Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

प्रभात कुमार रॉय का लेख : पाक पर भरोसा मुश्किल

क्या पाक फौज के हुक्मरान जनरलों की भी बुनियादी फितरत परिवर्तित हो रही है? विश्वपटल पर एकदम अलग थलग पड़े हुए पाकिस्तान को अब केवल चीन और टर्की की अंतरराष्ट्रीय हिमायत हासिल रह गई है। यहां तक कि सऊदी अरब की कयादत में इस्लामिक देशों का संगठन (ओआईसी) भी पाकिस्तान से अपना दामन छुड़ा चुका है। भारत किंचिंत यकीन नहीं कर सकता है कि 1971 के युद्ध में इतनी करारी पराजय झेलने वाली पाक फौज भारत और कश्मीर पर फतह हासिल करने का सुनहरा सपना नहीं छोड़ सकेगी?

प्रभात कुमार रॉय का लेख : पाक पर भरोसा मुश्किल
X
पाक पीएम इमरान खान, फ़ोटो फ़ाइल

प्रभात कुमार रॉय

भारत और पाकिस्तान के मिलिट्री ऑपरेशनस के डायरेक्टर जनरल्स के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता अंजाम दिया गया। दोनों देशों के मध्य संपन्न हुए इस सैन्य समझौते के तहत भारत-पाक सरहद (एलओसी) अर्थात लाइन ऑफ कंट्रोल पर युद्ध विराम को अत्यंत सख्ती के साथ अंजाम दिया जाएगा। दोनों देशों के मिलिट्री ऑपरेशनस के डायरेक्टर जनरल्स के मध्य एक हॉटलाइन स्थापित करने के लिए भी सहमति बन गई। भविष्य ही बताएगा कि एलओसी पर पाक फौज़ द्वारा युद्ध विराम का उल्लंघन आखिर कब तक नहीं किया जाता। एलओसी का इतिहास तो बताता है कि जब से पाक हुकूमत ने प्रॉक्सीवार की रणनीति को अख्त्यार किया, तभी से जेहादी आतंकवादियों को कश्मीर घाटी में दाखिल करने की कार्यनीति के तहत पाक़ फौज़ के रेंजर एलओसी पर जबरदस्त फायरिंग अंजाम देते रहे हैं। वर्ष 2018 से विगत महज ढाई वर्षो के दौर में जब से इमरान खान सत्तानशीन हुए हैं, युद्ध विराम का उल्लंघन करके अंजाम दी गई पाक फौज़ की फायरिंग पर एक नजर डालें तो फायरिंग के आकड़ों से ज्ञात हुआ कि कुल मिलाकर 10753 बार युद्ध विराम को ध्वस्त करके पाक रेंजरों ने एलएसी पर फायरिंग की। इस फायरिंग में भारतीय सुरक्षा बलों के 72 और कश्मीर के 70 नागरिक हलाक किए गए। साथ ही भारतीय सुरक्षा बलों के 384 और कश्मीर के 341 नागरिक गंभीर तौर पर जख्मी हुए। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते हुए इमरान खान के कहा था कि उनकी हुकूमत पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की कार्यनीति को सबसे अधिक महत्व देगी।

आखिरकार इमरान खान भी पाक़ की डीप स्टेट करार दी जाने वाली फौज के कठपुतली प्रधानमंत्री ही सिद्ध हुए पाक फौज़ ने प्रॉक्सीवार के तहत पुलवामा में जेहादी हमला करके सुरक्षा बल के 40 जवानों को हलाक किया। जवाबी कार्रवाई में भारत द्वारा बालाकोट के जेहादी प्रशिक्षण शिविरों पर भारतीय वायुसेना द्वारा धावा बोला गया। उसी वक्त से भारत और पाकिस्तान के मध्य कूटनीतिक ताल्लुकात सबसे बुरे दौर में पहुंच गए। यहां तक कि पाकिस्तान ने भारत के साथ परस्पर व्यापार संबंधों को भी खत्म कर दिया। खुले तौर पर भारत और पाकिस्तान के मध्य कूटनीतिक बातचीत पर पूर्ण विराम सा लग गया। काफी वक्त के पश्चात दोनों देशों के रिश्तों के मध्य जमी कठोर बर्फ कुछ पिघल गई है, जबकि मिलिट्री ऑपरेशनस के डायरेक्टर जनरल्स के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया। उल्लेखनीय है कि भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की एक हवाई यात्रा के लिए पाक़ सरकार ने अपना एयर स्पेस प्रदान करने से साफ इनकार कर दिया था, किंतु पाक़ हुकूमत के आचरण के ठीक विपरीत पाक प्रधानमंत्री इमरान खान को उनकी श्रीलंका यात्रा के लिए भारत ने अपना एयर स्पेस प्रदान किया।

