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योगेश कुमार सोनी का लेख : नए ईधनों के लिए सुगमता जरूरी

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट के दौरान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देगी। भारत में ज्यादा इलेक्िट्रक वाहनों का प्रयोग हो, इसके लिए सरकार सस्ते ई-वाहन मुहैया कराएगी। दरअसल बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए विगत दिनों नीति आयोग ने निर्माता कंपनियों को अपना रोड प्लान साझा करने को कहा था जिस पर इस बजट में इन वाहनों को बढ़ाने पर जोर दिया जाए। दरअसल मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में भी इस पर बहुत जोर दिया था। इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की व्यवस्था में तेजी लाने की जरूरत है।

योगेश कुमार सोनी का लेख : नए ईधनों के लिए सुगमता जरूरी
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योगेश कुमार सोनी 

योगेश कुमार सोनी

हाल ही में इलेक्ट्रिक इंजन को लोगों ने पसंद करना शुरू कर दिया। हालांकि कुछ दिनों पहले तक भी भारतीय इसमें रुचि नहीं ले रहे थे जिसके कई कारण बताए जा रहे थे। विशेषज्ञों ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ने का मुख्य कारण यह रहा कि पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं व सीएनजी के वाहन इतने बढ़े हैं कि इसे भरवाने के लिए घंटो लाइन में लगना पड़ता है। लोग अब अन्य ईंधन की ओर बढ़ना चाहते हैं।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट के दौरान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देगी। भारत में ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग हो, इसके लिए सरकार सस्ते ई-वाहन मुहैया कराएगी। साथ ही सरकार परिवहन क्षेत्र में तेज विकास पर जोर देगी। दरअसल बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए विगत दिनों नीति आयोग ने निर्माता कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अपना रोड प्लान साझा करने को कहा था जिस पर इस बजट में इन वाहनों को बढ़ाने पर जोर दिया जाए। यह कदम तो अच्छा है, लेकिन इसे संचालित करना अभी चुनौतीपूर्ण है। दरअसल मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में भी इस पर बहुत जोर दिया था, पर अपेक्षित कामयाबी नहीं थी। इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की व्यवस्था में तेजी लाने की जरूरत है, जिससे वाहनों की ब्रिकी में और तेजी आ सकती है। जिस तरह इलेक्ट्रिक वाहनों ने थोड़ी स्पीड पकड़ी है उस आधार पर सरकार इस मामले में गंभीरता दिखाए तो बाजार में गर्मी आ जाएगी। जैसे पेट्रोल-डीजल या सीएनजी पंप थोड़ी-थोड़ी दूरी पर हैं वैसे ही इन वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन का होना अनिवार्य है। इनके अधिक चलने की क्षमता पर भी ध्यान देना होगा, क्योंकि कार अधिकतम 170 किलोमीटर तक ही चलती है और स्कूटर 50 किलोमीटर व उसको अन्य ईंधन से भी नहीं चला सकते। जैसे सीएनजी या एलपीजी खत्म होने पर उसको पेट्रोल पर चला सकते हैं।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि अभी हर जगह फास्ट चार्जर उपलब्ध नहीं हैं, जिस वजह से एक कार चार्ज होने में 2 से 3 घंटे लेती है। यदि किसी चार्जिंग स्टेशन पर पांच कारें लग जाती हैं तो आखिरी वाले का अगले ही दिन नंबर आएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों में पावर की कमी भी देखने को मिलती है। साथ ही इनकी टॉप स्पीड भी अभी बहुत कम है जिस पर कंपनियों को ध्यान देना होगा। इन वाहनों की सबसे बड़ी कमी उनकी री-सेल वैल्यू बहुत कम आंकी जाती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा वाहन बिकेंगे। इनमें लगी मोटर की लाइफ भी करीब 6-7 वर्ष ही होती है इसके अलावा ओवरचार्ज्ड होने पर इनकी बैटरी लाइफ कम होती हैं। मौजूदा ई-टू व्हीलर की रफ्तार 25 किलोमीटर/घंटा है, जबकि बहुत ही कम ऐसे मॉडल हैं जिनकी स्पीड 40 किलोमीटर/घंटा से ज्यादा है। वहीं इसके विपरीत तमाम फायदे भी हैं। जैसे कि इनके इस्तेमाल से पॉल्यूशन नहीं होता। एयर पॉल्यूशन से भी निजात मिलती है। आजकल सड़कों पर हमें ट्रैफिक की समस्या से हर रोज दो चार होना पड़ता है। जाम के अलावा ट्रैफिक के कारण बढ़ता शोर भी हमारी सेहत पर नकारात्मक असर डालता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन हमें इस शोर से भी आजादी दिला रहे हैं।

