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नेपाल में फिर भूकंप से दहशत के साये में लोग

नेपाल सहित देश के उत्तरी क्षेत्र में आए भूकंप के झटके से लोग अभी पूरी तरह उबरे भी नहीं हैं कि मंगलवार को दोबारा उसी हिस्से में झटके लगने से एक बार फिर दहशत फैल गई है।

नेपाल में फिर भूकंप से दहशत के साये में लोग
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पिछले दिनों नेपाल सहित देश के उत्तरी क्षेत्र में आए भूकंप के झटके से लोग अभी पूरी तरह उबरे भी नहीं हैं कि मंगलवार को दोबारा उसी हिस्से में झटके लगने से एक बार फिर दहशत फैल गई है। इस बार भूकंप का केंद्र नेपाल के काठमांडू से कुछ दूरी पर स्थित कोडारी का इलाका बताया जा रहा है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी झटके महसूस किए गए हैं। नेपाल में जानमाल के नुकसान के आंकड़ों में निरंतर वृद्धि की खबरें आ रही हैं। वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश से भी घरों के गिरने और लोगों के मरने की खबर है। 25 अप्रैल को नेपाल में 7.9 तीव्रता वाला भूकंप आया था
जिसके बाद जानमाल की भारी तबाही मची थी। करीब आठ हजार लोग मलबे में दब कर मर गए। कई ऐतिहासिक धरोहरें देखते-देखते जमींदोज हो गर्इं। हजारों लोग बेघर हुए हैं सो अलग। वहीं बड़े पैमाने पर लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। राहत और बचाव का कार्य अभी चल ही रहा है। जब पिछली तबाही की स्मृति लोगों की जेहन में ताजा हो तब एक के बाद एक लगातार छह झटके जनमानस को डराने के लिए काफी हैं। पहली बार आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.4 आंकी गई है। उसके बाद उनकी तीव्रता कम होती गई।
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो इस तरह के आफ्टरशॉक महीनों आते रह सकते हैं। पिछली बार जब भूकंप आया था तब उसके बाद कुछ ही दिनों के अंदर इस हिमालयी क्षेत्र में 160 आफ्टरशॉक आ गए थे। हालांकि वैज्ञानिकों की चिंता आफ्टरशॉक की तीव्रता को लेकर है। उनका कहना है कि अमूूमन एक बार बड़ा भूकंप आने के बाद इसकी तीव्रता घटती जाती है, लेकिन इस मामले में विपरीत देखा जा रहा है। ऐसे में लोगों को सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि दो बड़े झटकों को बर्दाश्त करने के बाद घरें कमजोर हो जाती हैं व उनके गिरने का खतरा रहता है। पूरे हिमालयी क्षेत्र में अभी मौसम खराब है। ऐसे में भूस्खलन होने की भी आशंका जताई जा रही है।
इससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उचित ही सक्रियता दिखाई है। संबंधित एजेंसियों को एलर्ट रहने का संदेश दिया गया है। पिछली बार भी उनकी सक्रियता की पूरी दुनिया में तारीफ हुई थी। उसी वजह से भारत नेपाल में समय रहते राहत और बचाव कार्य आरंभ करने में सफल रहा। चूंकि मनुष्य के लिए भूकंप का अनुमान लगाना अभी भी असंभव कार्य बना हुआ है इसीलिए जब भी वह आता है जनधन की हानि व्यापक पैमाने पर होती है। वैज्ञानिक सिर्फ यही जान पाए हैं कि किन-किन इलाकों में भूकंप के आने की संभावना सबसे ज्यादा है। पूरे हिमालयी क्षेत्र में भूकंप का खतरा सबसे ज्यादा है। नेपाल सहित भारत का भी एक बड़ा भूभाग इससे लगा हुआ है। लिहाजा भारत के उत्तरी और उत्तर-पूर्वी इलाके भूकंप के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील हैं।
हम प्राकृतिक आपदाओं को रोक नहीं सकते हैं, लेकिन उनसे बचाव के लिए जरूरी तैयारी कर सकते हैं। तय किया जाना चाहिए कि आगे जो भी निर्माण कार्य हों वे भूकंपरोधी तकनीकी से लैस होंगे। भूकंप आने पर क्या किया जाना चाहिए उसके प्रति भी जन-जन को जागरूक किया जाना चाहिए जिससे अधिक से अधिक लोगों को बचाया जा सके। हालांकि हर बार विपदा आने पर सजग होने का दंभ भरा जाता है, लेकिन मामला शांत होने के बाद तैयारियों की कोई सुध नहीं ली जाती है।

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