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ब्रिटेन का डेविड कैमरन के नेतृत्व में भरोसा कायम

मतगणना के बाद पार्टी का चेहरा रहे प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल हो गया है।

ब्रिटेन का डेविड कैमरन के नेतृत्व में भरोसा कायम
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ब्रिटेन में कंजरवेटिव पार्टी अपनी सत्ता बचाने में कामयाब हो गई है। शुक्रवार को हुई मतगणना के बाद पार्टी का चेहरा रहे प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल हो गया है। दूसरी बड़ी पार्टी लेबर की ओर से एड मिलीबैंड प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, लेकिन ब्रिटेन की जनता ने उन्हें नकार दिया। इन दोनों के अलावा यूनाइटेड किंगडम इंडिपेंडेंस पार्टी, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी, ग्रीन पार्टी और स्कॉटिश नेशनल पार्टी भी मैदान में थीं। इस बार पिछले चुनावों की तुलना में कंजरवेटिव और स्कॉटिश नेशनल पार्टी की सीटें बढ़ी हैं।
वहीं लेबर और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। इससे स्पष्ट होता है कि ब्रिटेनवासियों ने कंजरवेटिव और डेविड कैमरन की नीतियों व नेतृत्व में भरोसा जताया है। वहीं क्षेत्रीय और छोटे दलों का उभार यह संकेत दे रहा है कि ब्रिटेन की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। इस बार के चुनाव में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या पांच करोड़ थी, जिसमें करीब छह लाख भारतीय मतदाता थे। इनमें से करीब 75 फीसदी मतदाताओं ने अपने मत का इस्तेमाल किया। भारत की तरह ही ब्रिटेन में आम चुनाव में जनता अपने सांसद का चुनाव करती है जो पांच साल तक हाउस आॅफ कॉमन्स में उनके क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।
हाउस ऑफ कॉमन्स ब्रिटिश संसद का लोकतांत्रिक रूप से चुना गया निम्न सदन है जिसका दायित्व कानून बनाना और सरकार के काम-काज पर नजर रखना होता है। इसमें कुल 650 सीटें निर्धारित हैं, किसी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 326 सीटें हासिल करनी होती हैं। इस बार चुनाव में डांवाडोल होती अर्थव्यवस्था और यूरोपीय संघ से बाहर होने को लेकर जनमत संग्रह की बात बड़े मुद्दे बने थे। कंजरवेटिव की ओर से नेशनल हेल्थ सर्विस को वजूद में लाने का भी वादा किया गया। हालांकि पहले उसने इस योजना से कदम पीछे खींच लिए थे। ब्रिटेन में कैमरन, एड मिलीबैंड के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय हैं। पिछले कार्यकाल में उनके द्वारा उठाए गए सुधारवादी कदमों को काफी सराहा गया।
इसी वजह से मतदाताओं को लगा कि डेविड कैमरन ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सकते हैं। अभी ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था कई समस्याओं से जूझ रही है, इसे दूर करने के लिए खर्चों में कटौती करनी होगी, लेकिन इससे सामाजिक मोर्चे पर दूसरी समस्याएं खड़ी होने का डर है। डेविड कैमरन की सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह ऐसे हालात में अपने चुनावी वादों को कैसे पूरा करे? वहीं यूरोपीय संघ की सदस्यता के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराए जाने की बात पर कई जानकारों ने कैमरन को चेताया है कि इससे आर्थिक उथल-पुथल मच जाएगी। यूरोपीय संघ को छोड़ने से ब्रिटेन विश्व में अपनी अहमियत खो भी सकता है। वे इस पर कितना अमल करते हैं यह देखने वाली बात होगी। डेविड कैमरन भारत के लिए बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं।
उन्होंने भारतीय हितों के लिए काफी काम किया है। ब्रिटेन भारत में सबसे बड़ा यूरोपीय निवेशक है और भारत ब्रिटेन में दूसरा सबसे बड़ा निवेशक है। ब्रिटेन में भारतीय छात्र दूसरा सबसे बड़ा समूह है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, भाषायी और सांस्कृतिक रिश्ते हैं जिनका सही ढंग से दोहन नहीं किया गया है। उम्मीद हैकि कैमरन के नेतृत्व में ब्रिटेन अपनी चुनौतियों से कारगर ढंग से निपटने के साथ-साथ भारत के साथ रिश्तों को भी मजबूती प्रदान करेगा।

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