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बिहार की हार से सुधार पर नहीं आए कोई आंच

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने साफ कर दिया है कि बिहार में भाजपा के कमजोर प्रदर्शन के चलते भारत की रेटिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बिहार की हार से सुधार पर नहीं आए कोई आंच
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बिहार विधानसभा चुनाव में राजग की हार पार्टी के तौर भाजपा के लिए चिंता की बात जरूर है, लेकिन इसका असर देश की अर्थव्यवस्था और मोदी सरकार के आर्थिक सुधार एजेंडे पर नहीं पड़ेगा। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने साफ कर दिया है कि बिहार में भाजपा के कमजोर प्रदर्शन के चलते भारत के रेटिंग परिदृश्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

फिच का कहना है कि भारत के लिए जब वह मिड टर्म फोरकास्ट करेगी, उस समय बिहार चुनाव के नतीजे उसे प्रभावित नहीं करेगी। दूसरी ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज की असहिष्णुता के सवाल पर भारतीय अर्थव्यस्था के प्रति चिंता जताने के बाद फिच की यह राय सरकार के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने खुद भी कहा है कि बिहार विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की हार से देश में आर्थिक सुधार प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ढांचागत सुधार जारी रहेगा। बात भी सही है, आर्थिक सुधार प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। मोदी सरकार जब सत्ता में आई थी, तो लोगों को अर्थव्यवस्था समेत सभी क्षेत्रों में बड़े और व्यापक सुधार की उम्मीद जगी थी।

यह उम्मीद अभी भी बरकार है। सरकार ने कई सुधार किए भी हैं, जिसमें ब्लैकमनी की जांच के लिए एसआईटी का गठन, अफसरों को काम करने की स्वतंत्रता, निर्णय में पारदर्शिता, बेकार कानूनों का खत्मा, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया को बढ़ावा, रेल-डिफेंस समेत कई क्षेत्रों में एफडीआई कैप नियमों में ढील, वायदा रेगुलेटरी का सेबी में विलय, टैक्स प्रक्रिया का सरल करना, उद्योगों को कई प्रकार के बोझिल टैक्सों से रियायत देना आदि शुमार हैं।

लेकिन इधर कुछ महीनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुद बिहार चुनाव कैंपेन में शामिल हो जाने से और चुनाव के दौरान हेटस्पीच समेत कई अनहोनी होने से मोदी सरकार का ध्यान विकास से जरूर भटका है। बिहार चुनाव के नतीजे के बाद हार के कारणों के आंकलन के लिए हुई भाजपा की बैठक में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने माना भी है कि ध्यान भटकाने वाले बयानों से सरकार और पार्टी को नुकसान हुआ है।

लेकिन बड़ी बात यह है कि अनर्गल बयानबाजी करने वाले नेताओं के खिलाफ जब तक भाजपा और सरकार नेतृत्व की ओर से कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक कड़ा संदेश नहीं जाएगा। भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र को और बढ़ावा देने की भी जरूरत है । भाजपा के लिए बिहार चुनाव नतीजों का सबक यही है कि उसे अपने 'सबका साथ, सबका विकास' मूलमंत्र पर ही अडिग रहना चाहिए। उसे मजहब, बीफ जैसे अनुत्पादक मसलों में नहीं उलझना चाहिए।

मोदी सरकार ने आर्थिक सुधार के ट्रैक पर लौटने का संकेत दे दिया है। सरकार ने डिफेंस, ब्रॉडकास्टिंग, निजी बैंकिंग, एग्रीकल्चर, प्लांटेशन, माइनिंग, विमानन, कंस्ट्रक्शन डवलपमेंट, सिंगल ब्रांड रिटेल, कैश एंड कैरी होलसेल और मैन्युफैक्चरिंग समेत 15 सेक्टरों में एफडीआई नियमों में ढील की घोषणा की है और विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाई है। लेकिन अभी कई रिफॉर्म अटके पड़े हैं। जीएसटी सबसे अहम है।

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