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संसद के मानसून सत्र में स्वस्थ व सार्थक हो चर्चा

सरकार आश्वस्त है कि सत्र सुचारू चलेगा, लेकिन सर्वदलीय बैठकों के दौरान विपक्ष ने जिन-जिन मुद्दों को उठाया है और उसने अपने स्तर पर जिस तरह की तैयारी की है, उससे संकेत साफ है कि सत्र के दौरान हंगामा जमकर देखने को मिल सकता है। कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों ने मानसून सत्र के दौरान किसान आंदोलन, महंगाई, राफेल में कथित भ्रष्टाचार, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान खराब प्रबंधन व अधिक लोगों की मौतें, टीकाकरण की सुस्त रफ्तार, अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत, चीन के साथ सीमा पर तनाव, पीओके में चुनाव, अफगानिस्तान आदि मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी की है।

संसद के मानसून सत्र में स्वस्थ व सार्थक हो चर्चा
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : आज से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में स्वस्थ और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। पिछले कुछ सत्रों की तरह यह सत्र भी हंगामे में नहीं बीतना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 33 दलों के 40 नेताओं के साथ सर्वदलीय बैठक कर उनके विचारों को सुना है, उसके बाद उन्होंने कहा कि सरकार सभी विषयों पर सारगर्भित विमर्श के लिए तैयार है, संसद का मानसून सत्र शांतिपूर्ण चलना चाहिए। राज्यसभा के उपसभापति उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू और लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी सभी प्रमुख दलों के नेताओं के साथ मानसून सत्र के सुचारू चलने को लेकर चर्चा की है।

राज्यसभा में सदन के नए नेता केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सत्र के संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, कांग्रेस नेता आनंद शर्मा और एनसीपी नेता शरद पवार सहित कई विपक्षी नेताओं से मुलाक़ात कर चुके हैं। सरकार आश्वस्त है कि सत्र सुचारू चलेगा, लेकिन सर्वदलीय बैठकों के दौरान विपक्ष ने जिन-जिन मुद्दों को उठाया है और उसने अपने स्तर पर जिस तरह की तैयारी की है, उससे संकेत साफ है कि सत्र के दौरान हंगामा जमकर देखने को मिल सकता है। कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों ने मानसून सत्र के दौरान किसान आंदोलन, महंगाई, राफेल में कथित भ्रष्टाचार, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान खराब प्रबंधन व अधिक लोगों की मौतें, टीकाकरण की सुस्त रफ्तार, अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत, चीन के साथ सीमा पर तनाव, पीओके में चुनाव, अफगानिस्तान आदि मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। संभावित तीसरी लहर की तैयारियों के बाबत भी विपक्ष सरकार से जवाब-तलब कर सकता है। पेट्रोल व डीजल की कीमतें इस वक्त रिकार्ड उच्च स्तर पर हैं, संसद में इस पर हंगामा होना तय है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। राफेल का मुद्दा 2019 में मोदी की दूसरी जीत के बाद से ठंडा पड़ा है। फ्रांस की अदालत ने जब इस डील की जांच के आदेश दिए, उसके बाद राहुल गांधी और दूसरे नेता लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। मानसून सत्र में सरकार आधा दर्जन अध्यादेश, नौ लंबित बिल और 2 वित्तीय विधेयक सहित 17 नए बिल लाने की तैयारी कर रही है। सरकार डीएनए प्रौद्योगिकी, माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए प्रस्तावित कानून, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान और न्यायाधिकरण सुधार से जुड़े विधेयक पारित करवाने की कोशिश करेगी। समुद्री सहायता और नेविगेशन विधेयक, बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने के लिए विधेयक पारित करने का प्रयास भी किया जाएगा। नए विधेयकों में से एक विवादास्पद आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक है जो उस अध्यादेश की जगह लेगा जिसमें रक्षा उत्पादन इकाइयों में हड़ताल पर प्रतिबंध लगाया गया है। सरकार इस सत्र में एक नया सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) विधेयक लाने की कोशिश भी कर सकती है।

इस प्रस्तावित विधेयक के एक नए विवादस्पद प्रावधान के अनुसार केंद्र सरकार को अब उन फिल्मों की फिर से जांच करने का निर्देश देने का अधिकार होगा जिन्हें पहले ही मंजूरी दी जा चुकी हो। इस नए विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय संसद में पेश कर सकता है। किसान संगठनों ने संसद के बाहर 22 तारीख से 200 अंदोलनकारियों के धरने का ऐलान किया है। सत्र के दौरान आंदोलन विपक्ष के हंगामे का बड़ा कारण बन सकता है। कृषि कानूनों को लेकर सरकार पर आंदोलन के हल का दबाव रह सकता है। सरकार को किसान संगठनों के साथ नए सिरे से वार्ता शुरू करनी चाहिए। मानसून सत्र अच्छे से चले, सरकार व विपक्ष देशहित में काम करे, ताकि संसद सत्र का मकसद पूरा हो।

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