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हरिभूमि संपादकीय लेख: जल्द पटरी पर आएंगी आर्थिक गतिविधियां

फिलहाल संभव नजर नहीं आ रहा है कि 17 मई के बाद सबकुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएगा। क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कह चुका है कि कोरोना वायरस लंबे समय तक हमारे साथ रहने वाला है।

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कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में लॉकडाउन सबसे बड़ा हथियार है। 17 मई को देश में लॉकडाउन के 54 दिन पूरे होने जा रहे हैं। अब सबके मन में यही सवाल है कि क्या इसके बाद देश पुराने रूप में लौट आएगा? क्या सभी कार्य पहले की तरह होने लगेंगे? ऐसा तो फिलहाल संभव नजर नहीं आ रहा है कि 17 मई के बाद सबकुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएगा। क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कह चुका है कि कोरोना वायरस लंबे समय तक हमारे साथ रहने वाला है। हमें अतिरिक्त सावधानी के साथ आगे बढ़ाना होगा।

सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क को जीवन का हिस्सा बनाना होगा। इतना जरूर है कि सरकार धीरे-धीरे लॉकडाउन की समाप्ति की ओर बढ़ रही है। गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन तीन में कुछ रियायतें दी थी। कोरोना संक्रमण से बचे हुए और संक्रमण से कम प्रभावित जिलों यानी ग्रीन और ऑरेंज जोन में सरकारी कार्यालयों, उद्योगों को कुछ सुरक्षा मानक अपनाने के बाद शुरू कर दिया गया था। 12 मई से देशभर में 15 स्पेशल रेलगाड़ियां चलाने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इसके लिए टिकटों की बुकिंग भी होने लगी है।

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही कह चुके हैं कि हम उड्डयन क्षेत्र को धीरे-धीरे खोलेंगे। इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने सोमवार को अधिकारी के साथ बैठक करके इस बारे में चर्चा की। केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल से ही सरकारी गतिविधियों के डेटा, कॉल सेंटर, कोरियर सेवा, ई-कॉमर्स कंपनियों, कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग सर्विस, प्राइवेट सिक्योरिटी और ऑफिस मैनेजमेंट सेवाएं, इलेक्टि्रशियन, प्लंबर, मोटर मेकैनिक, आईटी रिपेयर, कारपेंटर, ई-कॉमर्स कंपनी, ग्रामीण इलाकों के उद्योग, स्पेशल इकोनॉमिक जोन, एक्सपोर्ट ओरिएंटेड जोन, इंडस्टि्रयल टाउनशिप के उद्योग, ग्रामीण इलाकों के फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, आईटी हार्डवेयर की मैन्युफैक्चरिंग, कोयला, खनिज उत्पादन और उनकी ढुलाई, तेल एवं गैस का अन्वेषण कार्य, जूट इंडस्ट्री, ग्रामीण इलाकों के ईंट भट्ठे को शुरू करने की इजाजत दे दी थी।

अब सरकार का इरादा ओरेंज और ग्रीन जोन में सभी तरह की गतिविधियां शुरू करने का है। केवल उन क्षेत्रों में दौरान सख्ती रखी जाएगी, जहां कोरोना संक्रमितों की संख्या ज्यादा है या फिर लगातार बढ़ रही है। देश के 284 जिले ऑरेंज जोन में और 319 जिले ग्रीन जोन में हैं। इन जिलों में जल्द से जल्द सभी तरह की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं, लेकिन इसमें कई परेशानियां भी हैं। देश के बड़े शहर दिल्ली मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद रेड जोन में हैं। इन्हीं शहरों से सबसे ज्यादा आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। या तो बड़े उद्योग वहां हैं या फिर उनके मुख्यालय। इसके अलावा इन गतिविधियों को शुरू करने में मजदूरों की कमी भी बड़ा रोड़ा बन सकती है।

लॉकडाउन में काम न मिलने के चलते अधिकतर मजदूर पलायन कर गए हैं। उम्मीद है काम धंधे शुरू होने के बाद ये मजदूर जल्द ही वापस आ जाएंगे। सोमवार को मुख्यमंत्रियों के साथ लगातार पांचवीं चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि धीरे-धीरे ही सही, लेकिन देशभर के कई हिस्सों में आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ रही हैं। आने वाले दिनों में इसमें तेजी आएगी। इससे साफ है कि सरकार का इरादा अर्थव्यवस्था को गति देने का है। इसके साथ हमें यह भी याद रखना होगा कि कोरोना अभी गया नहीं है, बल्कि हमारे साथ ही है। इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग समेत सभी सुरक्षा मानक अपनाना बहुत जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया तो हम लॉकडाउन से भी बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं।

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