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माही का सही समय पर उपयुक्त फैसला

माहि ने 2016 तक 72 टी-20 मैचों में कप्तानी की जिनमें से 41 में जीत मिली।

माही का सही समय पर उपयुक्त फैसला
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भारतीय टीम को सौरव गांगुली ने कप्तान के तौर पर लड़ना सिखाया तो महेंद्र सिंह धोनी ने जीतना सिखाया। एक कप्तान के तौर पर धोनी की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। विषम से विषम परिस्थिति में भी ‘कूल’ रहने की खासियत धोनी के व्यक्तित्व में चार चांद लगाती है। वे भारत के पहले इकलौते क्रिकेट कप्तान हैं, जिनकी अगुवाई में टीम इंडिया ने आईसीसी के तीनों अहम कप- टी-20 विश्व कप (2007), वनडे विश्व कप (2011) और चैंपियंस ट्रॉफी (2013) में जीत हासिल की है। कपिल देव के बाद धोनी ने ही भारत को क्रिकेट विश्व कप में जीत का स्वाद चखाया। सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट विश्वकप जीतने का सपना भी ने धोनी ने ही पूरा किया।
टी-20 और वनडे की कप्तानी छोड़ने का फैसला उन्होंने बिल्कुल सही समय पर किया है। ठीक वैसे ही यह उनका टाइमिंग के हिसाब से शानदार फैसला है, जैसे उन्होंने टेस्ट टीम की कप्तानी उपयुक्त समय पर छोड़ी थी। धोनी एक अनुभवी कप्तान रहे हैं, उन्हें पता है कि क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में अगर एक ही खिलाड़ी कप्तान रहे, तो टीम में संतुलन बनाने में आसानी होती है। इस समय विराट कोहली टेस्ट टीम के कप्तान हैं। कप्तान के तौर पर वे शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। वे वनडे और टी-20 के कप्तान के लिए भी प्रबल दावेदार हैं। उम्मीद की जा सकती है कि धोनी के बाद कोहली को ही चयनकर्ता मौका देंगे। 2019 में अगला विश्वकप होना है।
इस समय भारतीय टीम में प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की फौज है। विराट अगर सीमित ओवर फॉर्मेट के कप्तान बनते हैं, तो उनके पास विश्वकप की तैयारी करने का पूरा मौका होगा। धोनी ने इच्छा जताई है कि वे 2019 के विश्व कप तक खेलना चाहते हैं। अब वे कप्तानी के बोझ से मुक्त होंगे, तो खिलाड़ी के तौर पर बेहतर प्रदर्शन पर फोकस कर सकेंगे। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के चयनकर्ता जरूर धोनी की इस इच्छा का मान रखेंगे। विराट की भी धोनी के साथ अच्छी ट्यूनिंग है। टीम अगर धोनी रहेंगे, तो विराट को भी उनके अनुभव का लाभ मिलता रहेगा। धोनी का रिकार्ड भी शानदार रहा। 2007 में वे टी-20 के कप्तान बने ओर उसी साल उन्होंने टी-20 विश्वकप जीता। उन्होंने 2016 तक 72 टी-20 मैचों में कप्तानी की है, जिनमें से 41 में जीत मिली।
उनकी सफलता दर 60 फीसदी रही। उन्होंने 199 वनडे मैचों में कप्तानी की, जिनमें से 110 में जीत दिलाई। सफलता दर 60 फीसदी रही। टेस्ट में धोनी ने 60 मैचों में कप्तानी कर 27 में जीत दिलाई और सफलता दर 45 फीसदी रही। वे रिकार्ड के स्तर पर वनडे में अजहर से बेहतर और टेस्ट में गांगुली से बेहतर कप्तान रहे। माही ने कप्तान के रूप में वनडे में 54 के औसत से 6633 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 86 का रहा है। टी-20 में 122.60 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं, जबकि टेस्ट में 40.63 के औसत से 3454 रन ठोके हैं।
उनकी कप्तानी में टीम इंडिया साल 2009 में टेस्ट मैचों में नंबर वन रही थी। हालांकि धोनी की सफलता में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, अनिल कुंबले, जहीर खान, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, युवराज सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ियों का योगदान रहा है, लेकिन कप्तानी के आखिरी दौर में धोनी पर सहवाग, गंभीर, द्रविड़ जैसे कुछ महान खिलाड़ियों से सौतेले व्यवहार के आरोप भी लगे और सुरेश रैना जैसे खिलाड़ी पर मेहरबानी के आरोप लगे। इन आरोपों को छोड़ दें तो कप्तान के रूप में धोनी ने राष्ट्र की बड़ी सेवा की है। उम्मीद है कि वे आगे खिलाड़ी के तौर पर बेहतर प्रदर्शन करते रहेंगे।

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