Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

राष्ट्रपति चुनाव से पहले नीतीश लालू में अलगाव

जनता दल ने साफ कर दिया है कि जो फैसला लिया जा चुका है, वह अंतिम है।

राष्ट्रपति चुनाव से पहले नीतीश लालू में अलगाव
X
नीतीश कुमार राष्ट्रपति पद के चुनाव में बिहार के निवर्तमान राज्यपाल और भाजपा-राजग के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को जनता दल यू के समर्थन का ऐलान नहीं भी करते तो उनके चुनाव जीतने में कहीं कोई बाधा नजर नहीं आ रही थी।
इसके बावजूद यदि कांग्रेस नीत यूपीए गठबंधन का हिस्सा रहते हुए उन्होंने सोनिया गांधी, ममता बनर्जी और लालू यादव जैसे नेताओं की नाराजगी की परवाह किए बिना कोविंद को समर्थन का ऐलान किया है तो इसके बहुत साफ संकेत हैं, जिसे ये लोग शायद समझना नहीं चाहते हैं।
उल्टे लालू यादव यह कहते हुए नीतीश को धमकाने की चेष्टा कर रहे हैं कि यह फैसला उनकी ऐतिहासिक भूल है और अब चूंकि बिहार की दलित बेटी मीरा कुमार को राजग के दलित चेहरे के खिलाफ उन लोगों ने मैदान में उतार दिया है, इसलिए वह फैसले पर पुनर्विचार करें। जनता दल ने साफ कर दिया है कि जो फैसला लिया जा चुका है, वह अंतिम है।

उस पर कोई पुनर्विचार नहीं होगा। हालांकि शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में कोविंद ने नामांकन के परचे भरे, तब जनता दल यू की ओर से कोई उपस्थित नहीं रहा परंतु नीतीश के रुख से साफ है कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशी के साथ मजबूती से खड़े हैं।

इससे लालू यादव और कांग्रेसियों की परेशानी बढ़ती दिखाई दे रही है। नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, नवीन पटनायक, के चंद्रशेखर राव, अन्नाद्रमुक के दोनों गुटों, शिवसेना और सभी घटक दलों के समर्थन के कारण रामनाथ कोविंद की जीत बिल्कुल तय है। उन्हें अब तक निर्वाचक मंडल के 63 प्रतिशत निर्णायक मतदाताओं का समर्थन हासिल हो चुका है।

ऐसे में नीतीश सरकार का हिस्सा राष्ट्रीय जनता दल (लालू) और कांग्रेस के सामने जीवन-मरण का सवाल पैदा होता जा रहा है। नीतीश ने तो संकेत दे दिए हैं। अब फैसला इन दोनों को लेना है कि वो नीतीश सरकार का हिस्सा रहेंगे या नहीं। लालू यादव दिखावे के लिए भले ही नीतीश के फैसले को ऐतिहासिक भूल बता रहे हैं,

परंतु यह घोषणा भी कर रहे हैं कि बिहार सरकार को कोई खतरा नहीं है। वह चलती रहेगी। लालू प्रसाद जानते हैं कि बिहार सरकार से बाहर होने का नतीजा क्या होगा। पूरा लालू परिवार इस समय गहरे संकट में घिरा हुआ है।

न केवल लालू खुद, बल्कि उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दोनों मंत्री बेटे, बड़ी बेटी और दामाद। आय से अधिक संपत्ति और बेनामी संपत्ति के मामले में उन पर सीबीआई, ईडी और आयकर का शिकंजा कसता ही जा रहा है। इन सबकी 175 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति अटैच कर ली गई है। जांच पड़ताल के बाद वह जब्त भी हो सकती है।

इसी तरह के जमीन घोटालों और गड़बड़ियों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सोनिया के दामाद राबर्ट वाड्रा और बेटी प्रियंका जांच के घेरे में हैं। नेशनल हेराल्ड केस में तो सोनिया और राहुल जमानत पर हैं। नीतीश कुमार राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं। वह जानते हैं कि इन दोनों के साथ रहने से सिवाय बदनामी के उन्हें कुछ हासिल होने वाला नहीं है।

जब से नीतीश इनके समर्थन से सरकार चला रहे हैं, जानकारों की मानें तो काफी दुखी हैं क्योंकि तबादलों तक के फैसले स्वतंत्र रूप से नहीं ले पा रहे हैं। बिहार और नीतीश की राजनीति को करीब से जानने वालों का तो यहां तक दावा है कि सोनिया और लालू की नाराजगी की परवाह न करके राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में भाजपा-राजग प्रत्याशी को समर्थन देने के पीछे नीतीश कुमार की सोची-विचारी रणनीति है।

वह फिर से राजग का हिस्सा बनने और इनसे अलग होने का फैसला कर चुके हैं। यह फैसला तो महज बहाना है। इसके जरिए उन्होंने इन दोनों को संकेत भी दे दिए हैं। अब देखना यही है कि नीतीश भाजपा नीत राजग गठबंधन में वापसी का फैसला कब करते हैं। इस अहम निर्णय के साथ ही लालू प्रसाद यादव की मुसीबतें और बढ़ने वाली हैं।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top