख देने की कोशिश कर रही है। सरकार को इन आरोपों की जांच करानी चाहिए और जो भी इसमें दोषी पाए जाएं उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

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