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दशहरा: बड़े रावण ने बुलाई सभी छोटे रावणों की अर्जेंट मीटिंग

शहर के सबसे ऊंचे रावण द्वारा शहर के सभी छोटे-बड़े रावणों को दशहरे के दिन अर्जेंट मीटिंग के लिए बुलाया गया था। सभी को सुबह शार्प नौ बजे मीटिंग स्थल पहुंचना था, पर दस बजे तक भी इक्का-दुक्का रावण ही घटना स्थल पर पहुंचे थे। एक रावण कुम्भकर्ण के साथ देर तक सोता रहा इसलिए लेट हो गया।

दशहरा: बड़े रावण ने बुलाई सभी छोटे रावणों की अर्जेंट मीटिंग
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शहर के सबसे ऊंचे रावण द्वारा शहर के सभी छोटे-बड़े रावणों को दशहरे के दिन अर्जेंट मीटिंग के लिए बुलाया गया था। सभी को सुबह शार्प नौ बजे मीटिंग स्थल पहुंचना था, पर दस बजे तक भी इक्का-दुक्का रावण ही घटना स्थल पर पहुंचे थे। एक रावण कुम्भकर्ण के साथ देर तक सोता रहा इसलिए लेट हो गया।

एक रावण रास्ते नाश्ता करने रुक गया, हाटल वाले ने नाश्ता देने में बहुत देर लगा दी इसलिए लेट हो गया। एक अन्य रावण सड़क पर ट्रैफिक ज्यादा होने के कारण लेट हो गया। शहर का एक नामी रावण रास्ते से कुछ छोटे-छोटे रावणों को पिक-अप करता हुआ आया इसलिए लेट हो गया।

जितने रावण उतने मुंह और उतनी ही बातें। सुबह नौ बजे शुरू होने वाली मीटिंग ग्यारह बजे शुरू हो पाई। छोटे-बड़े सभी रावणों ने इस मीटिंग में अपनी बात रखी। मीडिया को इस मीटिंग से दूर ही रखा गया था। इस मीटिंग में जिन प्रमुख मुद्दों पर बातचीत हुई वे इस प्रकार है।

डिजिटल के ज़माने में भी अब तक मैन्युअल रावण ही बनाए और जलाएं जा रहे है। जब हर क्षेत्र में आज डिजिटल की बात हो रही है तो रावण दहन को इससे अछूता क्यों रखा जा रहा है। अब समय आ गया है जब ई-रावण,रिमोट से जलने वाला रावण, खास पॉसवर्ड से जलने वाला रावण आदि प्रयोग होने चाहिए।

जब बुराई के प्रतिक माने जाने वाले रावण को जलाने से भी बुराइयां कम नहीं हो रही है बल्कि साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है तो रावण दहन का दिखावा क्यों। रावण की ऊंचाई के साथ बुराइयां भी बढ़ती जा रही है। पर्यावरण की रक्षा के लिए बिना पटाखों के रावण का निर्माण क्यों नहीं किया जाता।

कुछ ही मिनट में जलकर राख हो जाने वाला ऊंचे से ऊंचा रावण कितना वायु एवं ध्वनि प्रदुषण फैलता है। इस दशहरे पर हम सभी को अपने शरीर के भीतर रखे जाने वाले पटाखों का विरोध करना चाहिए। सबको बताना चाहिए कि पर्यावरण को बचाना कितना जरूरी है।

असली रावण को राम ने ही मारा था पर इस कलयुग में तो रावण दहन वही करता है जो रावण से भी बुरा होता है। हम सब को मिलकर यह मांग करनी चाहिए कि हमारा दहन उसी के हाथों हो जो राम न सही पर कम से कम रावण तो न हो।

एक रावण दूसरे रावण को मारे यह ठीक नहीं लगता। मारने का काम ऐसे इंसान को करना चाहिए जो राम की तरह ही हो, अगर ऐसा ना हो तो फिर रावण के हाथों रावण को जलवाना कहां तक ठीक है, इससे को किसी को भला नहीं होने वाला।

आज जब गली-गली में राम बनाने की जरुरत है तब गली-गली में रावण बनाये जा रहे है। बड़े तो बड़े बच्चे भी रावण बना रहे है। इसे रोकना चाहिए। मीटिंग खत्म होने के बाद सभी रावण अपने-अपने दहन स्थल की ओर रवाना हो गए।

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