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भारत स्वच्छ अभियान का एक साल: एक साल में स्वच्छता के प्रति जागरूक हुआ देश

दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखते हैं, उसका कारण यह है कि वहां के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं।

भारत स्वच्छ अभियान का एक साल: एक साल में स्वच्छता के प्रति जागरूक हुआ देश
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एक साल पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत का अभियान छेड़ा था। इसमें कोई दो राय नहीं कि उनकी इस मुहिम को देश के हर वर्ग का काफी सर्मथन मिला है। इस एक साल में देश में साफ सफाई को लेकर जनता में जागरूकता फैली है और इसका असर कुछ हद तक दिखने लगा है। इस अभियान के दो उद्देश्य हैं। पहला, देशवासियों को सफाई के प्रति जागरूक करना। अर्थात आमजन स्वयं ऐसा कार्य न करें जिससे गंदगी फैले और साथ ही जो लोग गंदगी फैला रहे हैं उन्हें रोकें भी क्योंकि गंदगी कई समस्याएं पैदा करती है, जिससे गंदगी करने वाला प्रभावित तो होता ही है, दूसरे लोगों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे तरह-तरह की गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा रहता है।
आंकड़े बताते हैं कि देश में करीब साठ करोड़ लोग खुले में शौच करते हैं। इसमें से कुछ लोग तो शौचालय के अभाव में ऐसा करने को विवश हैं, जबकि बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो अज्ञानतावश खुले में शौच करते हैं। दूसरा, देश में कचरा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करना। देश में अभी कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं है। अभी करीब एक लाख मीट्रिक टन कचरा हर दिन पैदा होता है। इसमें से करीब 40 फीसदी कूड़े का निपटारा वैज्ञानिक तरीके से हो पाता है, बाकी खुले में सड़ जाते हैं। इन दोनों लक्ष्यों में बीते एक साल में कितनी प्रगति हुई, इसकी पड़ताल करें तो एक उम्मीद जगती है। लोग अब सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने से परहेज करते देखे जाने लगे हैं। वहीं इस अभियान के तहत खुले में शौच की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए देश भर में 13.04 करोड़ शौचालय का निर्माण करना है जिसमें 12 करोड़ ग्रामीण और 1.04 करोड़ शहरी क्षेत्रों में हैं। बीते एक साल में करीब एक करोड़ शौचालय का निर्माण किया गया है। यह संख्या सरकार द्वारा तय साठ हजार के लक्ष्य से काफी आगे है। सरकारी स्कूलों में शौचालय निर्माण का लक्ष्य पहले ही प्राप्त किया जा चुका है। हालांकि शहरों में कूड़े का ढेर न जमा हो और उन्हें नियमित रूप से उठाकर उनका निस्तारण किया जा सके। इस क्षेत्र में अभी बहुत काम करने की जरूरत है। इसके लिए निगर निगमों को प्रभावी बनाकर उन्हें सफाई के प्रति सजग करना होगा। दरअसल, स्वच्छता के प्रति देश के लोगों का स्वभाव भी एक बड़ी समस्या है। एक मनुष्य के रूप में सभी का सामाजिक दायित्व बनता है कि वह अपने परिवेश को साफ सुथरा रखे। सफाई का काम सिर्फ सरकार का ही नहीं, आमजन का भी है।
हमें इसको अपने व्यवहार या आदत में उतारना होगा। दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखते हैं, उसका कारण यह है कि वहां के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं। अभी गंदगी के कारण पैदा हुई बीमारियों के इलाज पर जीडीपी की एक बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है। वहीं विदेशों में भी भारत की छवि एक गंदे देश की बनी हुई है। इससे पर्यटक भारत आने से कतराते हैं। बहरहाल, बीते एक साल में देश में सफाई को लेकर चर्चा आरंभ हुई है। यदि लोग राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा से इस कार्य को करें तो गांधी जी की 150वीं जयंती पर एक स्वच्छ भारत का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
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