Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

पाक की गर्दन पर ट्रंप का हाथ, चीन में खलबली

अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को मिलने वाली 25 करोड़ 50 लाख अमेरिकी डॉलर सहायता पर रोक लगा दी है, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि 15 सालों तक अमेरिका को मूर्ख बनाने का आरोप लगाया है, इस दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को 33 बिलियन डॉलर की सहायता दी थी।

पाक की गर्दन पर ट्रंप का हाथ, चीन में खलबली
X

अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध खतरनाक दौर में पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को मिलने वाली 25 करोड़ 50 लाख अमेरिकी डॉलर सहायता पर रोक लगा दी है, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि 15 सालों तक अमेरिका को मूर्ख बनाने का आरोप लगाया है, इस दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को 33 बिलियन डॉलर की सहायता दी थी।

अमेरिका की इस कार्यवाही पर पाकिस्तान के तेवर गर्म हैं, पर वह अमेरिका का क्या बिगाड़ लेगा। अब तो पाकिस्तान की आर्थिक चूल्हा-चौकी पर आंच कहां से आयेगी। पाकिस्तान ने रिपब्लिकन सत्ता के इतिहास को देखा और समझा होता तो उसे यह ज्ञात होता कि रिपब्लिकन सत्ता को मूर्ख समझना कठिन और हानिकारक होगा।

पाकिस्तान को उसी समय सावधान हो जाना चाहिए था जब अमेरिका की सत्ता से डेमोक्रेट पार्टी बाहर हो गयी थी और अमेरिका की सत्ता पर रिपब्लिकन पार्टी की सत्ता कायम होते के साथ राष्ट्रपति बन गये थे। डेमोक्रेट पार्टी उदारवादी होती है जो समस्याओं को लंबा खींचती है, कठिन कदमों के लिए ज्यादा से ज्यादा समय लेती है जबकि रिपब्लिकन पार्टी घनघोर राष्ट्र्वादी होती है और अपने हित को कठोरता के साथ लागू करने के लिए जानी जाती है।

डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर जार्ज बुश जूनियर और जार्ज बुश सीनियर तक इसके उदाहरण हैं। जार्ज बुश जूनियर और जार्ज बुश सीनियर अमेरिकी हितों की रक्षा करने के लिए युद्ध तक करने से भी पीछे नहीं रहे हैं, जार्ज बुश सीनियर ने जहां इराक को आत्मसमर्पण करने के लिए बाध्य किया था वहीं जार्ज बुश जूनियर ने इराक पर सद्दाम हुसैन की सत्ता को उखाड़ फेंका, अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता को उखाड़ फेंका था।

जार्ज बुश जूनियर पाकिस्तान की कारस्तानी को जानते थे पर उनकी समस्या यह थी कि तालिबान और अलकायदा के सफाये के लिए उन्हें पाकिस्तान का साथ चाहिए था और पाकिस्तान में अमेरिकी बेस को सुरक्षा चाहिए थी और यह सुरक्षा पाकिस्तान की ईमानदारी पर निर्भर थी। पाकिस्तान ने प्रारंभिक काल में डर के कारण जार्ज बुश जूनियर को जरूर साथ दिया था पर जैसे-जैसे समय बीतता गया,

वैसे-वैसे पाकिस्तान पैंतरेबाजी दिखाता चला गया और उसके आतंकवादी संगठनों के साथ रिश्ते और आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देने वाली नीति बढ़ती चली गई। आतंकवादी संगठनों को काबू रखने के नाम पर पाकिस्तान पैंतरेबाजी पर उतर आया। आतंकवादी संगठनों को काबू करने के लिए वह अमेरिका से अधिकतम वसूली की नीति अपनाता रहा।

अमेरिका पर डेमोक्रेटिक सत्ता आठ साल रही थी और बराक ओबामा आठ सालों तक अमेरिका के राष्ट्रपति थे। जार्ज बुश जूनियर के सामने पाकिस्तान को साथ रखने की कुछ मजबूरियां जरूर थीं पर जार्ज बुश जूनियर ने पाकिस्तान को खुली छूट नहीं दे रखी थी बल्कि पाकिस्तान के विरोध के बावजूद जार्ज बुश जूनियर ने भारत को दोस्त बनाया था और भारत के साथ दोस्ती का नया अध्याय लिख कर पाकिस्तान को संदेश दिया था,

