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घनश्याम बादल का लेख : डराएगा कोरोना, डरना नहीं

भले ही कोविड-19 से अस्पताल भरे हुए नजर आएं, आंकड़े लगातार बढ़ते हुए दिखें या अधिक श्मशान घाट बनाए जाएं, लेकिन घबराइएगा नहीं। कोविड-19 भारत में बहुत अधिक जान नहीं ले पाएगा, लेकिन हां, अगर हमने अनलॉक को स्वच्छंदता बना लिया, नियमों की अनदेखी करनी शुरू कर दी, सावधानियां बरतनी बंद कर दी, अपनी सेहत का ख्याल नहीं रखा और केवल सरकारों के भरोसे ही बैठ गए तो कोरोना का डंक खतरनाक हो जाएगा।

कोरोना के बाद बदल जाएगी करियर की दुनिया
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)

घनश्याम बादल

तमाम कोशिशों, सावधानियों के बावजूद भारत में कोरोना का बम फट चुका है और उसका विकिरण पूरी गति के साथ बढ़कर लोगों को संक्रमित कर रहा है। इसके बहुत जल्द ही देश से समाप्त होने के कोई आसार नहीं है और इन्हीं संकेतों को समझते हुए एक और जहां सरकार ने अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती हुई संख्या और आने वाले समय में इसके विस्फोट होने की आशंका के चलते हुए बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर तथा वेंटिलेटर एकत्र करने पर जोर लगा दिया है। साथ ही साथ एक वैचारिक संकीर्णता भी इन दिनों देखने में आई है जिनके चलते विभिन्न राज्यों की सरकारें अब केवल अपने राज्य के निवासियों के लिए ही उन सुविधाओं का इस्तेमाल करने के संकेत देने लगी है। यद्यपि मजदूरों एवं प्रवासी कामगारों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा होने के बाद होने वाला माइग्रेशन अब पूरा हो गया है और जिसे जहां जाना था वह वहां पहुंच गया है, लेकिन वहां पहुंच कर भी इस वर्ग को कोई खास राहत मिलती नहीं दिख रही है। कहीं 7 दिन तो कहीं 14 दिन क्वॉरेंटाइन कॉल इन्हें भारी पड़ रहा है। इनमें रहने वाले लोगों के सैंपल एकत्र करने की एक मजबूत एवं सिस्टमैटिक प्रणाली का न होना, सैंपल्स की रिपोर्ट आने में लगने वाली देरी, इन केंद्रों में भोजन एवं रहने की सुविधाओं का अभाव है।

मैथमेटिकल मॉडल बेस्ड एनालिसिस सर्वे की मानें तो अभी भी भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का ग्राफ लीनियर यानी रेखीय ग्राफ की शक्ल में चल रहा है और यदि सर्वे में शामिल में न की जाने वाली अनापेक्षित घटनाएं जैसे जनसंख्या की वृद्धि, अन्य बीमारियों से होने वाली मौतें, अचानक होने वाला प्रवास, अचानक कहीं भीड़ का इकट्ठा होना, कहीं दंगे हो जाना या फिर अन्य वजहों से सोशल डिस्टेंस का पालन न हो पाना यथास्थिति में रहती हैं तो भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का चढ़ाव सितंबर के महीने में भी देखना होगा। विशेषज्ञों की राय है कि यह वायरस तब जाकर समाप्त होगा जब इससे संक्रमित होने वाली लोगों की संख्या इसी वायरस की वजह से ठीक होने वाले लोगों या मरने वाले लोगों के योग के बराबर हो जाएगी। तब इसका ग्राफ ऊपर चढ़ना बंद हो जाएगा। इन हालातों में सितंबर 2020 के मध्य तक तो कोरोना वायरस के समाप्त होने की आशा कम ही है ।

अगर विश्व में मुख्य रूप से कोरोना वायरस से संक्रमित देशों के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो वर्तमान स्थिति का पता चलता है कि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर 69 लाख 52 हजार के पार पहुंच गए हैं। अब तक दुनिया भर में 4 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका दुनिया का सबसे अधिक प्रभावित देश है। बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने चेताया है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण अर्थव्यवस्था को होने वाला नुकसान एक दशक तक रहने की आशंका है ।

उत्तराखंड, महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश के कुछ मंत्रियों के संक्रमित होने के समाचार मिले हैं। हालातों को देखते हुए कहा जा सकता है कि अब कोरोना वायरस वीआईपी गैलरी में भी घुस गया है। पहले जहां इस वायरस के संक्रमण से मुख्य रूप से महानगर एवं बड़े शहर ही संक्रमित दिखाई दे रहे थे वही मजदूरों के प्रवास के बाद से यह कस्बों से होता हुआ गांवों तक भी जा पहुंचा है या तो हम सामुदायिक संक्रमण में प्रवेश कर गए हैं अथवा बिल्कुल इस के मुहाने पर खड़े हुए हैं।

