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दूसरे खेलों पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत

क्रिकेट की लोकप्रियता ने दूसरे खेलों को हाशिए पर कर दिया।

दूसरे खेलों पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत
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इंचियान एशियन गेम्स भारत में खेलों की बदल रही तस्वीर को पेश कर रहा है। एक दौर था जब खेलों की चर्चा होती थी तो सबकी जुबान पर क्रिकेट और उसके खिलाड़ियों के नाम ही आते थे। क्रिकेट की लोकप्रियता ने दूसरे खेलों को हाशिए पर कर दिया था। दूसरे खेलों की नाम मात्र चर्चा होती थी और क्रिकेट से इतर अन्य खेलों के खिलाड़ियों के नाम तो शायद ही कोई जानता था, परंतु आज यह स्थिति नहीं है। मैरी कॉम, साइना नेहवाल, सानिया मिर्जा, पीवी सिंधू, सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, गगन नारंग, अभिनव बिंद्रा, सीमा पुनिया और सरदार सिंह आदि कई ऐसे नाम गिनाए जा सकते हैं जो आज अलग-अलग खेलों के हीरो बनकर देश का नाम रौशन कर रहे हैं। एशियन गेम्स की अब तक की यात्रा पर एक नजर डालें तो यह बदल रही दास्तान बखूबी पढ़ी जा सकती है। हालांकि भारत की शुरुआत बहुत शानदार नहीं रही थी, लेकिन प्रतियोगिता जैसे-जैसे आगे बढ़ी वैसे-वैसे पदक तालिका में हम ऊपर चढ़ते गये। हॉकी में भारत ने पाकिस्तान को हराकर गोल्ड मेडल जीता है। भारत को सोलह साल बाद यह कामयाबी मिली है। इसी के साथ भारत ने 2016 में रियो-डी जनेरियो में होने वाले ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है। महिला हॉकी टीम ने भी पदक जीता है। वहीं बॉक्सिंग, चक्का फेंक, शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेनिस, टेबल टेनिस, कबड्डी (महिला व पुरुष दोनों टीम), तीरंदाजी और एथलेटिक्स के खिलाड़ियों ने कमाल का प्रदर्शन किया है। 1990 में एशियाई खेलों में कबड्डी को शामिल किए जाने के बाद से ही भारतीय पुरुष टीम लगातार गोल्ड मेडल जीत रही है। इस प्रकार देखा जाए तो देश में क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों की लोकप्रियता बढ़ रही है। उन्हें यहां पहचान मिल रही है। क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को भी नाम, पैसा और शोहरत मिल रही है। अन्य खेलों के प्रति लोगों में बढ़ी रुचि का ही परिणाम है कि आज देश में हॉकी, फुटबॉल, बैडमिंटन और कबड्डी जैसे खेलों की लीग की शुरुआत हुई है। देश में पहलवानों ने एक खास मुकाम बनाया। महिला पहलवानों की भी एक पौध तैयार हो गई है। नए-नए बॉक्सर, शुटर, तीरंदाज, धावक आदि सामने आ रहे हैं। भारत हॉकी में खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ ही रहा है। देश के लिए यह अच्छी खबर है। भारत महाशक्ति बने उसके लिए जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की जितनी भी प्रतियोगिताएं हैं, जैसे ओलंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स व विश्व चैंपियनशिप, उनमें पदक तालिका में सवरेत्तम स्थान प्राप्त भी करें। विश्व की जो महाशक्तियां हैं वो केवल क्रिकेट के सितारों के नाम से ही नहीं जानी जाती हैं बल्कि वहां अलग-अलग खेल प्रतिस्पर्धाओं के हीरो हैं। वहां एथलीट, फुटबॉलर, तैराक, शूटर, पहलवान व धावक हैं। इस प्रकार अलग-अलग खेलों में उन्होंने अपने हीरो भी पैदा किए हैं। अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस, र्जमनी और सोवियत रूस की पहचान उनके खिलाड़ियों से भी जुड़ी हुई है। इसलिए जरूरी हैकि भारत का जो तंत्र है वह अब क्रिकेट से अलग सोचना शुरू करे जिसके नतीजे इंचियान एशियन गेम्स में आने आरंभ हो गए हैं।

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