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छोटे नोटों की अहमियत बतलाता व्यंग्य ''चेंज प्लीज''

इस मायावी खनक-चमक के सच से कौन नैना चुरा सकता है भला।

छोटे नोटों की अहमियत बतलाता व्यंग्य
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अब किसी भी दुकान पर आप पहुंचे नहीं कि ऑर्डर पास करते ही पहले-पहले जुमले के रूप में प्राय: यह महाशब्द सुनाई पड़ जाते हैं सामने वाले के कि छुट्टे पैसे हैं-चेंज दीजिएगा। अब थोड़े ‘कल्चर्ड’ और आधुनिक तहजीब से प्रभावित बेचने वाला बंदा होगा तो यह अर्ज करेगा कि चेंज प्लीज.... यानी कि करीने से भिगोकर मारना।
इस दुनिया के मेले में हैं। तमाशे बहुत अजीबो-गरीब।’ अब अगर बड़े-बुजुर्ग यह फरमा गए हैं तो यूं ही नहीं। यह उनके अनुभवों का निचोड़ ही इन शब्दों में आया है, ऐसा बिना किसी सोच-विचार में पड़े कहा जा सकता है। ऐसा इसलिए भी कि इस दौर-ए-जहां में ऐसे-ऐसे तमाशे देखने को मिल रहे हैं कि बानगी का पलड़ा यकीनन ही काफी भारी-भारी दीख पड़ने लगा है। अब ऐसी ही एक बानगी को बेहद करीने से पेश कर रहा हूं- कृपया खुशी-खुशी व मस्त-मस्त होकर ग्रहण करिए। ‘चेंज प्लीज..... टूटे हैं न-छुट्टे पैसे दीजिएगा....’, जी हां भाई लोगों, वह क्या है कि हम-आप जब कभी भी आज की रंग-रंगीली, छैल-छबीली दुनिया के मायावी-तिलस्मी व चकाचौंधों से भरे बाजारों में कुछ भी खरीदने को जाते हैं, तो इन ‘शब्द महान’ से चाहते न चाहते हुए भी सामना हो ही जाता है। और अब किया जाए तो भी क्या किया जाए, क्योंकि यह तो इस दौर-ए-जहां की नायाब सी गिफ्ट है, जो कि टूटे पैसे-चिल्लर, यानी कि छुट्टे पैसे आदि पर्यायों के रूप में दिख रही है जनता-जनार्दन को। टूटे पैसे-चिल्लर यानी कि चेंज रुपए से भी अधिक महत्वपूर्ण दर्जा पा चुकी है- या फिर कह लें कि हथिया चुकी है।
सीन यह बन पड़ा है भाई लोगों कि अब किसी भी दुकान पर आप पहुंचे नहीं कि आॅर्डर पास करते ही पहले-पहले जुमले के रूप में प्राय: यह महाशब्द सुनाई पड़ जाते हैं सामने वाले के कि छुट्टे पैसे हैं-चेंज दीजिएगा। अब थोड़े ‘कल्चर्ड’ और आधुनिक तहजीब से प्रभावित बेचने वाला बंदा होगा तो यह अर्ज करेगा कि चेंज प्लीज.... यानी कि करीने से भिगोकर मारना। बस.. यह शब्द महान कान में पड़े नहीं कि यूं लगता है मानो आसमान से टपके और सीधे जमीन पर धराशायी हो गए, चारों खाने चित्त पोज में.... क्यों ऐसा ही तो है न। यह जो ‘चेंज-महान’ की रंगीन छटा है न, यह तो भैया बड़े ही अजूबे वाली स्थितियों को जन्म दे देती है समय-समय पर। पता ही नहीं लग पाता है कि बेचने वाले की ज्यादा रुचि किसमें है-अथवा सामान बेचने-बिक्री करने में या फिर टूटे पैसे यानी कि चेंज दि ग्रेट का जुगाड़ बनाने में। यह जो टूटे पैसे हैं न, यह तो बड़े से बड़े और ताकतवर नोट का भी दिल तोड़ कर रख देते हैं दुनिया के चलते-फिरते और रौनक भरे बाजार में।
जरा दिमाग के घोड़ों को दौड़ाकर सोचें कि ऐसी ‘चेंज-प्रधान’ दुनिया में बड़ी से बड़ी कीमत का ताज पहने नोट भी कैसे शरमाया-शरमाया सा एक कोने में पड़ जाता है और चिल्लर यानी कि चेंज की खनखनाहट व रुन-झुन को सुनता रहता है। बिल्कुल जमानत जब्त नेता की सी दुर्गति को प्राप्त हो जाता है बेचारा पुअर चैप। सब वक्त-वक्त का फेर है भैया.. मोटा-ताजा सांड भी दिखे हैं मरियल-खपच्ची से गईया। इसे तो अपनी जग-जाहिर वैल्यू की अहमियत पर ही शक-शुबह होने लगता होगा ऐसी अजब-गजब सी चेंज-चिल्लर प्रधान मौजूदा स्थिति और हालातों में, क्यों... ठीक कहा न जनाब। और इसका पूरा-पूरा श्रेय इस टूटे पैसे की चलती हुई.... धकाधक दौड़ती-भागती बयार को जाता है। टूटे पैसे वैसे खुद तो टूटे नहीं होते, टूटे-फूटे से नहीं दिखते कहीं से भी, पर उन्होंने दुनिया के बाजार में चकाचौंध भरे तिजारती मेलों में काफी कुछ टूट-फूट मचा रखी है, इस मायाबी खनक-चमक के सच से कौन नैना चुरा सकता है भला।
आप शान से सिर उठाकर बाजार में जाइए, नोटों की गरमी से जेब का तापमान चाहे जितना भी बढ़ा-चढ़ा हो, पर इतना तो पक्का मान कर चलिए कि चेंज यानी टूटे पैसे अर्थात् ‘चिल्लर’ के न होने के हालातों का एक झौंका ही सारे बने-बनाए खुशनुमा सीन पर पानी फेर सकता है, और उलझनों-झमेलों वगैरा-वगैरा से सामना करा सकता है। जेब से भरे-पर तब भी लुटे-पिटे से होने की स्थिति को प्राप्त हो सकते हैं आप इस ‘चिल्लरी-खेल’ में। कहते हैं कि बेचने वाले के लिए सामने खड़ा खरीददार-यानी कि ग्राहक भगवान समान होता है, परंतु आज के दौर-ए-वक्त में चिल्लर व टूटे पैसे विहीन ग्राहक-खरीददार को तो दुकानदार भगवान होने की निगाह से नहीं देख सकता, यह तो पक्का मानकर चलिए जनाब। टूटे पैसे अगर ग्राहक से मिल गए-तो वाह-वाह, बेचने वाले के चेहरे की चमक देखने-ताड़ने के काबिल होती है। लगता यूं है कि मानो उसका व्यवसाय करना सफल हो गया। और अगर कहीं आप के पास चेंज नहीं तो खुदा बचाए आपको बेचने वालों की तीखी नजरों के नुकीले बाण से। यानी कि जेब है अगर टूटे पैसों के भार से भारी-तो भरा-पूरा बाजार आपसे कहेगा पूरी यारी- नहीं होगी कोई लाचारी और मिलेंगे सुनने को यह शब्द कि - ‘वाह चेंज-थैंक यू सर’।
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