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Editorial : कोविड-19 के कहर को तत्काल रोकना जरूरी

। देश में अब तक करीब 1.27 करोड़ लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 1.17 करोड़ ठीक हुए हैं और 1.65 लाख ने जान गंवाई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 30 अप्रैल तक नाइट कर्फ्यू लगाया गया है। महाराष्ट्र में कोविड संक्रमण के विस्फोट की स्थिति है। देश के 50 जिले हॉट स्पॉट की तरह हैँ, उनमें से 30 जिले महाराष्ट्र के हैं, छत्तीसगढ़ में ऐसे 11 जिले हैं और 9 जिले पंजाब के हैं।

Editorial : कोविड-19 के कहर को तत्काल रोकना जरूरी
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प्रतीकात्मक तस्वीर

Editorial : एक तरफ देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले फिर से डरा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कोविड वैक्सीन को लेकर शक-सुबहा से टीकाकरण अभियान भी प्रभावित हो रहा है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह जिन राज्यों में स्थिति बेकाबू हो रही है, वहां इसे थामने के लिए राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय करे और टीके को लेकर लोगों का भ्रम भी दूर करती रहे। हालांकि चिकित्सक टीके के सेफ होने की अपील करते रहे हैं। अभी देश में फिर से कोरोना का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है और रोजाना होने वाली मौतों का आंकड़ा भी डरा रहा है। 4 अप्रैल को एक लाख से ज्यादा नए केस आने के बाद सोमवार को करीब 97 हजार लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई। इस दौरान 400 से ज्यादा लोगों की मौत भी हुई। मार्च के पहले हफ्ते में मौतों का आंकड़ा 97 का था, तो अप्रैल के पहले हफ्ते में आंकड़ा 490 तक पहुंच गया।

एक माह में ही एक हफ्ते में होने वाली औसतन मौतों में पांच गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश में एक्टिव केस की संख्या 7.84 लाख हो गई है। अनुमान है कि बुधवार तक यह 8 लाख के पार हो सकता है। देश में अब तक करीब 1.27 करोड़ लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 1.17 करोड़ ठीक हुए हैं और 1.65 लाख ने जान गंवाई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 30 अप्रैल तक नाइट कर्फ्यू लगाया गया है। महाराष्ट्र में कोविड संक्रमण के विस्फोट की स्थिति है। देश के 50 जिले हॉट स्पॉट की तरह हैँ, उनमें से 30 जिले महाराष्ट्र के हैं, छत्तीसगढ़ में ऐसे 11 जिले हैं और 9 जिले पंजाब के हैं। इसलिए महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। टीके को लेकर भ्रम फैलने की खबरें भी आ रही हैं।

हाल ही में बिहार की राजधानी पटना में टीके की दूसरी डोज के महीनेभर बाद 187 हेल्थ वर्कर्स संक्रमित हो गए। हरियाणा, मध्य प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में भी ऐसे मामले सामने आए। इससे टीके की विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजिमी है। टीके के बाद कोरोना होने पर स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमण का खतरा बना रहता है, वैक्सीन संक्रमण से बचाव की गारंटी नहीं है। तो किसी भी सरकार के स्वास्थ्य विभाग को ऐसे बयानों से बचना चाहिए, इससे टीके के प्रति विश्वास और कम होगा। 18 साल से अधिक उम्र के सबको टीका क्यों नहीं, के सवाल पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सफाई दी है कि जिन्हें ज्यादा जोखिम, उनका टीकाकरण पहले हो रहा है। सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी कि सभी लोगों को टीका लगाने का कोई प्लान नहीं है। वैक्सीनेशन अभियान के दो लक्ष्य हैं- मौतों को रोकना और हेल्थकेयर सिस्टम को बचाना।

केंद्र के मुताबिक अगले चार सप्ताह विकट हैं, ऐसे में सरकार को और मुस्तैद रहना होगा। देश एक बार फिर लॉकडाउन नहीं झेल पाएगा, इसलिए एहतियात जरूरी है। अब जब एक दिन बाद आठ अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रभावित राज्यों के साथ बैठक करेंगे, तो इस दौरान कोरोना पर काबू के कांक्रीट प्लान लागू किए जाने पर बात होनी चाहिए। सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस है, इसलिए भारत सरकार को देश को कोरोना मुक्त बनाने के साथ सभी सर्वसुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने का संकल्प लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने हालिया फैसले में कहा था कि स्वास्थ्य मौलिक अधिकार है और सबको सस्ता इलाज उपलब्ध कराना सरकारों की जिम्मेदारी है। सरकार इस दिशा में काम करे तो अच्छा होगा।

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