और यह अहसास कराया था कि अगर तुमने आतंकवादी नीति जारी रखी तो फिर उसकी भी पाकिस्तान नीति बदल सकती है। जार्ज बुश ने भारत को तरजीह देकर पाकिस्तान को संरक्षणवादी नीति बदल डाली थी। पर अमेरिका की सत्ता पर डेमोक्रेट पार्टी के बैठने और बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद पाकिस्तान की आतंकवादी संरक्षण नीति परवान चढ़ी थी और आतंकवाद का हित शोधन भी खतरनाक ढंग से हुआ था।

बराक ओबामा का मूल मुस्लिम समुदाय से जुड़ता था। अमेरिका के राष्ट्रवादियों का आरोप था कि बराक ओबामा एक मुस्लिम हैं इसलिए बराक ओबामा मुस्लिम आतंकवादियों पर उदार नीति अपना रहे हैं और पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश को न केवल संरक्षण दे रहे हैं बल्कि पाकिस्तान को आतंकवादियों के खात्में के नाम पर अरबों डालर दे रहे हैं।

यह सही था कि बराक ओबामा ने मुस्लिम देशों की आतंकवादी नीति को लेकर कोई कठिन कार्यवाही नहीं की थी, मुस्लिम देशों को सबक िसखाने के लिए कोई सीधे या फिर सबककारी कदम नहीं उठाये थे। बराक ओबामा ने पाकिस्तान को भी कोई कठिन संदेश देने में असफल रहे थे। बराक ओबामा की खुशफहमी थी कि पाकिस्तान आतंकवादियों पर कार्यवाही कर रहा है, पाकिस्तान सच बोल रहा है।

पर बराक ओबामा की यह सोच अमेरिका की सुरक्षा नीति ही नहीं बल्कि अमेरिका के हिताेें पर भारी पड़ गयी। जार्ज बुश जूनियर ने जिस तालिबान और अलकायदा को अफगानिस्तान छोड़ने के लिए बाध्य किया था, जार्ज बुश जूनियर ने जिस तालिबान-अलकायदा को अफगानिस्तान में सारे नेटवर्क को विध्वंस कर दिया था उस तालिबान और अलकायदा ने फिर से सिर उठा लिया, उस तालिबान और उस अलकायदा फिर से अफगानिस्तान में अपना आतंकवाद का नेटवर्क कायम करने में सफल हो गया। ब

राक ओबामा को उसी दिन सावधान हो जाना चाहिए था, जिस दिन अलकायदा का आतंकवादी सरगना ओसामा बिन लादेन पकड़ा गया था और अमेरिकी सैनिकों ने ओसामा बिन लादेन काे मार गिराया था। आज डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करने वाले भी आज प्रशंसक बन गये हैं, अमेरिका के अंदर डोनाल्ड टम्प के समर्थक वर्ग आज अपने आप को सुखद स्थिति में महसूस कर रहा है।

डोनाल्ड टम्प ने अपने चुनावी भाषण में घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान को सबक सीखायेगा, मुस्लिम आबादी की आतंकवादी मानसिकताओ को जमींदोज कर देगा, अमेरिका के हित को खतरे में डालने वाले देश, आतंकवादी संगठन, और समूह बचेंगे नहीं। धीरे-धीरे डोनाल्ड ट्रंप अपनी घोषणा को अंजाम तक पहुंचा रहे हैं। पाकिस्तान को खुशफहमी हो गयी थी कि बराक ओबामा की तरह डोनाल्ड ट्रंप भी एक समय के बाद शांत हो जायेंगे, उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा,

लेकिन पाकिस्तान की यह सोच खतरनाक साबित हुई। डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता रोक कर संदेश दे दिया। पाकिस्तान के बुरे दिन अब आने वाले हैं। चीन भी पाकिस्तान को मदद नहीं करेगा। चीन तो पाकिस्तान को उकसायेगा पर डॉलर नहीं देगा।

अगर पाकिस्तान को अमेरिका से डालर नहीं मिलेगा तो फिर पाकिस्तान की चूल्हा-चौकी कैसे जलेगी। पाकिस्तान को आतंकवादी, आतंकवादी संगठन या फिर अमेरिका की मार में से एक को चुनना होगा। डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम पाकिस्तान के लिए बहुत भारी पड़ने वाला है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top