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Donald Trump India Visit : परस्पर हितों का नया अध्याय

Donald Trump India Visit : कोल्डवॉर के तल्ख कूटनीतिक संबंधों के बाद भारत और अमेरिका के परस्पर संबंध अब प्रबल प्रगाढ़ता की तरफ अग्रसर हैं। राष्ट्रपति ट्रंप पत्नी मेलानिया ट्रंप और पुत्री इवानका के साथ भारत दौरे पर आ रहे हैं। महाअभियोग ट्रायल में बाकायदा बरी कर दिए जाने पश्चात राष्ट्रपति ट्रंप की प्रथम विदेश यात्रा होगी।

Donald Trump India Visit : परस्पर हितों का नया अध्यायअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

कोल्डवॉर के ऐतिहासिक दौर में तल्ख कूटनीतिक संबंधों के कारण जबरदस्त तनाव से गुजर चुके भारत और अमेरिका के परस्पर संबंध अब प्रबल प्रगाढ़ता की तरफ अग्रसर हैं। अमेरिका पर वर्ष 2001 में 9/11 के बर्बर जेहादी आक्रमण के पश्चात ही दोनों राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय जेहादी आतंकवाद नृशंस साझा दुश्मन के विरुद्ध एकजुट हेने लगे थे। उल्लेखनीय है भारत-अमेरिका के मध्य निरंतर प्रगाढ़ होते कूटनीतिक संबंधों के तहत वर्ष 2015 में पूर्व अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत यात्रा अंजाम दी गई थी। भारत सरकार के प्रेस सचिव और अमेरिकन व्हाइट हाऊस के प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 24 और 25 फरवरी को आयोजित होने वाली भारत यात्रा का ब्योरा पेश किया।

राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और पुत्री इवानका भी रहेंगी। अमेरिकन सीनेट द्वारा महाअभियोग ट्रायल में बाकायदा बरी कर दिए जाने पश्चात राष्ट्रपति ट्रंप की प्रथम विदेश यात्रा होगी। विगत वर्ष 2019 के दिसंबर माह में लिए भारत के विदेशमंत्री और रक्षामंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान मिनिस्ट्रियल डॉयलाग के द्वितीय सत्र के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की बुनियाद रखी गई। कार्नेजी एंडामेंट फॉर इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट के दक्षिण एशिया मामलात के विशेषज्ञ एल्शे टेलिस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का भारत दौरा पूर्णतः कामयाब सिद्ध होगा। अमेरिका के सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में अमेरिका-भारत कूटनीतिक संबंधों के विशेषज्ञ रिक रोसॉव का कथन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप हाल ही में दोनों देशों के मध्य उत्पन्न हुए व्यापार अवरोधों का कामयाबी के साथ निदान कर सकते हैं। डिफेंस सेक्टर और ट्रेड इनिशिएटिव के तहत टेक्नोलाॅजी ट्रांसफर समझौता संपन्न हो सकता है। दिसंबर 2019 में भारत और अमेरिकी द्वारा इंडस्िट्रयल सिक्योरिटी एनेक्स (आईएसए) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। यह आईएसए समझौता संकट के वक्त न केवल सुरक्षित रक्षा संबंधित चैनलों के माध्यम से सूचनाओं को साझा करने की अनुमति देगा, बल्कि दोनों देशों की निजी संस्थाओं के बीच आपसी सहयोग के जरिए मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने में भी सहायता प्रदान करेगा। अमेरिका और भारत के मध्य स्पेस, साइंस और वॉटर पर अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।

इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम की हो सकती है डील

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली भारतीय यात्रा के दौरान दोनों देश डिफेंस और स्पेस सेक्टर में पार्टनरशिप के साथ सीमित व्यापार समझौते पर बने रोडमैप को भी अंतिम रूप दे सकते हैं। इस दौरे के महत्वपूर्ण परिणामों में इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम के लिए 1.86 अरब डॉलर की डील भी संपन्न हो सकती है। इसे नेशनल एडवांस्ड सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम-II के नाम से भी जाना यह समझौता काफी महत्वपूर्ण है, दोवास में वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम की मीटिंग में पाक़ प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मुलाकात में राष्ट्रपति ट्रंप ने कश्मीर विवाद में मध्यस्थता करने की तीसरी दफ़ा पेशकश की। भारत द्वारा कश्मीर विवाद में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया जा चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप किसी के लिए कुछ भी क्यों न हो, किंतु भारत के तो परम मित्र सिद्ध हुए हैं। पाकिस्तान सरकार और फौज़ की धर्मान्ध जेहादी फितरत पर जिस तरह से ट्रंप ने प्रहार किया और पाक़ की सैन्य और आर्थिक सहायता रोक देने का हुक्म दिया। राष्ट्रपति ट्रंप का यह हुक्म काबिल-ए-तारीफ है। अमेरिका कदापि नहीं चाहता है कि पाकिस्तान किसी तौर पर पूर्णतः चीन के प्रभाव क्षेत्र में चला जाए. अफगानिस्तान में जब तक शांति कायम नहीं हो जाती तब तक पाकिस्तान वस्तुतः अमेरिका की विवशता ही बना रहेगा। अमेरिका की कूटनीति का मकसद चीन का दक्षिण एशिया में आधिपत्य की रोकथाम करना है, अतः वह, भारत आस्ट्रेलिया और जापान का निकट सहयोग चाहता है। व्यापार युद्ध में चीन का आर्थिक मुकाबला करने के लिए भी अमेरिका को भारत का गहन साथ चाहिए। ये सभी हालात विद्यमान जिनके कारण अमेरिकन राष्ट्रपति द्वारा भारत को अत्याधिक महत्व प्रदान किया जा रहा। ईरान के साथ भारत के अत्यंत निकट कूटनीति और व्यापार संबंधों को अमेरिका बर्दाश्त नहीं कर पाता है। ईरान को लेकर भारत की नीति स्पष्ट रही है कि वह द्विपक्षीय संबधों में तीसरे पक्ष की दखल को स्वीकार नहीं करेगा।

राष्ट्रपति पद का अगला चुनाव जीतना उद्देश्य

अहमदाबाद एयरपोर्ट से साबरमती आश्रम की सड़क यात्रा में राष्ट्रपति ट्रंप और नरेंद्र मोदी के साथ लाखों भारतीय विद्यमान रहेंगे और फिर मेटोरो में वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम में तकरीबन एक लाख से ज्यादा लोग राष्ट्रपति ट्रंप के खैरमकदम में एकत्रित होंगे। राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा का मक़सद केवल परस्पर कूटनीतिक संबंधों के नए शिखर पर पंहुचाना ही नहीं है, वरन डोनाल्ड ट्रंप के लिए राष्ट्रपति पद का अगला चुनाव जीतना भी इस यात्रा का उद्देश्य है। सर्वविदित है कि अमेरिका में नागरिकता प्राप्त भारतीयों की तादाद तकरीबन 16 लाख है, जिनमें से 20 फीसदी गुजराती हैं। अहमदाबाद से अपनी भारत यात्रा प्रारंभ करने की पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति ट्रंप की चुनाव रणनीति निहित है। अमेरिका के शहर हुस्टन में हॉऊडी मोदी कार्यक्रम से इस चुनाव रणनीति का आगाज हुआ था। नरेंद्र मोदी द्वारा वहां पर पचास हजार भारतीयों के मध्य ट्रंप की चुनाव में फतह का परचम बुलंद किया था। नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कूटनीतिक रिश्तों के अतिरिक्त निजी रिश्ते भी कायम हो चुके हैं। सत्तासीन शक्तिशाली शख्सियतों के मध्य स्थापित निजी संबंध अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में विशिष्ट स्थान रखते हैं। उल्लेखनीय है कि पं. जवाहरलाल नेहरू के जॉन एफ कनैडी और निकिता ख्रुश्शोव के मध्य निजी रिश्तों ने क्यूबा के कारण विश्वयुद्ध के संकट को खत्म किया था। इंदिरा गांधी और ब्रझनेव के परस्पर रिश्तों के कारण बंांग्लादेश युद्ध का परिणाम भारत के पक्ष में गया था।

कुल मिलाकर राष्ट्रपति ट्रंप की दो दिवसीय भारत यात्रा वस्तुतः दोनों देशों के मध्य एक मील का पत्थर सिद्ध हो सकती है, जिसमें परस्पर राष्ट्रीय हितों के नजरिए का एक नया अध्याय प्रारंभ हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में राष्ट्रीय हित ही सर्वोपरि रहते हैं। भारत का राष्ट्रीय हित इस तथ्य में निहित है कि अमेरिका, रूस और चीन सरीखी विश्व शक्तियों के साथ उसके गहन कूटनीतिक ताल्लुकात कायम बने रहें। विश्वपटल पर शक्ति संतुलन ही विश्व शांति की गारंटी है। परमाणु बमों से लैस दुनिया के देश शक्ति संतुलन बिगड़ते ही आत्म विनाश की कथा लिख सकते हैं। कश्मीर विवाद में बार बार परमाणु बम की धमकियां देने वाला देश पाकिस्तान का मानसिक और भौतिक इलाज केवल विश्व की महाशक्तियां ही कर सकती हैं। महाशक्ति अमेरिका के साथ भारत की निकट साझेदारी भारतीय उपमहाद्वीप में शांति स्थापना के लिए बेहद आवश्यक है।

(वरिष्ठ लेखक प्रभात कुमार रॉय की कलम से)

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