Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

कृषि विकास को प्रधानमंत्री का मंत्र कितना कारगर

सरकार की नीतियां और पहल किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित होनी चाहिए।

कृषि विकास को प्रधानमंत्री का मंत्र कितना कारगर
X
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 86वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कृषि वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए बिल्कुल ठीक कहा कि यदि किसानों के लिए पर्याप्त आय की व्यवस्था नहीं हुई तो कृषि क्षेत्र का लक्ष्य प्राप्त करना मुश्किल होगा। इसीलिए सरकार की नीतियां और पहल किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे कृषि तकनीक को खेत-खलिहान तक ले जाएं, ताकि कृषि उत्पादन बढ़ सके और खाद्यान्नों की बढ़ती मांग पूरी हो सके। इस संबंध में उन्होंने लैब टू लैंड का नारा भी दिया। इस प्रकार देखा जाए तो प्रधानमंत्री ने बिल्कुल स्पष्टशब्दों में कहा हैकि किसानों की मेहनत का उचित फल मिले, उनकी आय बढ़े और देश भर में कृषि विश्वविद्यालयों में जो भी शोध या नई-नई तकनीकें ईजाद हो रही हैं, वे किसानों तक पहुंचे। इसके लिए उन्होंने कृषि संस्थानों को किसानों का डाटा बनाने और रेडियो स्टेशन खोलने का सुझाव दिया है। आज खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ाने के सिवाय कोई चारा भी नहीं है, क्योंकि आबादी तो बढ़ रही है पर हम जमीन नहीं बढ़ा सकते। वहीं तीव्र औद्योगीकरण से खेती योग्य जमीनों का अधिग्रहण भी हो रहा है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि कम समय में और कम जमीन पर अधिक से अधिक खाद्यान्नों का उत्पादन किया जाए। अभी भी हम प्रति हेक्टेयर कृषि उत्पादकता बढ़ाने के मामले में कई विकासशील देशों से भी पीछे हैं। आपूर्ति और उत्पादन में अंतर बढ़ने से महंगाई तेजी से बढ़ रही है। इसीलिए जरूरी हैकि कृषि में नई तकनीक का समावेश किया जाए जिससे उत्पादन लागत कम हो और किसानों को कृषि उपज का सही मूल्य मिले। आज किसान बदहाली का जीवन जी रहे हैं। हालांकि इतने से ही कृषि सेक्टर में सुधार नहीं आएगा, इसके समग्र सुधार के लिए अनाज के भंडारण, परिवहन और वितरण की व्यवस्था को भी दुरुस्त किया जाना चाहिए। देश में अभी भी करीब 60 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है, लेकिन सकल घरेलू उत्पादन में कृषि और इससे संबंधित क्षेत्रों का योगदान पिछले 25 सालों से लगातार घटते हुए 13 फीसदी के आसपास रह गया है। इसका अर्थ है कि जीविका के लिए कृषि पर निर्भर लोगों की आय अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों की तुलना में नहीं बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कृषि के विकास के प्रति इस सजगता की सराहना होनी चाहिए, परंतु राज्य सरकारों के सहयोग के बिना सफलता संदिग्ध रहेगी। प्रधानमंत्री ने हरित और श्वेत क्रांति के बाद देश में नीली क्रांति लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। देश में नीली क्रांति यानी मत्स्य (मछली) पालन की प्रबल संभावनाएं हैं, लेकिन हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और नीली क्रांति का विस्तार पूरे देश में हो सके इसके लिए भी बहुत कुछ करना होगा। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पानी की हर बूंद कीमती है, वह व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। इस संबंध में प्रति बूंद, ज्यादा फसल का नारा देते हुए जल संरक्षण की जरूरत पर भी जोर दिया। कुल मिलाकर कृषि की दशा सुधारने के लिए देश में कई योजनाएं बनी हैं, परंतु उन पर गंभीरता से अमल नहीं हो पाने से ही हालात नहीं सुधर रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो बातें कही है उनकी महत्ता तभी है जब उन पर गंभीरता से अमल हो।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि और हमें फॉलो करें ट्विटर पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top