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आलोक पुराणिक का लेख : हिचकोले से रफ्तार पकड़ती अर्थव्यवस्था

रिजर्व बैंक के पास जो आंकड़े और आकलन हैं, उनमें अर्थव्यवस्था की सूरत थोड़ी सुधरी हुई दिखायी देती है। इस बात से केंद्र और राज्यों की सरकारों को, उद्योगपतियों और आम आदमी को कुछ आश्वस्ति मिलनी चाहिए। अर्थव्यवस्था की सूरत सुधरेगी तो तमाम आइटमों और सेवाओं की मांग में भी सुधार होगा।

आलोक पुराणिक का लेख : हिचकोले से रफ्तार पकड़ती अर्थव्यवस्था
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आलोक पुराणिक

भारतीय रिजर्व बैंक को भारत के उन संस्थानों में चिन्हित किया जा सकता है, जिनके द्वारा दिये आंकड़े और आकलन गहन विश्लेषण और प्रामाणिक सूचनाओं पर आधारित होते हैं। वित्त मंत्रालय, भारत सरकार और रिजर्व बैंक की पहुंच उन सूचनाओं और आंकड़ों तक होती है, जहां पर कोई शोधकर्ता या संस्थान पहुंच भी नहीं सकता, इसलिए जब रिजर्व बैंक कहता है कि 2021-22 में 10 प्रतिशत विकास दर हासिल होने की उम्मीद है तो अर्थव्यवस्था को लेकर एक आश्वस्ति का भाव जगना चाहिए। रिजर्व बैंक के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की शुरुआती तीनों तिमाहियों में विकास दर नकारात्मक रहेगी जो अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च, 2021) में 0.5 प्रतिशत रह सकती है। अप्रैल-जून, 2021 की तिमाही में विकास दर 20.6 प्रतिशत रहने की बात कही है। शुक्रवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने वर्ष 2020-21 के दौरान अर्थव्यवस्था में 9.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है।

यानी रिजर्व बैंक का कहना है कि जनवरी मार्च 2021 की अवधि में हालात बदलेंगे। नकारात्मक से सकारात्मक की ओर और फिर अप्रैल जून 2021 में तेज रफ्तार से विकास होगा। अप्रैल जून 2021 में 20.6 फीसदी की रफ्तार से विकास होगा । इस आकलन से यह आशंका दूर होनी चाहिए कि कोरोना जनित मंदी लंबी चलेगी। कारोबारी रिजर्व बैंक के आशावाद के प्रति बहुत सकारात्मक रुख दिखा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत घोषणा का घरेलू बाजार पर असर पड़ा और सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यह बढ़त पर बंद हुआ। यह लगातार सातवां कारोबारी सत्र है जब सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद हुए हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 0.81 फीसदी की बढ़त के साथ 326.82 अंक ऊपर 40509.49 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 0.67 फीसदी (79.60 अंक) की बढ़त के साथ 11914.20 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स या निफ्टी यानी स्टाक बाजारों में बढ़त या गिरावट का भविष्य की आशाओं और आशंकाओं के आधार पर भी होती है। यानी कुल मिलाकर कंपनियों की तरफ से जिस तरह के आंकड़े आ रहे हैं, उनके आधार पर बाजार को उम्मीद है कि भविष्य बेहतरी की ओर ही जा रहा है। रिजर्व बैंक का आकलन है कि 2020-21 में अर्थव्यवस्था 9.5 प्रतिशत सिकुड़ेगी, पर अगले ही साल हालात बेहतर हो जाएंगे।

रिजर्व बैंक ने हालिया मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को कम करने वाले कोई कदम नहीं उठाये। गौरतलब है कि अगर रिजर्व बैंक रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट में कमी करता है, तो रिजर्व बैंक का संकेत होता है कि बाजार में ब्याज दरों में कमी होनी चाहिए। ऐसी मांग थी कई आर्थिक विश्लेषकों की कि ब्याज दरों में कटौती होनी चाहिए ताकि बाजार में तमाम आइटमों की मांग में बढ़ोत्तरी हो। रिजर्व बैंक आश्वस्त लगता है कि बाजार में तमाम वस्तुओं और सेवाओं की मांग में बढ़ोत्तरी होगी, ब्याज दरों में कटौती के हथियार के इस्तेमाल के बगैर। ब्याज कटौती के ब्रह्मास्त्र को रिजर्व बैंक ने अभी बचाकर रखा है यानी इसका इस्तेमाल आगे कभी किया जा सकता है। कुल मिलाकर रिजर्व बैंक के आशावाद के मूल में कुछ महत्वपूर्ण कारण दिखते हैं। खेती किसानी की स्थिति ठीक चल रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती के समाचार हैं।