अभी तक के आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग तीन लाख लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं हालांकि 145000 से अधिक ठीक भी हुए हैं और लगभग 9000 लोगों की जाने भी गई हैं। पिछले तीन-चार दिन के ट्रेंड पर नजर डालें तो पता चलता है कि संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या का आंकड़ा बढ़कर लगभग 11,000 प्रतिदिन पर पहुंच गया है। अब आंकड़ों में भले ही दुगने होने के दिनों की संख्या 12 या 13 हो, लेकिन यदि केवल संख्या पर गौर करें तो यह लगातार बढ़ रही है और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दो हफ्तों में ही यदि परिस्थितियां न बदली तो हर रोज लगभग 20 से 25000 लोग संक्रमित होंगे। ऐसी स्थिति में देशभर के अस्पताल संक्रमित लोगों से भरे नजर आएंगे। तब एक भय जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है। यद्यपि सरकारें पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं जुटा लेने का दावा कर रही हैं, लेकिन ग्राउंड जीरो पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार जो बता रहे हैं, उसके अनुसार अस्पताल संक्रमित लोगों को भर्ती करने की बजाय दूसरी जगह रेफर करने की प्रवृत्ति पर चलते दिखाई दे रहे हैं। कभी ऑक्सीजन या वेंटीलेटर न होने जैसी बातें बताकर उन्हें दूसरी जगहों का रास्ता दिखाया जा रहा है। इसी प्रकार से निजी अस्पताल भी संक्रमण होने के लक्षण दिखने पर मरीजों से बचने की प्रवृत्ति दिखा रहे हैं। वह सीमित संसाधन होने का बहाना बनाकर मरीजों को टाल रहे हैं। अच्छे निजी अस्पतालों में खर्चा इतना अधिक है कि वहां आम आदमी पहले तो जाता नहीं है और यदि चला गया तो वह उस खर्चे को सहन करने में सक्षम नहीं है। जैसे-जैसे संक्रमण का ग्राफ बढ़ेगा ऐसी परिस्थितियां और अधिक दिखाई देने लगेंगी। जो एक डरावना मंजर होगा। अतः मरीजों को टालने की प्रवृत्ति को हर हाल में रोकना होगा, लेकिन एक अच्छी खबर भी इस बीच आ रही है और वह यह है की कोरोना वायरस यानी कोविड-19 अब लगातार कम खतरनाक वायरस में तब्दील होता जाएगा। वह संक्रमित तो करेगा, लेकिन अच्छी वाली इम्यूनिटी वाले लोगों की जान लेने लायक नहीं बचेगा।

अभी वर्तमान में ही भारत में रिकवरी रेट लगभग 58 प्रतिशत पार कर गया है और आने वाले समय में इसके 80 प्रतिशत को भी पार करने की प्रबल संभावना है। भले ही कोविड-19 फैले अस्पताल भरे हुए नजर आएं टीवी चैनलों पर आंकड़े लगातार बढ़ते हुए दिखे कुछ स्थानों पर एडवांस में कमरे भरे हुए दिखाई दें या अधिक श्मशान घाट बनाए जाएं, लेकिन घबराइएगा नहीं। कोविड-19 भारत में बहुत अधिक जान नहीं ले पाएगा, लेकिन हां अगर हम अनलॉक को स्वच्छंदता बना लिया, नियमों की अनदेखी करनी शुरू कर दी, सावधानियां बरतनी बंद कर दी, अपनी सेहत का ख्याल नहीं रखा और केवल सरकारों के भरोसे ही बैठ गए तो कोरोना का डंक खतरनाक हो जाएगा। इन परिस्थितियों में आवश्यकता है कि हम हिम्मत न हारें, अवसाद में न जाएं, निराश न हों, अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आशावादी सोच बनाए रखें नियमित रूप से योग व्यायाम एवं खानपान की सहायता से स्वयं को स्वस्थ रखें तो कोरोना वायरस तो क्या कोई भी वायरस हमारा अधिक नुकसान नहीं कर पाएगा। इसी बीच वैज्ञानिक अनुसंधानकर्ता एवं अनुभवी डॉक्टर सब मिलकर कोरोना की नाक में नकेल कर ही लेंगे तो आप रहिए सावधान सतर्क करिएगा पालन नियमों का नर है लापरवाह तो निश्चित ही सुरक्षित रहेंगे और स्वस्थ भी।

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