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डोकलाम विवाद: भारत के बदले मिजाज को चीन ने भी समझा

भारत बदल रहा है। यह दुनिया के बाकी देश ही नहीं, वह कुटिल पड़ौसी देश चीन भी अब मान रहा है, जिसके विदेश मंत्रालय और सरकारी भोंपू कहे जाने वाले मीडिया को डोकलाम प्रकरण के दौरान अपनी ताकत को लेकर गलतफहमियां थीं। तब क्या-क्या नहीं कहा गया। एक चीनी सैन्य अधिकारी ने डींग हांकी कि हिमालय को हिलाया जा सकता है, चीनी सेना को नहीं।

डोकलाम विवाद: भारत के बदले मिजाज को चीन ने भी समझा
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भारत बदल रहा है। यह दुनिया के बाकी देश ही नहीं, वह कुटिल पड़ौसी देश चीन भी अब मान रहा है, जिसके विदेश मंत्रालय और सरकारी भोंपू कहे जाने वाले मीडिया को डोकलाम प्रकरण के दौरान अपनी ताकत को लेकर गलतफहमियां थीं। तब क्या-क्या नहीं कहा गया। एक चीनी सैन्य अधिकारी ने डींग हांकी कि हिमालय को हिलाया जा सकता है, चीनी सेना को नहीं।

एक अन्य ने कहा कि भारत अपनी सेनाएं वहां से हटा ले वरना हम उसे खदेड़ देंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने समय अवधि निर्धारित करते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि भारत तब तक डोकलाम का पूरा इलाका खाली कर दे क्योंकि वह चीन का है। चीनी सेना को न केवल डोकलाम से खुद पीछे हटना पड़ा बल्कि अब वहां के थिंक टैंक सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर रहे हैं कि जब से नरेन्द्र मोदी ने कमान संभाली है, तब से भारत की विदेश नीति जीवंत और मुखर हुई है।

भारत की जोखिम लेने की क्षमता भी बढ़ी है। चाइना इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनैशनल स्टडीज के उपाध्यक्ष रोंग यिंग ने माना है कि पिछले तीन साल से ज्यादा समय में भारत की कूटनीति (विदेशनीति) काफी मजबूत हुई है। चीन के विदेश मंत्रालय से संबद्ध थिंक-टैंक के अधिकारी ने कहा कि भारत ने काफी अलग और अद्वितीय मोदी डॉक्ट्रीन बनाई है। नए हालात में एक महाशक्ति के तौर पर भारत के उभार की यह एक रणनीति है।

सीआईआईएस जर्नल में लिखे एक लेख में उन्होंने यह बातें कही हैं। मोदी सरकार पर किसी भी चीनी थिंक-टैंक द्वारा इस तरह की यह पहली टिप्पणी है। खास बात यह है कि रोंग बतौर चीनी राजनयिक भारत में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने काफी गहराई से भारत के चीन, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ संबंधों और अमेरिका व जापान के साथ घनिष्ठ रिश्तों की समीक्षा की है।

उनका कहना है कि मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति काफी मुखर होती जा रही है, हालांकि इससे पारस्परिक लाभ हो रहा है। भारत-चीन संबंध पर उन्होंने स्वीकार किया है कि जबसे मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, दोनों देशों के बीच संबंध स्थिर बने हुए हैं। मोदी सरकार पर किसी भी चीनी थिंक-टैंक द्वारा इस तरह की यह पहली टिप्पणी है।

रोंग ने लेख में माना कि भारत-चीन सीमा पर सिक्किम क्षेत्र में डोकलाम की घटना से न केवल सीमा का मुद्दा प्रकाश में आया बल्कि इससे दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे।' रोंग के अनुसार, भारत और चीन को एक दूसरे के विकास के लिए पारस्परिक सहयोग को लेकर रणनीतिक सहमति बनानी चाहिए। चीनी विशेषज्ञ ने कहा कि भारत के विकास में चीन कोई बाधा नहीं है बल्कि भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। कोई भी अब भारत के उत्थान को रोक नहीं सकता है।

भारत के विकास में सबसे बड़ी बाधा भारत खुद है। ऐसा रोंग ने क्यों लिखा, इसे स्पष्ट नहीं किया। रोंग ने मोदी द्वारा शपथ ग्रहण समारोह में दक्षिण एशिया के सभी पड़ोसी देशों के नेताओं को बुलाने की उनकी नीति की भी चर्चा की। चीनी थिंक टैंक ने माना है कि मोदी के नेतृत्व में खासकर पाकिस्तान को लेकर भारत सख्त है। मोदी सरकार को पीओके से भारत के खिलाफ काम कर रहे आतंकियों के बेस पर हमला करने में थोड़ी भी हिचकिचाहट नहीं हुई।

उन्होंने म्यांमार सीमा पर भारतीय सैनिकों की कार्रवाई का भी जिक्र किया। चीनी थिंक टैंक की बदले हुए भारत के बारे में यह टिप्पणी बताती है कि चीन भारत की ताकत का सही-सही अंदाजा लगाने की कोशिशों में जुटा है और उसकी बढ़ती ताकत को स्वीकार करते हुए व्यवहार कर रहा है। भारत ने कई अवसरों पर चीन को उसकी हदें भी बताई हैं और जहां जरूरत पड़ी, वहां सहयोग के लिए हाथ भी बढ़ाया है।

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