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Coronavirus : डेंगू-कोरोना भाई-भाई

Coronavirus : कोरोना वायरस फैलने पर फटाफट चीन ने एक हजार बेड का अस्पताल भी बना डाला। वह भी खाली नौ दिन में। सिर्फ नौ दिन, इतने से दिन में अपुन के यहां कागज पर नक्शा नहीं बनता, उसने जमीन पर अस्पताल बना डाला। ऊपर से दुनियाभर में डंका भी पीट दिया कि नौ दिन में अस्पताल बनाकर दिखा दिया। यही नहीं, 1400 डॉक्टर भी तैनात कर दिए। नौ दिन में हमारे यहां 1400 नाम टाइप नहीं हो पाते।

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Coronavirus : खाली नाम चीन है, चीनी जैसा कभी कुछ आस्वादन नहीं होता। उलटे नाम लेते ही मिजाज में कड़वाहट सी घुल जाती है। कभी हथियार, कभी मिसाइल, कभी अंतरिक्ष में कचरा, कभी परमाणु, कभी सीमाओं से घुसपैठ और कुछ नहीं तो बैठे-ठाले पाक आतंकियों के पक्ष में यूएनओ में वीटो! अब ताजा-ताजा कोरोना वायरस की उत्पत्ति कर दुनिया को खौफ से भर दिया है।

कोरोना वायरस उसकी नीयत की कोख से पैदा हुआ या कुदरत की खाद्य शृंखला को भंग कर जीव-जन्तुओं की बेतहाशा आहारशीलता से, चलो यहां तक ठीक था, लेकिन जब वायरस विस्तार पाकर बेकाबू हो गया, चट मौतें, पट मरीज बढऩे लगे, तो बाकायदा घोषणा कर फटाफट एक हजार बेड का अस्पताल भी बना डाला। वह भी खाली नौ दिन में। सिर्फ नौ दिन, इतने से दिन में अपुन के यहां कागज पर नक्शा नहीं बनता, उसने जमीन पर अस्पताल बना डाला। ऊपर से दुनियाभर में डंका भी पीट दिया कि नौ दिन में अस्पताल बनाकर दिखा दिया। यही नहीं, 1400 डॉक्टर भी तैनात कर दिए। नौ दिन में हमारे यहां 1400 नाम टाइप नहीं हो पाते। जिस तत्परता से यह काम किया है, उससे तो ऐसा लगता है, जैसे यह वायरस ही इसीलिए पैदा किया गया है, ताकि दुनिया को नौ दिन में अस्पताल बनाकर दिखा सके। हम सीमेंट में रेत मिलाते हैं, उसने जरूर तकनीक में खतरनाक लेवल के जिद की मिलावट की होगी।

हालांकि इस पर कुछ शक-सुबहा सा है, मसला कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना जैसा प्रतीत हो रहा है। जरूर दुनिया में कहीं कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रेक्ट हासिल करने की फिराक में होगा। अपने यहां नौ दिन छोड़ो, हॉस्पिटल जैसी चीज नौ साल में भी कम्प्लीट हो जाए, तो चमत्कार समझिए और फिर तय समय पर उद्घाटन हो जाए, तो साष्टांग दंडवत होकर नमस्कार कहिए। बनते-बनते सरकारें बदल जाती हैं। वायरस की कई पीढ़ियां मर-खप लेती हैं। अंततोगत्वा वायरस भी पैर पकड़ लेता है, तुम तो वड्डे वाले 'वो ' हो! वो बोले तो वायरस के भी बाप। खैर, अगर चीन नौ दिन में अस्पताल बनाकर हमें, बोले तो हम इंडियंस को उकसा रहा है, तो वह भारी गलतफहमी में है। हम वह आइटम नहीं, जो उकसाने पर इंच भर भी उकस जाएं। किसी की प्रेरणा से प्रेरित हो जाएं। वैसे भी यहां सौ से ज्यादा दिन इसमें खप जाते हैं कि आखिर करना क्या है? टेंडर किसे देना है? किसका कितना परसेंटेज तय रहेगा? लाख कोरोना वायरस घातक होगा, हम उसे चीनी आइटम से ज्यादा नहीं मानते। फिर हमारे पास डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू जैसे खतरनाक वायरस पहले से मौजूद हैं।

कहीं उसका दांव उलटा न पड़ जाए, कोरोना वायरस आए और डेंगूग्रस्त हो अस्पताल में भर्ती हो जाए। बेड पर पड़ा बड़बड़ाता मिले-डेंगू-कोरोना भाई-भाई। उफ, अभी तलक तो हम 'हिन्दी-चीनी भाई-भाई ' के झटके से ही नहीं उबरे हैं! बाकी काम चैनल कर देंगे-'भारत में घुसते ही कोरोना को हुआ डेंगू'। 'कोरोना को क्यों आया रोना।' आज शाम देखिए, कोरोना के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू। मैं तो कहता हूं, एक बार आने दो, फिर हमारे अस्पताल, लैबोरेट्री, रिपोर्ट, गंदगी, रेस्पॉन्स देखकर खुद ही तौबा कर बैठेगा। मुमकिन है, किसी सुबह बस अड्डे या स्टेशन के बाहर बदहवासी की हालत में बरामद हो, भाई साहब, अभी-अभी मेरा 'कोरोना ' मार लिया किसी ने, देखा कहीं! खाली वायरस को अपन के यहां पूछता कौन है, ढेरों घूमते हैं। ओवर टाइम तक कर रहे हैं। ताजा खबर यह है कि कोरोना ने तैरना सीख लिया है। पट्ठा हवा में ही तैर रहा है। इत्ते से दिन में हमारे यहां कोई बाबू फरियादी की तरफ आंख उठाकर नहीं देखताइतने से दिन में उसने तैरना भी सीख लिया है। वैसे चाइना हमेशा से ही बड़ा डाउटफुल कंट्री रहा है। पीठ करो, तो छुरा भोंकता है, सीना ठोको, तो चीं चा चू दोस्तीनुमा बिहेव करता है। उसके वायरस से ज्यादा, उसके मंसूबों से अलर्ट रहने का!

(लेखक सुरजीत सिंह की कलम से)

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