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योगेश कुमार सोनी का लेख : डेंगू से लड़ना होगा चुनौती

कोरोना व डेंगू के अधिकतर लक्षण एक जैसे हैं जिसमें मुख्य हैं कि दोनों से संक्रमित होने पर सिर व शरीर में दर्द होता है और तेज बुखार आता है। डेंगू से ग्रस्त होने वाले मरीजों को कोरोना अपनी चपेट में आसानी से ले सकता है। यदि दोनों बीमारी से ग्रसित होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी तो मौत के आंकड़े में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी होगी और स्थिति भयावह हो सकती है।

जुलाई से अक्टूबर तक इस बीमारी की चपेट में आने के होते हैं ज्यादा चांस, जानें इसके फैलने का कारण
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योगेश कुमार सोनी

यह साल अभी आधा ही बीता है और मानव जीवन पर संकट के बादल लगतार छाए हुए हैं। इस संकट की वजह से मनुष्य को अपनी जिंदगी बचाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। कोरोना से लगातार बढ़ रहे मामलों से पहले ही दुनिया परेशान है और अब मानसून में उत्पन्न होने वाली बीमारी डेंगू को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंता जताई है। इस मामले के वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस बार अन्य बार की अपेक्षा ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने यह कहते हुए भी चेताया कि डेंगू के प्रकोप से कोरोना संकट बढ़ने की उम्मीद है और यदि ऐसा हुआ तो स्थिति को संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

दरअसल मामला यह है कि कोरोना व डेंगू के अधिकतर लक्षण एक जैसे हैं जिसमें मुख्य हैं कि दोनों से संक्रमित होने पर सिर व शरीर में दर्द होता है और तेज बुखार आता है। डेंगू से ग्रस्त होने वाले मरीजों को कोरोना अपनी चपेट में आसानी से ले सकता है। यदि दोनों बीमारी से ग्रसित होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी तो मौत के आंकड़े में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी होगी और स्थिति भयावह हो सकती है। अब तक आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में कोरोना के करीब आठ लाख केस आ चुके हैं और तेईस हजार लोगों की मौत भी हो चुकी है। डेंगू के आंकड़ों के अनुसार डेंगू की वजह से हर वर्ष करीब डेढ़ लाख मामले आते हैं। बीते वर्ष 2019 में एक लाख पैंतीस हजार से भी अधिक केस आए थे जिसमें 132 लोगों को जान गवानी पड़ी थी। डेंगू से रिकवरी की प्रतिशत बहुत बेहतर है, लेकिन कोरोना काल में डेंगू के मरीज बढ़ते हैं तो डेंगू से ग्रस्त मरीजों को कोरोना होने की संभावना बहुत अधिक है जिससे अभी से ही शासन-प्रशासन के हांथ-पांव फूलने शुरू हो चुके हैं।

दरअसल मामला गंभीर इसलिए भी हो जाता है कि दोनों ही वायरस की वैक्सीन नहीं बनी। अन्य बीमारियों की अपेक्षा डेंगू में वायरस बहुत प्रभावशाली होता है। डेंगू मादा एडीज इजिप्ची नाम के मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर जब काटता है तो मनुष्य का खून चूसता है और वायरस शरीर में छोड़ देता है और उसके बाद किसी अन्य व्यक्ति को काटता है तो फिर दूसरे को और अधिक तेजी से यह वायरस प्रभावित करता है, इस ही तरह इसकी चेन बनती चली जाती है। डॉक्टरों के अनुसार डेंगू को तीन तरह से वर्गीकृत किया है जिसमें पहली स्थिति में साधारण बुखार होता है, दूसरी में हैमरेजिक बुखार व तीसरी स्थिति में जो सबसे खतरनाक मानी जाती है वह है शॉक सिंड्रोम। तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी लगने और हल्का सा गले में दर्द होने पर आप क्षेत्रीय डॉक्टरों से उपचार करा सकते हैं, लेकिन जब शरीर के किसी भी अंग से खून आना और बार-बार होश खो देने पर तुरंत स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिए व अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य समझा जाता है।

डेंगू, बरसात के मौसम में पनपना शुरू होता है और जुलाई से अक्टूबर तक सबसे ज्यादा प्रभावित करता है क्योंकि इस मौसम सभी तरह के मच्छरों के पनपने का समय होता है। डेंगू मच्छर कम ऊंचाई तक उड़ पाता और खासतौर पर सुबह के समय ही काटता है। इसे ग्रस्त होने के बाद बचने के तमाम उपाय हैं लेकिन यदि यह कोरोना काल में होता है तो हालात नाजुक हो जाएंगे। आपकी जरा सी मेहनत आपको इस बड़े संकट में फंसने से पहले ही निकाल सकती है। वैसे तो हर बीमारी से बचने का एक मात्र उपाय सफाई है, लेकिन आज के दौर में थोड़ा सा और अतिरिक्त कर लिया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। अपने घर को स्वच्छ रखना तो स्वाभाविक है, लेकिन साथ में अपने आस-पास भी गंदगी व पानी न जमा होने दें। जहां पानी जमा रहता है जैसे कि कूलर व अन्य इस प्रकार की कोई भी जगह तो वहां आप एक ढक्कन या आवश्यकतानुसार मिट्टी का तेल जरूर डाल दें। जैसे हम बदलते फैशन दौर के में अपने कपड़ों, जूतों व अन्य इस प्रकार की चीजों के साथ अपडेट व अपग्रेड कर लेते हैं वैसे ही बढ़ती बीमारियों से लड़ने के लिए इस तर्ज पर चलने की जरूरत है।

दरअसल मामला यह भी है कि हमारे देश में हर किसी को यह लगता है कि यह घटना हमारे साथ तो हो ही नहीं सकती, लेकिन जब ऐसा सोचने वाला चपेट में आता है तब वह पछतावे के अलावा कुछ नहीं कर पाता। कोरोना से आए संकट से हमें सबक व सीख लेनी चाहिए। कोरोना वायरस को आए चार महीने करीब हो चुके हैं और इससे बचने के लिए कितनी सतर्कता बरत रहे हैं। यदि हम बाकी बीमारियों से बचने के लिए इस तरह की सुरक्षा अपना लेंगे तो निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी। हम डेंगू, मलेरिया व अन्य इस तरह की बीमारियों को हल्के में ले लेते हैं जिसका भुगतान कई बार हमें जान देकर करना पड़ता है। जब हमें पता है कि पहले से कोई बड़ी परेशानी आ रही है तो हमें अपने आप को बचाने के लिए तैयार रहना चाहिए और यह डेंगू से लड़ने व बचने का बिल्कुल सही समय है। अपने व परिवार की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त जागरूक रहने की जरूरत है चूंकि इस वर्ष जिंदगी 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी' वाली तर्ज पर चल रही है।

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