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प्रो. हवा सिंह का लेख : किसानों के सच्चे प्रतिनिधि देवीलाल

देवीलाल केवल किसान नेता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने देश को किसान विचारधारा व चिंतन भी दिया। समाज का भाईचारा उनके जीवन में सर्वोपरि था। जब 23 दिसंबर 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उनको किसान रैली में जाने से मना किया तो चौ. देवीलाल ने कहा कि किसान मेरे लिए मुख्यमंत्री पद से बड़ा है। उन्होंने उप प्रधानमंत्री होते हुए भी महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा किसान रैली का समर्थन किया। घर-घर व चौपाल में जाकर किसानों की समस्याओं को समझा। वर्षों से ग्रामीणों से जो भेदभाव होता आ रहा था, उसको भी दूर करने के लिए ताउम्र संघर्षशील रहे। चौधरी देवीलाल कृषि प्रधान एवं आधुनिक भारत के सच्चे प्रतिनिधि थे।

प्रो. हवा सिंह का लेख : किसानों के सच्चे प्रतिनिधि देवीलाल
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Devi Lal Birth Anniversary

प्रो. हवा सिंह

भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर निर्भर करती है। आज भी 60 से 70% जनसंख्या की रोजी-रोटी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। खेती का 16 से 17% जीडीपी में योगदान है। 1975 के दशक तक भारत 70 से 80 प्रतिशत खाद्यान्न दूसरे देशों से आयात करता था। देश के कई महान किसान नेताओं ने किसानों की दिक्कतों जैसे उन्नत बीज, खाद, सिंचाई का प्रबंध, उत्पादन का उचित मूल्य, सस्ते व आसान ब्याज दरों पर कर्ज का प्रबंध, उचित दरों पर बिजली की सप्लाई, मालिया की दरों में कमी को समझा व उनको प्रांतीय व राष्ट्रीय स्तर पर सरकारों के सामने रखा तथा समस्याओं का समाधान निकालने का दबाव बनाया। इसके परिणामस्वरूप फसलों का उत्पादन भी बढ़ा और किसानों की आमदनी भी। हरियाणा की माटी ने भी देश को एक ऐसा महान किसान नेता दिया, जिनका जीवन बाल्यकाल से अंतिम सांस तक मर्यादित, प्रेरणादायक व किसान व ग्रामीण विकास की आवाज व मूल्यों के प्रतीक रहे, उस विभूति का नाम है चौधरी देवीलाल।

देवीलाल में देशभक्ति व किसानों के प्रति प्रेम कूट-कूटकर भरा हुआ था। उनका जन्म एक बड़े जमींदार के घर हुआ, इसके बावजूद उन्होंने बड़े जमीदारों का विरोध किया और बटाईदारों व मुजारों को जमीन में मिल्कियत की वकालत की। उन्होंने किसान जागृति मंच की स्थापना की। भूमिहीन मजदूरों के हितों की लड़ाई के लिए उन्होंने कानून व सामाजिक कठिनाइयों का सामना भी किया। उनके जीवन पर किसान नेता सरदार अजीत सिंह का बहुत प्रभाव था। 1907 में सरदार अजीत सिंह को अंग्रेजों द्वारा बनाए गए लैंड एलिवेशन एक्ट का विरोध करने के कारण उनको देश निकाला दे दिया। उनके किसान संघर्ष के समय पगड़ी संभालो जट्टा के नारे को देवीलाल अपने भाषणों में चर्चा करते थे। विनोबा भावे द्वारा चलाए गए भूदान आंदोलन में भी बढ़कर हिस्सा लिया। चौ. देवीलाल ने अपनी जमीन का बड़ा हिस्सा दान ही नहीं किया बल्कि दूसरे जमींदारों को भी भूदान के लिए प्रेरित किया। देवीलाल कांग्रेस में थे। वे नौजवान अवस्था में ही छोटे किसानों, बटाईदार व मुजारों की आवाज बन गए थे। उनके नेतृत्व में किए गए किसान संघर्ष को देखकर 1944 में चौधरी छोटूराम ने कहा था कि देवीलाल बाहर से किसानों के लिए वही काम कर रहे हैं जो मैं सरकार में रहकर कर रहा हूं।