तर्क-ए-ताअल्लुक पर अरे ना तू रोया ना मैं रोया

लेकिन ये क्या कि चैन से ना तू सोया ना मैं सोया

साल 1947 में इस्लाम के नाम पर भारत को विभाजित करके पाकिस्तान नामक एक राष्ट्र का जन्म हुआ। जन्म लेते ही अक्तूबर 1947 में पाकिस्तान ने अपने मातृ राष्ट्र भारत पर कश्मीर घाटी को हथियाने के लिए बर्बर आक्रमण कर दिया। कश्मीर वस्तुतः पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की दो राष्ट्रों की मजहबी अवधारणा के लिए प्रबल चुनौती बनकर उभरा था। संपूर्ण कश्मीर घाटी में विभाजन के वक्त हिंदुओं और मुसलमानों के बीच कोई खून खराबा नहीं हुआ। सरहदी गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान के पख्तूनिस्तान की तरह से कश्मीर घाटी की अवाम भारत के साथ ही बने रहना चाहती थी। तभी से कश्मीर को फौज के दमखम पर हड़पने के लिए पाक हुकूमत के दिमाग में एक जूनूनी फितूर कायम रहा है। कश्मीर के लिए पाक़ फौज भारत से चार बड़े युद्ध लड़कर पराजित हो चुकी है। वर्ष 1989 से विगत 32 वर्षों में कश्मीर घाटी में पाक हुकूमत और फौज भारत के विरुद्ध प्राक्सी वार संचालित कर रही है। पाक़ प्रायोजित प्रॉक्सीवार में तकरीबन एक लाख इंसान अपनी जान गंवा चुके हैं। पाकिस्तान की ओर से संचालित जेहादी आतंकवाद के लगातार जारी रहने के कारण पाकिस्तान के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को दोस्ताना तौर पर कायम रखना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

विश्वपटल पर निरंतर परिवर्तित होते हालात के कारण क्या पाकिस्तान अपनी जेहादी आतंकवादी फितरत का परित्याग करने के लिए तत्पर हो रहा है अथवा दुनिया की नजरों में सिर्फ धूल झोंकने की गर्ज से भारत के साथ युद्ध विराम समझौते का कड़ाई के साथ पालन करने का वादा कर रहा है। फाईनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) द्वारा पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाले जाने का खतरा निंरतर मंडरा रहा है। एफएटीएफ द्वारा पाकिस्तान को वैश्विक जेहादी आतंकवाद को प्रश्रय और परिपोषण प्रदान करते रहने के कारण विगत कुछ वर्ष से ग्रे लिस्ट में डाला हुआ है। क्या कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के लागू हो जाने के वैश्विक दबाव में पाक़ हुकूमत और फौज़ जेहादी आतंकवाद का परित्याग करने का मात्र दिखावा कर रहे हैं अथवा वास्तव में ही ये दोनों अपनी बुनियादी फितरत को बदल रही हैं।

प्रधानमंत्री इमरान खान हाल ही में नेशनल एसेबंली में अपना बहुमत सिद्ध कर चुके हैं। क्या वास्तव में इमरान खान एक ऐसा पाक प्रधानमंत्री साबित होना चाहते हैं, जो पाक फौज के निर्णायक नियंत्रण से पाक राजसत्ता को मुक्त कर सकेगा? पाक फौज के बरखिलाफ नवाज शरीफ ऐसी ही विकट कोशिश अंजाम देकर पाक राजसत्ता से बाकायदा बेदखल किए गए। क्या पाक फौज के हुक्मरान जनरलों की भी बुनियादी फितरत परिवर्तित हो रही है? विश्वपटल पर एकदम अलग थलग पड़े हुए पाकिस्तान को अब केवल चीन और टर्की की अंतरराष्ट्रीय हिमायत हासिल रह गई है। यहां तक कि सऊदी अरब की कयादत में इस्लामिक देशों का संगठन (ओआईसी) भी पाकिस्तान से अपना दामन छुड़ा चुका है। क्या भारत किंचिंत यकीन नहीं कर सकता है कि 1971 के युद्ध में इतनी करारी पराजय झेलने वाली पाक फौज भारत और कश्मीर पर फतह हासिल करने का सुनहरा सपना नहीं छोड़ सकेगी? क्या पाकिस्तान की आर्थिक दुर्दशा हो जाने की आशंका से वहां की फौज अपनी इस महत्वाकांक्षा का परित्याग कर देगी? पाकिस्तान सरकार और फौज को चीन से बड़ी उम्मीदें हैं, क्योंकि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान से अपना वरदहस्त खींच लेने के पश्चात पाक का पक्षधर चीन बन गया है, जो विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी प्रबल पैरवी करता रहता है। भारत को तो चीन और पाकिस्तान की संयुक्त चुनौती का सामना करने के लिए सदैव ही तैयार रहना है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

Next Story