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संपादकीय लेख .. जहरीली शराब से मौत के दोषियों को मिले सजा

जहरीली शराब बनने का सिलसिला भी नया नहीं है। आजादी के बाद से हजारों लोग जहरीली शराब से काल के गाल में समा चुके हैं। जहरीली शराब के गोरखधंधे पर कई फिल्में बन चुकी हैं। इसके बावजूद अगर राज्य प्रशासन आंख मूंदकर काम कर रहे हैं तो यह चिंतनीय हैं। यह सभी जानते हैं कि शराब बनाने के लिए व्यापक स्तर पर लाइसेंस की जरूरत होती है, जिसमें आबकारी विभाग मुख्य रूप से शामिल होता है।

संपादकीय लेख .. जहरीली शराब से मौत के दोषियों को मिले सजा
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : देश में कहीं भी जहरीली शराब से मौत स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते होती है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जहरीली शराब से दो दिन में 56 लोगों की जान चली गई है। मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है। यह पहली बार नहीं है कि किसी जिले में जहरीली शराब से किसी की मौत हुई हो। इसी साल मध्य प्रदेश में 29 और राजस्थान में 11 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हो गई थी। अगस्त 2020 में जब पूरा देश कोरोना की महामारी के संकट से जूझ रहा था, तब पंजाब में करीब 111 लोगों ने मेथेनाल से बनी जहरीली शराब पीने के बाद तड़प-तड़प कर दम तोड़ा था।

कोरोना संकट के दौरान ही नवंबर 2020 में हरियाणा के सोनीपत में 28 मौतों को भी अभी तक कोई नहीं भूला है। देश का शायद ही कोई राज्य हो, जहां हर साल कुछ न कुछ लोग जहरीली शराब के सेवन न मरते हों। जहरीली शराब बनने का सिलसिला भी नया नहीं है। आजादी के बाद से हजारों लोग जहरीली शराब से काल के गाल में समा चुके हैं। जहरीली शराब के गोरखधंधे पर कई फिल्में बन चुकी हैं। इसके बावजूद अगर राज्य प्रशासन आंख मूंदकर काम कर रहे हैं तो यह चिंतनीय हैं। यह सभी जानते हैं कि शराब बनाने के लिए व्यापक स्तर पर लाइसेंस की जरूरत होती है, जिसमें आबकारी विभाग मुख्य रूप से शामिल होता है। चूंकि शराब की बिक्री राज्यों के राजस्व आय का बड़ा स्रोत है, इसलिए इसके रेगुलेशन भी सख्त है। शराब बनाने से लेकर इसकी बिक्री तक सभी सरकार के स्तर पर नियंत्रित है। शराब निर्माण से लेकर इसकी टेस्टिंग तक क्वालिटी के लिए मानदंड तय हैं। तब भी अगर किसी जिले में जहरीली शराब निर्माण का कार्य हो रहा है, तो यह स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। अभी अलीगढ़ में जहरीली शराब से मौत प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।

इस मामले में अभी तक छोटे कर्मियों पर कार्रवाई की गई है, जबकि पूरे जिले को संभालने वाले डीएम और एसएसपी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश में मार्च से अब तक सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जिसमें अलीगढ़ के 56 के अलावा प्रतापगढ़ में 13, प्रयागराज में 9, आजमगढ़ में 8, आंबेडकरनगर में 6 और बदायूं में 4 शामिल हैं। इसके बाद भी इन मौतों के लिए यूपी के आबकारी कमिश्नर क्यों नहीं जिम्मेदार है? बड़ा सवाल है कि आखिर आबकारी कमिश्नर के रहते हुए जिलों में अवैध शराब निर्माण या जहरीली शराब वितरण कैसे संभव हो पा रहा है? अलीगढ़ के शराब कांड की मजिस्िट्रयल जांच हो रही है, यह अच्छी बात है। उम्मीद की जानी चाहिए कि यह जांच केवल खानापूर्ति बन कर नहीं रह जाएगी, बल्कि इन मौतों के जिम्मेदार निर्माता से लेकर हर पदासीन शख्स को कानून के कटघरे तक लाया जाएगा। मौत के आंकड़ों से पता चलता है कि देश के अधिकांश जिले में स्थानीय स्तर पर अवैध शराब का निर्माण व वितरण का नेटवर्क स्थानीय प्रशासन की लापरवाही या मिलीभगत से चल रहा है।

राज्य सरकारों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्माण के बाद बिक्री के लिए जाने वाली शराब जानलेवा नहीं है। शराब राजस्व का बड़ा स्रोत है, इसलिए सरकार को देखना चाहिए कि शराब पीने वालों की जिंदगी के साथ कोई खिलवाड़ नहीं करे। अब देखने वाली बात है कि आगे जहरीली शराब के सेवन से किसी की मौत न हो, इसके लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकारें व स्थानीय प्रशासन क्या कदम उठाते हैं? साथ ही जहरीली शरब से मौत के सभी दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

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