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एक ओर भुखमरी तो दूसरी तरफ अनाज की यह बर्बादी

देश में अनाज के उत्पादन के लिहाज से इस समय 80 लाख टन भंडारण क्षमता की कमी है।

एक ओर भुखमरी तो दूसरी तरफ अनाज की यह बर्बादी
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भारत जैसे देश में जहां बड़ी आबादी को दो वक्त का भोजन नसीब नहीं हो पा रहा हो वहां प्रति वर्ष उत्पादित अनाज का करीब 20-30 फीसदी हिस्सा बर्बाद हो जाना किसी दुर्भाग्य से कम नहीं है। और यह बर्बादी उचित रख-रखाव और प्रबंधन में कमी के चलते होती है। यह निश्चित रूप से हमारी व्यवस्था और तंत्र की असफलता है। एक तरफ केंद्र सरकार 67 फीसदी आबादी को खाद्य सुरक्षा की गारंटी देने के लिए कानून बना रही है, वहीं दूसरी ओर भंडारण क्षमता की कमी के चलते अनाज नष्ट रहे हैं। यह उदासीनता क्यों है? इससे खाद्य सुरक्षा कानून की सफलता पर भी प्रश्न चिह्न् लग सकते हैं? प्रतिष्ठित उद्योग संगठन एसोचैम ने अपने एक अध्ययन के आधार पर कहा हैकि देश में भंडारण क्षमता की कमी के कारण तकरीबन 40 प्रतिशत अनाज का रख-रखाव उचित तरीके से नहीं हो पाता है। ऐसे में हर साल देश में कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में अनाज के उत्पादन के लिहाज से इस समय 80 लाख टन भंडारण क्षमता की कमी है। इस तरह भंडारण क्षमता की कमी, गोदामों की उपलब्धता में क्षेत्रीय विसंगति और वैज्ञानिक सुविधाओं एवं प्रबंधन की कमी के कारण हर साल अनाज नष्ट हो रहे हैं। अनाज की हर बोरी प्रसंस्करण के लिए खोले जाने से पहले कम से कम छह हाथों से होकर गुजरती है। अध्ययन के अनुसार गोदामों की भंडारण क्षमता में सालाना वृद्धि दर लगभग चार फीसदी ही है। वहीं सिर्फ 12 फीसदी गोदामों का उपयोग ही कृषि उपज के भंडारण के लिए होता है। शेष औद्योगिक उत्पादों के लिए है।
यह कमी न सिर्फ भंडारण क्षमता की है, बल्कि गोदामों के डिजाइन, हवा के संचार और प्रबंधन के स्तर पर भी है। ज्यादातर गोदामों का निर्माण परंपरागत तरीके से कराया जाता है, जो आधुनिक पैमानों पर खरा नहीं उतरते। देश में बने बहुत से नये गोदाम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के नहीं हैं। भंडारण क्षमता व्यवसाय और कृषि प्रसंस्करण उद्योग के लिए खास मायने रखती है। यह कृषि आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने और कीमतों को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अभी देश में कुल अनाज भंडारण क्षमता 112 मीट्रिक टन है और 12वीं पंचवर्षीय योजना में मांग-पूर्ति में असंतुलन को दूर करने के लिए करीब 80 लाख टन भंडारण क्षमता की और जरूरत बतायी गई है। किसान मेहनत कर अनाज का उत्पादन करते हैं, परंतु कुव्यवस्था के कारण जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले सड़ जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि खुले में रखे अनाज को नष्ट होने देने से बेहतर है कि उसे गरीबों में बांट दिया जाए, फिर भी सरकार न तो उसके सुझाव पर ध्यान दे रही है और ना ही पर्याप्त क्षमता का निर्माण कर रही है। मौजूदा हालात को देखते हुए बड़े पैमाने पर आधुनिक भंडारण गृहों का निर्माण जरूरी है, जिससे बड़ी मात्रा में होने वाली बर्बादी पर अंकुश लगाने के साथ-साथ उच्च मुद्रास्फीति पर भी काबू पाया जा सकेगा।
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