Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

आलोक पुराणिक का लेख : आर्थिक मंदी की मंद हुई रफ्तार

भारत की जीडीपी में दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर 2020 की अवधि में 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2020 की अवधि में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.9 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज हुई थी। यानी मोटे तौर पर यह माना जा सकता है कि अर्थव्यवस्था जिस गति से गढ्ढे में जा रही थी, वह गति फिलहाल धीमी हुई है। यानी मंदी की रफ्तार मंदी हुई है। इसे सकारात्मक खबर माना जाना चाहिए। कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था के गिरने की रफ्तार कम हुई है।

आलोक पुराणिक का लेख : आर्थिक मंदी की मंद हुई रफ्तार
X

आलोक पुराणिक

अर्थव्यवस्था के आधिकारिक आंकड़े आ गये हैं, बावजूद नकारात्मक आंकड़ों के, कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक भाव है। इसकी वजह यह है कि अर्थव्यवस्था में गिरावट, सिकुड़ाव की रफ्तार कम हो गयी है। मंदी की रफ्तार कम हो गयी है।

भारत की जीडीपी में दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर 2020 की अवधि में 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2020 की अवधि में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.9 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज हुई थी। यानी मोटे तौर पर यह माना जा सकता है कि अर्थव्यवस्था जिस गति से गढ्ढे में जा रही थी, वह गति फिलहाल धीमी हुई है। यानी मंदी की रफ्तार मंदी हुई है। इसे सकारात्मक खबर माना जाना चाहिए। यानी कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था के गिरने की रफ्तार कम हुई है, फिर यह विकास के रास्ते पर आएगी।

क्षेत्रवार आंकड़ों के विश्लेषण से कुछ बातें साफ होती हैं। जुलाई-सितंबर 2020 की अवधि में जुलाई -सितंबर 2019 की अवधि के मुकाबले कृषि ने 3.4 विकास दर हासिल की है। अप्रैल-सितंबर 2019 की अवधि में कृषि की विकास दर 3.5 प्रतिशत थी। यानी एक साल पहले के मुकाबले अभी की स्थितियों को देखें, तो कृषि को कुछ फर्क पड़ता दिखायी नहीं देता। अप्रैल-जून 2020 की अवधि में कृषि की विकास दर 3.4 प्रतिशत रही थी। यानी कुल मिलाकर यह साफ है कि कृषि पर कोरोना का कोई असर दिखायी नहीं पड़ रहा है। मंदी से जूझती अर्थव्यवस्था के लिए यह शुभ समाचार है। एक समाचार बहुत ही शुभ है वह यह है कि मैन्युफेक्चरिंग क्षेत्र में दशमलव 6 प्रतिशत का विकास दर्ज किया गया है। मेक इन इंडिया, मैन्य़ुफेक्चरिंग के लिए यह बहुत ही शुभ खबर है। यानी यहां गढ्ढे में जाने की प्रक्रिया थमी है और अब विकास यात्रा शुरु होगी। यह थोड़ा आश्चर्यजनक रहा है, पर यह शुभ है। कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में-8.6% सिकुड़ाव समझा जा सकता है। इस क्षेत्र में गतिविधियां ठप पड़ी रही हैं। यह क्षेत्र सकारात्मक जोन में आये ऐसी कामना की जानी चाहिए। क्योंकि यहां पर अकुशल कामगारों को बहुत काम मिलता है। ट्रेड एवं होटल्स: -15.6% सिकुड़ाव का आंकड़ा भी स्वाभाविक है। लोग कहीं आने जाने में परहेज बरत रहे हैं। होटलों में कौन रहेगा। होटलों का कारोबार दोबारा उठने में वक्त लगेगा। यहां इंतजार के अलावा और कोई और चारा नहीं है। पर्यटन जब दोबारा उठेगा, तब ही होटल कारोबार में तेजी आयेगी। कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था की जैसी स्थिति है, वैसी स्थिति आंकड़ों में बयान हो रही है। मैन्युफेक्चरिंग क्षेत्र ने जरुर आस बंधायी है।