राजकोषीय घाटे को लेकर भी रिजर्व बैंक ने कुछ अनुमान पेश किये हैं। केंद्र और राज्य का संयुक्त राजकोषीय घाटे का स्तर चालू वित्त वर्ष में 12 प्रतिशत (जीडीपी के सापेक्ष) और अगले वित्त वर्ष के दौरान नौ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। अकेले केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे का स्तर इन दो वर्षों के दौरान क्रमश: 7.5 और 5.5 प्रतिशत रहने की बात कही गई है। गौरतलब है कि कोरोना की महामारी से असाधारण परिस्थितियां पैदा हुई हैं। इन असाधारण परिस्थितियों ने निपटने के लिए असाधारण कदमों की आवश्यकता थी और है। इसलि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को कुछ ज्यादा खर्च करना पड़ा है। इसके चलते राजकोषीय घाटे में बढ़ोत्तरी आशंकित है। रिजर्व बैंक के आकलन के अनुसार केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 20-21 में सकल घरेलू उत्पाद का 7.5 फीसदी रहेगा। असाधारण परिस्थितियों में घाटा असाधारण होना असाधारण बात नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि अब अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है।

इससे पहले केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी अनुमान के अनुसार पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट आई है। मौद्रिक नीति समिति की बुधवार को शुरू हुई बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान में निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है। रिजर्व बैंक के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था में आई गिरावट अब पीछे रह गई है और अर्थव्यवस्था में उम्मीद की किरण दिखने लगी है। मंहगाई दर लक्ष्य के दायरे में आने के आसार हैं, लक्ष्य यह है कि महंगाई दर दो से छह प्रतिशत के दायरे में रहे। हाल के समय में महंगाई दर, खुदरा महंगाई दर छह फीसदी की दर से ऊपर पहुंच गयी थी। यह रिजर्व बैंक औऱ सरकार के लिए चिंता का विषय थी। रिजर्व बैंक का आकलन है कि महंगाई दर कम हो सकती है। महंगाई दर कम होने का एक परिणाम यह होगा कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों को घटाने की प्रक्रिया फिर तेज सकता है। तेज महंगाई दर अगर है, तो ब्याज दरों में कटौती के अपने खतरे होते हैं। तेज महंगाई दर का मतलब यह है कि तमाम वस्तुओं की मांग बढ़ रही है। ब्याज दरों में कटौती करके तमाम चीजों को खरीदना अगर सस्ता कर दिया तो महंगाई और बढ़ जायेगी। महंगाई एक सीमा के बाद अर्थव्यवस्था और आम आदमी के घातक ही होती है। इसलिए रिजर्व बैंक महंगाई दर को लेकर बहुत संवेदनशील रहता है।

कुल मिलाकर रिजर्व बैंक के पास जो आंकड़े और आकलन हैं, उनमें अर्थव्यवस्था की सूरत थोड़ी सुधरी हुई दिखायी देती है। इस बात से केंद्र और राज्यों की सरकारों को, उद्योगपतियों और आम आदमी को कुछ आश्वस्ति मिलनी चाहिए। अर्थव्यवस्था की सूरत सुधरेगी तो तमाम आइटमों और सेवाओं की मांग में भी सुधार होगा। मौद्रिक नीतियों से जुड़ी घोषणाओं के साथ रिजर्व बैंक ने कुछ और महत्वपूर्ण घोषणांएं की हैं। मसलन, चौबीसों घंटे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पेमेंट सेटलमेंट करने की सुविधा दिसंबर से शुरू हो जाएगी। होम लोन को लेकर नियमों में बदलाव किया गया है ताकि बैंक और एनबीएफसी ज्यादा होम लोन वितरित कर सकें। बांड बाजार व कॉरपोरेट सेक्टर की मदद के लिए कुछ दूसरी घोषणाएं भी हैं, जिनसे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी।

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