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चिंतन: आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करना जरूरी

एक तरफ दोस्ती और दूसरी तरफ हिंसा साथ-साथ नहीं चल सकते।

चिंतन: आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करना जरूरी
पंजाब के पठानकोट में एयरफोर्स स्टेशन के बाद अफगानिस्तान के काबुल में स्थित भारतीय कान्सुलेट पर हमला कर आतंकवादियों ने अपने कुटिल इरादे जाहिर कर दिए हैं। जहां पठानकोट में लगातार तीसरे दिन सेना का ऑपरेशन जारी रहा वहीं काबुल में भी सुरक्षाकर्मी दो दिनों तक आतंकियों से लोहा लेते रहे। इससे पता चलता है कि आतंकवादी न सिर्फ सोची समझी रणनीति के तहत दोनों हमले किए थे बल्कि वे काफी तैयारी के साथ आए थे। उनका मकसद भारत को बड़ा जख्म देना था। भला हो सेना के जवानों का जिन्होंने किसी बड़ी तबाही को अपने साहस और सूझबूझ से टाल दिया।
आरंभिक जांच से पता चला है कि सभी आतंकी गत 30 दिसंबर को गुरदासपुर से लगी सीमा से भारत में घुसे थे। यह वही रास्ता है, जिसका इस्तेमाल नशा तस्कर करते हैं। आज पंजाब से लगती सीमा आतंकियों के घुसपैठ का आसान जरिया बन रही है तो इसके पीछे निगरानी में चूक भी काफी हद तक जिम्मेदार है। इसे जल्द से जल्द ठीक करने की जरूरत है ताकि आगे से पंजाब आतंकियों का आसान टारगेट न बने। इस हमले की जिम्मेदारी यूनाइटेड जेहादी काउंसिल ने ली है। इसमें जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल सहित पंद्रह आतंकवादी गुट शामिल हैं। वहीं पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के हाथ होने के भी संकेत मिले हैं। देखा जाता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच जब-जब वार्ता प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जाती है तब-तब वहां के आतंकवादियों और सेना की ओर से कुछ ऐसा होता है जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी आ जाती है।
भारत-पाकिस्तान के संबंधों में हाल के दिनों में आई गर्मजोशी के बाद इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि आतंकवादी जल्द ही देश में कोई बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। दरअसल, आईएसआई, सेना और कट्टरपंथी जमात नहीं चाहते कि भारत से रिश्ते सुधरे। वहां की निर्वाचित सरकार भी उनके दवाब में आ जाती है। भारत उनके मंसूबों को बखूबी जानता है। इसके बाद भी गत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाक की यात्रा कर बड़ा कूटनीतिक दांव खेला था। भारत ने अपनी तरफ से संदेश देने की कोशिश की थी कि वह पाकिस्तान से संबंध सुधारने के प्रति गंभीर रहा है, बशर्ते पाकिस्तान उसकी भावनाओं का सम्मान करे। यदि पाकिस्तान वास्तव में संबंध सुधारना और शांति बहाली चाहता है तो उसे आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी।
एक तरफ दोस्ती और दूसरी तरफ हिंसा साथ-साथ नहीं चल सकते। उसे भारत पर हमला करने वाले आतंकियों को मदद मुहैया कराने की बजाय उन पर कार्रवाई करनी होगी। इस हमले से यह साफ हुआ है कि वह अब भी आतंकवाद में फर्क कर रहा है। ना तो वह भारत की भावनाओं का सम्मान कर रहा है और न ही वार्ता को लेकर गंभीर है। यदि उसे रिश्ते सुधारने में दिलचस्पी होती तो आतंकवाद पर भारत की चिंताओं का समाधान जरूर करता। जाहिर है, मौजूदा घटनाक्रम में यदि आने वाले दिनों में इस माह दोनों देशों के बीच होने वाले विदेश सचिव स्तर की वार्ता पर ग्रहण लग जाए तो आश्चर्य नहीं होनी चाहिए। वहीं हमें ऐसे हमलों से बचना है तो अपनी सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता करनी होगी और आतंकवाद के खिलाफ सख्ती बरतनी होगी, जिससे आगे से कोई आतंकी देश के अंदर आकर तबाही न मचा सके।
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