सकारात्मक पक्ष

इन आंकड़ों का असर शेयर बाजार की उछाल की तौर पर भी दिखा है। सेनसेक्स में उछाल की जो गति देखी गयी है उसने कई आर्थिक विश्लेषकों को चकित ही किया है। सेनसेक्स हाल में पहली बार 44000 बिंदुओं के बार चला गया। पिछले छह महीनों में करीब 43 प्रतिशत का उछाल इसमें देखने को मिला है। यूं पिछले छह महीनों को अर्थव्यवस्था के लिहाज से नकारात्मक ही माना जाना चाहिए। स्टाक बाजार को अर्थव्यवस्था का आईना माना जाता है, संकेतक माना जाता है। सेनसेक्स पिछले छह महीनों में उछल गया है किरीब 43 प्रतिशत, जबकि अर्थव्यवस्था में तो सिकुड़ाव के आसार बन रहे हैं। फिर यह उछलता सेनसेक्स क्या कहता है। 13 नवंबर 2020 को रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारतीय विदेशी मुद्रा कोष 572 अरब डालर से ऊपर जा चुका था। इस आंकड़े में ही शेयर बाजार की तेजी का राज छिपा है। विदेशी निवेशक जमकर भारतीय शेयरों में निवेश कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार में दुनिया भर के निवेशकों की दिलचस्पी कई वजहों से है। एक वजह तो यह है कि बावजूद तमाम समस्याओं के भारतीय शेयर बाजारों के रिटर्न ग्लोबल स्तर के मुकाबले शानदार ही माने जा सकते हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था देर सबेर तेजी की ओर वापस होगी ऐसी उम्मीद पर भी निवेशकों की दुनिया कायम है। आटो सेक्टर की तेजी हाल में चिन्हित की ही जा चुकी है, तो कुल मिलाकर तमाम विदेशी निवेशकों को लग रहा है कि कोरोना के धक्के के बाद दुनिया में जो अर्थव्यवस्थाएं सबसे तेज गति से उठेंगी, भारतीय अर्थव्यवस्था उनमें से एक होगी।

आशंकाएं और मंदी

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल में कहा कि अर्थव्यवस्था में विकास की रफ्तार उनकी उम्मीद से ज्याद रही है। पर उन्होने साथ में एक बात और कही और वह यह कि त्योहारी खरीद के बाद में खरीद का स्तर कायम रह पायेगा या नहीं, यह देखना होगा। यानी शक्तिकांत दास की बात का आशय यह है कि अभी मांग में जो तेजी दिखायी दी, वह सकारात्मक तो है पर इसके लगातार बने रहने पर निगाह रखना जरूरी है। मंदी की स्थितियां दुनिया भर में दिखायी पड़ रही हैं। चीन की अर्थव्यवस्था इस मामले में अपवाद है। जून 2020 में खत्म तिमाही में चीन में विकास दर 3.2 प्रतिशत थी और सितंबर में खत्म तिमाही में चीन में विकास दर 4.9 प्रतिशत रही । चीन कोरोना में सबसे पहले घिरा और सबसे पहले वापस आ गया। बाकी दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं कोरोना से जूझ रही हैं। अमेरिका में जून 2020 को खत्म हुई तिमाही में विकास दर नकारात्मक 9 प्रतिशत रही थी, सितंबर 2020 में खत्म हुई तिमाही में विकास दर अमेरिका में नकारात्मक 2.9 प्रतिशत रही, यानी वहां भी मंदी की रफ्तार कम हो रही है। तकनीकी तौर पर मंदी तब मानी जाती है, जब लगातार दो तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में सिकुड़ाव दर्ज किया जाये। इस तकनीकी आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी की हालत में है और दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मंदी की हालत में हैं। फ्रांस, जापान, ब्रिटेन सब मंदी की हालत में है। तकनीकी तौर पर मंदी के बावजूद कुछ तथ्य ऐसे हैं, जो सकारात्मक माने जा सकते हैं। जैसे दुनिया भऱ में सितंबर 2020 में खत्म हुई तिमाही में सिकुड़ाव की दर जून 2020 की तिमाही की सिकुड़ाव दर के मुकाबले कम रही है। ये आंकड़ें उम्मीद की किरण जगाते हैं।

आगे की राह

कुल मिलाकर यह लगातार साफ हो रहा है कि मंदी की रफ्तार मंद हो रही है। पर अर्थव्यवस्था में कई स्तर पर चुनौतियां बनी हुई हैं। ग्रामीण गारंटी रोजगार योजनाओं से भी अस्तित्व का संकट गांवों में खड़ा नहीं हुआ है। फिर भी सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि गांवों में खाद्यान्न का संकट ना खड़ा हो जाए।

क्षेत्रवार आंकड़े

कृषि: 3.4% विकास

माइनिंग: -9.1% सिकुड़ाव

मैन्युफैक्चरिंग: 0.6% विकास

इलेक्ट्रिसिटी: 4.4% विकास

कंस्ट्रक्शन: -8.6% सिकुड़ाव

ट्रेड एवं होटल्स: -15.6%

फाइनेंस, इंश्योरेंस एवं रियल्टी:

-8.1% सिकुड़ाव

पब्लिक एडमिन, डिफेंस: -12.2%

Next Story