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चिंतन: आतंकवाद के मुद्दे पर कहां खड़ा है चीन

चीन के प्रतिनिधियों का कहना है कि लखवी के खिलाफ भारत के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

चिंतन: आतंकवाद के मुद्दे पर कहां खड़ा है चीन
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आतंकवाद के मुद्दे पर आखिर चीन कहां खड़ा है? यह सवाल आज इसलिए भी पूछा जा रहा हैक्योंकि उसने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी की रिहाई को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई की मांग संबंधी भारत के कदम को रोक दिया है। दरअसल, भारत का कहना है कि उसको रिहा कर पाकिस्तान ने एक तरह से वैश्विक नियमों का उल्लंघन किया है। चीन के प्रतिनिधियों का कहना है कि लखवी के खिलाफ भारत के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं। आतंकवाद पर उसका यह रुख चिंताजनक है। अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन की यात्रा पर गए थे तो वहां के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने साझा वक्तव्य में कहा था कि उनका देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ है। तब फिर वह ऐसे देश के साथ क्यों खड़ा है जिसकी पहचान दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने की है? आज भारत ही नहीं पूरी दुनिया, यहां तक कि चीन भी, आतंकवाद से प्रभावित है। उसके सामने एक मौका था, इस पर प्रहार करने का, लेकिन उसने अपने कदम पीछे खींच लिए। वह भी तब, जब बाकी देश जैसे अमेरिका, रूस, फ्रांस और र्जमनी आदि उसकी फिर गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। यदि वह भारत की मांग का सर्मथन करता तो निश्चित रूप से पाकिस्तान पर दबाव बनता और वह आतंकवादियों पर कार्रवाई करने को विवश होता। जाहिर है, ऐसे कदमों से उनके हौसले और बुलंद होंगे। भारत का कहना है कि लखवी के मामले में पाक ने अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन नहीं किया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों के मुताबिक एक घोषित आतंकी होने की वजह से लखवी की सारी संपत्ति सील करने के साथ-साथ उसे यात्रा करने और हथियार रखने पर भी पाबंदी होनी चाहिए। ऐसे में वह न तो पैसे ले सकता है, न ही दे सकता है। जबकि अदालत ने तो उससे जमानत राशि तक ली है। लखवी की रिहाई के लिए भारत पाकिस्तान सरकार और सेना को जिम्मेदार मानता है। क्योंकि उन्होंने ही केस में कमी रखी है। भारत ने जो सबूत दिए हैं, उसे वे अदालत के समक्ष रखे ही नहीं। जिससे केस कमजोर हो गया। मुंबई हमले के केस का यह हर्श चिंताजनक है। लखवी के मामले में भारत सीधे तौर पर पाकिस्तान के सामने कड़ी आपत्ति जताता रहा है। मुंबई हमला 2008 में हुआ था, जिसमें आतंकियों ने 166 लोगों की बर्बरतापूर्वक हत्या कर दी थी। हमले के दौरान एकमात्र जिंदा पकड़ा गया आतंकी कसाब ने लखवी को पूरे ऑपरेशन का कमांडर और हाफिज सईद को मास्टर माइंड बताया था। वहीं अमेरिका में पकड़ा गया डेविड हेडली ने भी दोनों की पहचान की थी। इसके अलावा हमले के दौरान आतंकियों की हुई बातचीत के सैंपल की फॉरेंसिक जांच और नेपाल की सीमा पर पकड़े गए अबु जुंदाल से हुई पूछताछ में भी दोनों की भूमिका उजागर हुई है। इतने पुख्ता सबूत होने के बावजूद भी वह खुलेआम घूम रहा है। ऐसे खूंखार आतंकवादी पर चीन की मेहरबानी शक पैदा करती है। यदि दुनिया के मजबूत देश इस तरह स्वार्थ में आंख बंद कर लेंगे तो आतंकवाद की बढ़ रही चुनौतियों से कैसे पार पाया जा सकेगा।

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