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डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख: करदाता को राहत लाभप्रद

कोरोना से बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के द्वारा पिछले दिनों बैंकिंग क्षेत्र तथा करदाताओं को दी गई राहत सराहनीय है। विवाद से विश्वास योजना की समयावधि 30 जून तक बढ़ाया जाना करदाताओं के लिए एक लाभप्रद मौका है और उम्मीद की जा रही है कि बड़ी संख्या में कर दाता विवाद से विश्वास योजना का लाभ लेंगे। हम उम्मीद करें कि कर संबंधी विवादों का समाधान करने के परिप्रेक्ष्य में विवाद से विश्वास योजना आखिरी योजना के रूप में दिखाई देगी।

डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख: करदाता को राहत लाभप्रद

डॉ. जयंतीलाल भंडारी

यकीनन कोरोना से बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के द्वारा पिछले दिनों बैंकिंग क्षेत्र तथा करदाताओं को जो राहत दी गई है, वह सराहनीय है। गौरतलब है कि 17 अप्रैल को रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी बढ़ाने के नए कदमों का ऐलान किया है। देश की वित्तीय स्थिरता को बचाने और आर्थिक गिरावट थामने के लिए बाजार में करीब 50000 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी के कई उपाय घोषित किए हैं। इनसे छोटे वित्तीय संस्थानों, किसानों और छोटे उद्योग कारोबार से जुड़े लोगों को विशेष रूप से लाभ होगा।

इसी तरह कोरोना संकट की चुनौतियों का सामना कर रहे देश के करदाताओं को दो तरह की राहत दी गई है। एक, सरकार ने आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 जून 2020 की है। एडवांस टैक्स, टीडीएस के लेट पेमेंट पर सिर्फ 9 प्रतिशत ब्याज लगेगा। पांच करोड़ से अधिक टर्नओवर वाली कंपनियां जून के आखिरी सप्ताह तक रिटर्न फाइल कर सकती हैं। पेन आधार लिंकिंग की समय सीमा 30 जून की गई है। दो, 1 अप्रैल 2020 से लागू किए गए वित्त वर्ष 2020-21 के बजट के तहत प्रत्यक्ष कर सुधार (डायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म) की दो बड़ी योजनाओं को मूर्त रूप दिया गया है। इससे बड़ी संख्या में देश के करदाता लाभान्वित होंगे। इन दो बड़ी योजनाओं में से एक योजना प्रत्यक्ष कर विवादों के समाधान के लिए विवाद से विश्वास योजना है और दूसरी करदाताओं के अधिकारों के लिए करदाता चार्टर को लागू करने से संबंधित है।

गौरतलब है कि देश में पहली बार विवाद से विश्वास योजना के तहत प्रत्यक्ष कर विवादों के समाधान की विवाद से विश्वास योजना के तहत 30 जून तक विवादित बकाया टैक्स का भुगतान करने पर टैक्स पेयर्स को टैक्स पर लगने वाले ब्याज एवं जुर्माने से मुक्त कर दिया जाएगा। देश में करीब 4,83,000 प्रत्यक्ष कर विवादों के मामलों में 30 नवंबर, 2019 तक 9,96,829 लाख करोड़ रुपये का कर फंसा हुआ है। इनमें से 5,02,157 करोड़ रुपये कॉरपोरेट टैक्स से जुड़े हैं तथा 4,94,671 करोड़ रुपये आयकर से संबंधित हैं।

अब करदाता लंबित कर मामलों के परिप्रेक्ष्य में लागत और लाभ का विश्लेषण करेंगे, अपने मुकदमों को समाप्त करने के लिए उपयुक्त विवरण जमा करेंगे और इन विवादों पर अदालत की कार्यवाही बने रहने की संभावनाओं को समाप्त कर देंगे। यह बात महत्वपूर्ण है कि विवाद से विश्वास योजना को पिछले वर्ष 2019 में अप्रत्यक्ष कर विवाद संबंधी मामलों के लिए लाई गई समाधान योजना की सफलता के आधार पर ही प्रस्तुत किया गया है। पिछली समाधान योजना के तहत करीब 2,00,000 करोड़ रुपये के कर संबंधी विवादों का निपटारा किया गया था।