चूंकि इलेक्ट्रिक वाहनों में बैट्री लगी होती है, इसलिए पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में ये ज्यादा शोर नहीं करते। ऐसे में इन्हें चलाने समय आप रिलेक्स महसूस करते हैं। जैसे कि लोकल में जाने के लिए इससे बेहतर विकल्प नहीं होगा जिससे रिहायशी क्षेत्रों में प्रदूषण बेहद कम हो सकता है। महिलाओं व युवाओं के लिए तो यह बेहतर विकल्प है। बीते दिनों मुंबई में फास्ट चार्जिंग स्टेशन लगाया गया है, यहां 24 घंटे गाडि़यां चार्ज हो सकेंगी। इस चार्जिंग स्टेशन में कुल मिलाकर 21 चार्जर हैं, जिनमें से चार डीसी फास्ट व जिनकी क्षमता 15 से 50 किलोवाट है, जबकि बाकी सतरह यूनिट्स 4 से 8 किलोवाट क्षमता के एसी चार्जर हैं। मैजेंटा के अनुसार गाड़ियों के आधार पर डीसी फास्ट चार्जर एक इलेक्ट्रिक वाहन को लगभग पौने घंटे में फुल चार्ज करता है। यह स्टेशन सौर पैनलों द्वारा संचालित होता है, जिससे 40 केवी बिजली मिलती है। ऐसे स्टेशनों की संख्या बढ़ाते हुए पूरे देश में लगाने की जरूरत है। हाल ही में गुजरात में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की कीमत में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। वाहन निर्माता ने कहा कि ग्राहकों को सरकार द्वारा घोषित नई फेम टू योजना के तहत सब्सिडी और गुजरात सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति में बदलाव करते हुए कीमतें कम करने का फैसला किया है। कंपनी ने गुजरात में अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर को 5 हजार से चालीस हजार रुपये तक सस्ता कर दिया है। गुजरात में ओकिनावा के ग्राहकों की संख्या करीब 7 हजार हैं। जिसे कंपनी ने साल 2022 तक तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। हाल ही में इलेक्ट्रिक कारें सरकारी अधिकारियों को दी जा रही हैं व कार्यालयों में इसके चार्ज प्वाइंट बनाए गए हैं, लेकिन ऐसे वाहनों के लिए अभी भी जबर्दस्त तैयारी की जरूरत है। यह किसी भी कंपनी या सरकार की पॉलिसी होनी चाहिए कि किसी भी प्रोडेक्ट को लाॅन्च करने से पहले तैयारी अच्छे से कर ली जाए जिससे उपभोक्ताओं को कोई समस्या न हो।

कोलकाता स्थित केएसएल की क्लीनटेक लिमिटेड की योजना भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तीन सौ करोड़ खर्च करते हुए पिछले 2 वर्षों में ही 10 तरह के बाजार मे उतार दिए जो लोगों को बहुत भा रहे हैं। इसके अलावा तमाम कंपनियां हैं जो इस ओर आकर्षित होकर आ रही हैं। हमारे आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देना अनिवार्य है वरना महानगरों में मनुष्य की आयु मात्र 55 से 60 वर्ष तक ही रह गई।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कोई भी प्राइवेट कंपनी या सरकार निवेशक के रूप में तभी आकर्षित करेगी जब उसके उपभोक्ताओं की संख्या अधिक होगी और उपभोक्ता जब तक सुविधा से पूर्णत: संतुष्ट नहीं होगा तो वह प्रोडक्ट नहीं लेगा। कई दृष्टिकोणों के साथ यदि इस पर काम किया जाए तो इससे आर्थिक फायदा भी है। बढ़ती जनसंख्या व प्रदूषण को मद्देनजर रखते हुए इसकी प्रारंभिकता सबसे बेहतर कदम है। कभी-कभी लगता है कि कुछ ऐसे काम हैं जिस पर गंभीरता से काम किया जाए तो हम एक नए व मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं उनमें से इलेक्ट्रिक वाहन जैसे कदम सर्वश्रेष्ठ कदम साबित हो सकता है। यदि इसके चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ा दें। इसके अलावा सरकार को अन्य प्रकार के ईंधन की ओर बढ़ना चाहिए जिससे बढ़ते वाहनों पर महंगे ईधन की मार न पड़े। हम डिजिटल युग की ओर बढ़ रहे हैं जिसमें हर नए बदलाव व तरक्की की जरूरत है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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