वे 1952 में पंजाब असेंबली में विधायक बन गए और उन्होंने किसानों व मजदूरों के मुद्दों को मजबूत रूप में रखा तथा उनका विश्वास था कि जब तक कृषि प्रधान प्रदेश पंजाब के किसान का बेटा मुख्यमंत्री पद पर नहीं बैठता तो किसानों की समस्याओं का हल होने वाला नहीं है। देवीलाल ने पंजाब असेंबली में मजारों की हिफाजत के लिए भू-पट्टेदारी अधिनियम 1953 को बनवाने में प्रमुख भूमिका निभाई। इस कानून के अनुसार जो मुजारे छह वर्ष से जिस जमीन पर कास्त कर रहे थे उनको आसान किस्तों पर वह जमीन खरीदने का हक दिलवाया। देवीलाल किसानों, मजदूरों व शोषित वर्ग की आवाज बुलंद करते करते 1977 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बन गए। उनकी कथनी व करनी में अंतर नहीं था। उनका चिंतन था कि भारत की उन्नति गांवों के खलिहानों से होकर गुजरती है। चौ. देवीलाल ने किसान व ग्रामीण विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए। 6.5 एकड़ तक के मालिक किसानों का मालिया माफ किया। ओलावृष्टि व खेत खलिहान के आग लगने से किसानों के फसल को हुए नुकसान की भरपाई के मुआवजा दिया। गांवों में रोजगार पैदा करने के लिए काम के बदले अनाज की योजना शुरू की। ट्रैक्टर व बुग्गी पर टैक्स माफ किया। गांव में सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए मैचिंग ग्रांट देने की योजना शुरू की। फसलों को उचित मूल्य दिया। गांवों को बाढ़ के पानी से बचाने के लिए रिंग बांध बनवाई। किसानों को 12 घंटे बिजली सप्लाई की गारंटी दी। किसानों को खेतों के साथ लगे सरकारी पेड़ों की बिक्री से होने वाली आमदनी का आधा भाग देना शुरू किया। प्राकृतिक आपदा के कारण किसान के नुकसान को 600 रुपये प्रति एकड़ तथा 100 रुपये प्रति खेती मजदूर को मुआवजा शुरू किया। हरियाणा कृषि कर्ज अधिनियम 1989 को लागू कर जो कर्जदार उनकी राशि से दोगुनी राशि वापस कर चुके थे, शेष कर्जा माफ कर दिया। हरियाणा में कच्चे रास्ते होने के कारण वे अपनी उपज को शहर में नहीं भेज पाते थे। देवीलाल ने एक अहम फैसला लिया कि अनाज मंडी से होने वाली आमदनी को गांव की सड़कों के निर्माण के लिए प्रयोग होगा।

देवीलाल ने कई ऐसी योजनाओं को आरंभ किया कि जिससे हर समुदाय को लाभ मिले। बुढ़ापा सम्मान पेंशन उनका ऐतिहासिक फैसला था। हरिजन तथा अनुसूचित जाति की महिलाओं को बच्चे के जन्म पर पौष्टिक आहार के लिए 500 रुपये की राशि देनी प्रारंभ की। ग्रामीण बच्चों की शिक्षा देने के लिए बसों में पास बनाने की योजना तथा बेरोजगार युवाओं के लिए सरकारी व अर्ध सरकारी नौकरियों हेतु साक्षात्कार के लिए राज्य की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की गई। इन सभी सुविधाओं के पीछे उनकी सोच थी कि बिना उचित शिक्षा, स्वास्थ्य व राज में भागीदारी के बिना समाज का विकास नहीं हो सकता। उन्हाेंने समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी सत्ता में भागीदार बनाया। देश के उप प्रधानमंत्री बनने पर भी किसानों व मजदूरों की भलाई के लिए संघर्षशील रहे। दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा ने दिल्ली के किसानों को मजदूर बनने से रोकने के लिए न्यूनतम भूमि मूल्य अधिकार कानून बनाया। देवीलाल ने इसे और प्रभावी बनाने के लिए कुछ परिवर्तन किए कि वर्तमान मूल्य में हर वर्ष 10% की वृद्धि होगी तथा सरकार द्वारा चुकाई कीमत पर इनकम टैक्स नहीं लगेगा। केंद्रीय कृषि बजट में 30% की वृद्धि की गई। पांच सितारा होटल में ग्रामीणों को 50% की छूट देकर ग्रामीणों में मान सम्मान की चेतना पैदा की और देवीलाल ने राजनीतिक प्रभाव से कई राज्यों के किसान मुख्यमंत्री बनवाने में अहम भूमिका निभाई। देवीलाल पहले किसान थे और बाद में मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री खुद को मानते थे। समाज का भाईचारा उनके जीवन में सर्वोपरि था। देवीलाल किसान नेता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने देश को किसान विचारधारा व चिंतन भी दिया। जब 23 दिसंबर 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उनको किसान रैली में जाने से मना किया तो चौ. देवीलाल ने कहा कि किसान मेरे लिए मुख्यमंत्री पद से बड़ा है

। उन्होंने उप प्रधानमंत्री होते हुए भी महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा किसान रैली का समर्थन किया। घर-घर व चौपाल में जाकर किसानों की समस्याओं को समझा। वर्षों से ग्रामीणों से जो भेदभाव होता आ रहा था, उसको भी दूर करने के लिए ताउम्र संघर्षशील रहे। आज देश में किसान नेतृत्व की कमी महसूस हो रही है। देवीलाल कृषि प्रधान एवं आधुनिक भारत के सच्चे प्रतिनिधि थे। उनकी कृषि व लोक कल्याणकारी नीतियां भाईचारे रूपी वृक्ष के लिए सदा देश के विकास में रोशनी का काम करती रहेंगी। वे हमेशा प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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