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भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त दिखने की कवायद

हाल के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद देश में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त दिखने की कवायद
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नई दिल्ली. हाल के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद देश में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला है। कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए-दो सरकार जो अपने पूरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार में डूबी रही और जवाब देने से भागती रही, उसे अंतत: राजनीति में शुचिता और ईमानदारी की याद आई। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के उदय के बाद भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा बना है। उधर भारतीय जनता पार्टी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। इस माहौल में कांग्रेस स्वयं को पिछड़ती पा रही है।
केंद्र ही नहीं कुछ राज्यों में जहां उसकी सरकार है, उन पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। उसे इस बात का अहसास होने लगा हैकि रेस में बने रहना है तो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विचार प्रकट करने का अभी उचित समय है। केंद्र सरकार का अगस्ता-वेस्टलैंड सौदे को रद्द करना और महाराष्ट्र सरकार द्वारा आदर्श सोसाइटी घोटाले की जांच रिपोर्ट को आंशिक रूप से स्वीकारने को इस रूप में देखा जा सकता है।
महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी की गठबंधन वाली सरकार है। आदर्श सोसाइटी घोटाले में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे समेत कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने के आरोप हैं। पहले राज्य सरकार ने जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया था, लेकिन चार राज्यों में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी और राहुल गांधी को उस पर पुनर्विचार करने की बात कहनी पड़ी थी।
अब सवाल है कि क्या राज्य सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर अपने नेताओं के खिलाफ कदम उठायेगी? कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड के साथ 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीद सौदे में दलाली की जांच भारत में सीबीआई और इटली में वहां की पुलिस कर रही है, लेकिन बीच में केंद्र सरकार ने बुधवार को सौदा रद्द करने का आदेश दे कर भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस के प्रति बने माहौल को शांत करने का प्रयास किया है।
सरकार ने देर से पर सकारात्मक कदम उठाया है, परंतु क्या अन्य घोटालों के खिलाफ वह इतनी सख्ती दिखायेगी? वहीं हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने रिश्वत लेकर एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाया है। ये तीनों ऐसे मुद्दे हैं जिस पर कांग्रेस और यूपीए सरकार घिरी हुई है। अब आम चुनाव सामने है। ऐसे में कांग्रेस के लिए वर्तमान छवि के साथ चुनाव में उतरना आ बैल मुझे मार वाली स्थिति हो सकती है।
वह भी इसे अच्छी तरह समझ रही है। लिहाजा भ्रष्टाचार के खिलाफ वह खुद को सख्त दिखाना चाहती है। आदर्श घोटाले की जांच रिपोर्ट को स्वीकारने और हेलीकॉप्टर सौदा रद्द करने के बाद यदि कांग्रेस की ओर से हिमाचल प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन का फैसला ले लिया जाए तो कोईआश्चर्य नहीं होनी चाहिए। यह विरोधाभास है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए केंद्र में लोकपाल पारित करती है और वहीं महाराष्ट्र में आदर्श घोटाला की जांच रिपोर्टउसी की सरकार ने खारिज कर दी थी।
कुल मिलाकर उसके समक्ष आम चुनाव से पूर्व अपनी छवि सुधारने और जनहितैषी दिखने की चुनौती है। एक तरफ देश की सबसे पुरानी पार्टी का यह भ्रष्ट चेहरा है, दूसरी तरफ दिल्ली में आप के नेता अलग चेहरा पेश कर रहे हैं। वहीं भाजपा मेंलोगों का विश्वास बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने बड़ा संकट है। वह कैसे वापसी करेगी, देखना होगा।
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