इस योजना को सफल बनाने के लिए सरकार कितनी दृढ़ संकल्प है इसका अनुमान केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के द्वारा प्रत्यक्ष कर से संबंधित अधिकारियों को भेजे गए उस परिपत्र से लगाया जा सकता है, जिसमें कहा गया है कि भविष्य में प्रत्यक्ष कर से संबंधित आधिकारियों की वार्षिक वेतनवृद्धि और पदोन्नति विवाद से विश्वास योजना के तहत उनके द्वारा किए गए कार्य प्रस्तुतिकरण पर निर्भर करेगी।

यह बात महत्वपूर्ण है कि इस नई प्रत्यक्ष कर समाधान योजना के तहत करदाता अपनी पिछली अतिरिक्त आय का खुलासा कर सकेंगे। नई प्रत्यक्ष कर समाधान योजना के तहत कमिश्नर अपील, आयकर अपील न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालयों तथा सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रत्यक्ष कर विवादों के साथ-साथ मध्यस्थता और ऋण वसूली पंचाटों में लंबित मुकदमों तथा कर संशोधन और जब्ती के छोटे मामले भी इसमें शामिल किए गए हैं। इनके निपटान में ब्याज, जुर्माने और अभियोजन की छूट की पेशकश की गई है।

अर्थविशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना से आर्थिक सुस्ती से निपटने की डगर पर आगे बढ़ रही देश की अर्थव्यवस्था को जहां करीब नौ लाख करोड़ रुपये की एक बड़ी धनराशि उपलब्ध हो सकती है और मुकदमों पर सरकार को होने वाला खर्च घट सकेगा, वहीं चूककर्ता करदाताओं को बिना किसी भेदभाव के फार्मूला आधारित समाधान मिलेगा और उनके कर भुगतान संबंधी तनाव में कमी आएगी।

इसी तरह नए बजट के तहत देश के इतिहास में पहली बार करदाता चार्टर भी लागू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि बजट में आयकर अधिनियम में एक नई धारा 119ए जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है। यह धारा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को एक करदाता चार्टर अपनाने एवं घोषित करने के लिए अधिकृत करती है। आयकर अधिनियम में नई धारा जोड़े जाने के बाद सीबीडीटी के पास आयकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश और आदेश जारी करने की शक्ति मिल जाएगी।

ज्ञातव्य है कि दुनियाभर में कोई 40 देशों में ऐसे करदाता चार्टर बने हुए हैं। भारत को अक्सर घरेलू एवं विदेशी करदाता एक आक्रामक कर नियमन वाले देश के रूप में देखते रहे हैं। ऐसे में करदाताओं के लिए तैयार चार्टर से करदाताओं का भरोसा बहाल करने में मदद मिलेगी। जहां करदाता चार्टर करदाताओं को अधिकार देगा वहीं कर अधिकारियों की जवाबदेही दिखाई देगी।

नि:संदेह यह बात ध्यान देने योग्य है कि जिन प्रत्यक्ष कर सुधारों को वर्ष 2020-21 के बजट में स्थान दिया गया है, उनके लिए सुझाव नई प्रत्यक्ष कर संहिता (न्यू डायरेक्ट टैक्स कोड-डीटीसी) समिति की रिपोर्ट में दिया गया है। अब जब कुछ प्रत्यक्ष कर सुधारों को आकार दिया जाने लगा है, तब पूरा देश नई प्रत्यक्ष कर संहिता और नए इनकम टैक्स कानून को आकार दिए जाने की प्रतीक्षा कर रहा है।

निश्चित रूप से विवाद से विश्वास योजना की समयावधि 30 जून तक बढ़ाया जाना करदाताओं के लिए एक लाभप्रद मौका है और उम्मीद की जा रही है कि बड़ी संख्या में कर दाता विवाद से विश्वास योजना का लाभ लेंगे| हम उम्मीद करें कि कर संबंधी विवादों का समाधान करने के परिप्रेक्ष्य में विवाद से विश्वास योजना आखिरी योजना के रूप में दिखाई देगी। यह पाया गया है कि कई बार ईमानदार करदाता विवाद से विश्वास जैसी योजनाओं को नैतिक मानदंडों के उपयुक्त नहीं मानते हैं, इसलिए यह उपयुक्त होगा कि अब 30 जून 2020 के बाद कर संबंधी विवादों के समाधान के लिए कोई नई विश्वास योजना लाने से बचा जाएगा और कोई उपयुक्त नवाचारी समाधान ही तलाशे जाएंगे।

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