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चिंतन: कालेधन की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करना जरूरी

ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 के अंत में वहां के बैंकों में भारतीयों के करीब 12615 करोड़ रुपये जमा थे।

चिंतन: कालेधन की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करना जरूरी
भारत और दुनिया की ओर से स्विट्जरलैंड की बैंकिंग व्यवस्था की गोपनीयता के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच यह बात सामने आई है कि स्विस बैंकों में भारतीयों के धन में पिछले एक साल में दस फीसदी की कमी आई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 के अंत में वहां के बैंकों में भारतीयों के करीब 12615 करोड़ रुपये जमा थे। वहीं वर्ष 2013 में पिछले साल की तुलना में भारतीयों की जमा राशि में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। जबकि आंकड़ों के अनुसार साल 2006 में स्विस बैंकों में भारतीयों के रिकॉर्ड 452 अरब रुपये जमा थे। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी हैकि इसमें गिरावट की क्या वजह है? दरअसल, इसका एक बड़ा कारण तो दुनिया भर में कालेधन के खिलाफ बना माहौल है। जिससे कालेधन को खपाने वाले देशों पर भी दबाव बन रहा है कि वे अपनी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता लाएं, जिससे भ्रष्टाचार से पैदा हुए कालेधन की व्यवस्था को तोड़ा जा सके। इसका परिणाम यह हुआ है कि टैक्स हैवन यानी कालेधन के सुरक्षित पनाहगाह के रूप में गिने जाने वाले कई देश, जिसमें स्विट्जरलैंड का भी नाम शामिल रहा है, ढांचागत बदलाव करने लगे हैं। और संबंधित देशों से जानकारियों साझा करने लगे हैं। यही वजह है कि लोग अपनी काली कमाई को इन देशों से दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर तेजी से पहुंचाने लगे हैं। हालांकि स्विट्जरलैंड जैसे देशों में खाता खोलना अपराध नहीं है। कोई भी भारतीय इन बैंकों में पैसा जमा कर सकता है, लेकिन उसके लिए रिर्जव बैंक से अनुमति लेनी होती है। जो लोग ऐसा नहीं करते और चोरी-छिपे पैसे भेजते हैं, वे कानून का उल्लंघन करते हैं। अर्थशास्त्रियों के अनुसार देश में कालेधन की एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है। विशेषज्ञों का यहां तक कहना हैकि कालेधन का करीब बीस फीसदी हिस्सा ही भारत से विदेशों में जाता है। करीब अस्सी फीसदी कालाधन तो देश में ही रह जाता है। मोदी सरकार इस कालेधन की अर्थव्यवस्था के तिलस्म को तोड़ने के लिए कई कारगर उपाय कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मोच्रे पर जहां सभी देशों को इसके खिलाफ एकजुट कर रही है, वहीं ऐसी व्यवस्था बनाने की और पहल कर रही है जिससे कालेधन के संबंध में सभी सूचनाएंस्वत: आदान प्रदान हो सकें। वहीं घरेलू मोर्चे पर इसको रोकने के मजबूत प्रयास किए जा रहे हैं। अभी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल विदेशी खातों में रखे गए कालेधन की जांच कर रही है। कई नामों का खुलासा हुआ हैऔर कई लोगों पर कार्रवाई हुई है। साथ ही कड़ा कानून भी बनाया गया है, जिससे कालेधन पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसमें विदेशों में कालेधन रखने के दोषियों को दस साल की सजा और तीन गुना जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा देश में कालाधन पैदा न हो इसके लिए भी एक नया कानून संसद के अगले सत्र में लाने की बात कही जा रही है। जाहिर है, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर केंद्र की सत्ता में आई मोदी सरकार कालेधन के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है, जिससे भ्रष्टाचारियों में खलबली मची हुई है। देर सबेर उन्हें सामने आना ही होगा।
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