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फेरबदल से सरकार को धार देने की कोशिश

प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिपरिषद को स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्हें हर हाल में काम चाहिए, ''विवाद'' नहीं, ''ढिलाई'' नहीं।

फेरबदल से सरकार को धार देने की कोशिश
पीएम नरेंद्र मोदी के चौंकाने वाले 'विस्तार सह फेरबदल' में कई संदेश साफ हैं। प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिपरिषद को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी सरकार को हर हाल में काम चाहिए, 'विवाद' नहीं, 'ढिलाई' नहीं। विवादों से नाता जोड़ना है, काम नहीं करना है, कछुए की गति से काम करना है, तो बाहर रहिए। हालांकि उन्होंने हर विवादित या ढीले मंत्री को बाहर नहीं बिठाया है, लेकिन आगरा से सांसद रामशंकर कठेरिया को बाहर का रास्ता दिखाकर दूसरे विवादित बयान देने वाले मंत्रियों को सख्त संदेश जरूर दिया है कि संभल जाइए।
स्मृति ईरानी को मानव संसाधन जैसे बड़े मंत्रालय से हटाकर अपेक्षाकृत छोटे कपड़ा मंत्रालय में भेज कर भी पीएम ने यही जताने की कोशिश की है कि उन्हें रिजल्ट चाहिए, कंट्रोवर्सी नहीं। दो साल में ईरानी कई मौकों पर रिजल्ट नहीं दे पाईं। चाहे हैदराबाद यूनिवर्सिटी मामला हो, जेएनयू विवाद हो, यूजीसी मामला हो, सभी में सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। ईरानी की खुद की डिग्री भी विवादों में रही। आईआईटी में संस्कृत पढ़ाने और केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन की जगह संस्कृत विषय को लेकर बयानबाजी में भी ईरानी की अनुभवहीनता सामने आई। वैसे जब पीएम ने पहली बार स्मृति ईरानी को एचआरडी मंत्री बनाया था, तब भी पूरा देश चौंका था। मोदी के पास कई दिग्गज अनुभवी नेता थे, जिन्हें इतना महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया जा सकता था।
अब उम्मीद की जानी चाहिए कि तुलसी को संदेश मिल गया होगा कि खाली बड़बोलेपन से मंत्रालय नहीं चलता। कपड़ा मंत्रालय में वे गलतियां नहीं दोहराएंगी। भारत टैक्सटाइल का बड़ा निर्यातक देश है। स्मृति के सामने रडिमेड गारमेंट्स निर्यात को पटरी पर लाने की चुनौती होगी। भारी फेरबदल साबित होने वाले मोदी सरकार के इस दूसरे विस्तार में पीएम ने सबसे अधिक भरोसा प्रकाश जावड़ेकर पर जताया है। उनके पर्यावरण मंत्रालय के कामकाज से खुश पीएम ने उन्हें अब सीधे कैबिनेट का दर्जा देकर एचआरडी जैसा अहम मंत्रालय सौंपा है। अपने दो साल के कार्यकाल में जावड़ेकर बिना विवाद में आए ढेर सारे प्रोजेक्टों को धड़ाधड़ पर्यावरण मंजूरी देकर उद्योग जगत समेत सभी सेक्टर के चहेते बन गए। अब उन्हें अपनी कुशलता देश में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के मोर्चे पर साबित करनी है।
चाहे उच्च शिक्षा का क्षेत्र हो या तकनीकी या माध्यमिक या प्राइमरी, हर स्तर पर व्यापक सुधार की जरूरत है। शिक्षा के अंधाधुंध निजीकरण के चलते उत्पन्न विसंगतियों को भी दूर किया जाना बाकी है। प्रधानमंत्री लगातार स्किल इंडिया पर जोर दे रहे हैं, जिसे शिक्षा से जोड़े बिना सफल नहीं बनाया जा सकता है। पीएम अपने विदेशों के भाषण में भी भारत की बड़ी युवा शक्ति को ताकत बताते हैं, लेकिन इसे दक्ष, ज्ञानवान और कुशल बनाने के लिए इन्फ्रास्टक्चर और माहौल देना एचआरडी मंत्रालय का ही काम है। जावड़ेकर के सामने यह बड़ी चुनौती होगी।
सदानंद गौड़ा से कानून मंत्रालय लेकर कानून के विशेषज्ञ रविशंकर प्रसाद को देकर पीएम ने विशेषज्ञता को तरजीह दी है। ऐसे ही सूचना प्रसारण मंत्रालय वेंकैया नायडू को देकर अरुण जेटली का भार भी हल्का किया गया है। चौधरी बीरेंद्र सिंह से ग्रामीण विकास मंत्रालय लिया जाना भी ढीले से मुक्ति पाने जैसा है।
पीएम समझ रहे हैं कि उनके पास अब बस दो साल है, इसलिए अगर बदलाव नहीं दिखा, गरीबों के जीवन स्तर में सुधार नहीं आया, तो मिशन 2019 अधूरा रह जाएगा। जनता का मूड बदलने में देर नहीं लगेगी। इसलिए पीएम ने फेरबदल कर अपनी सरकार को धार देने की कोशिश की है।
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