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Editorial : कोरोना-फंगस का समय केंद्र से लड़ने का नहीं

ये आंकड़े बता रहे हैं कि देश कोरोना की दूसरी लहर से बाहर निकल रहा है, लेकिन कोरोना से ठीक हुए डायबिटिक लोगों को ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) का खतरा डरा रहा है। यह लोगों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। अलग-अलग राज्यों में लगातार केस बढ़ने के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है।

Editorial : कोरोना-फंगस का समय केंद्र से लड़ने का नहीं
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : कोरोना को लेकर अच्छी खबर आने लगी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 19 राज्यों में 50 हजार से कम एक्टिव केस रह गए हैं, केवल 9 राज्य ऐसे हैं जहां 50 हज़ार से एक लाख के बीच एक्टिव केस हैं, 13 राज्यों में पॉजिटिविटी रेट 5-15 फीसदी के बीच है। संक्रमण दर में 10 हफ्ते तक बढ़ोतरी जारी रहने के बाद पिछले दो सप्ताह में इसमें कमी आनी शुरू हुई है। अब नए केस से अधिक लोग रिकवर हो रहे हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में केस में कमी आ रही है। पहले यहां ज्यादा केस थे।

ये आंकड़े बता रहे हैं कि देश कोरोना की दूसरी लहर से बाहर निकल रहा है, लेकिन कोरोना से ठीक हुए डायबिटिक लोगों को ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) का खतरा डरा रहा है। यह लोगों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। अलग-अलग राज्यों में लगातार केस बढ़ने के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। केंद्र ने खत लिखकर सभी राज्यों को अलर्ट किया है और राज्यों को एपिडेमिक एक्ट 1897 के तहत इसे महामारी घोषित करने के लिए कहा है। इसके तहत सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों पर ब्लैक फंगस (काला कवक) की निगरानी, पहचान, इलाज और इसके मैनेजमेंट पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। सभी मामलों की रिपोर्ट जिला स्तर के चीफ मेडिकल ऑफिसर को की जाएगी। इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम सर्विलांस सिस्टम में भी इसकी जानकारी दी जाएगी। राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और तमिलनाडु ब्लैक फंगस को पहले ही महामारी घोषित कर चुके हैं। मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस पर अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में भी इसके मरीजों के इलाज के लिए अलग से सेंटर्स बनाए जा रहे हैं।

ब्लैक फंगल इन्फेक्शन उन मरीजों में दिखाई दे रहा है, जिन्हें स्टेरॉयड थेरेपी दी गई है और जिनका शुगर लेवल अनियंत्रित है। दरअसल, गंभीर कोविड संक्रमितों की मौतें रुक नहीं पा रही हैं, दूसरी तरफ ब्लैक फंगस इंफेक्शन के केस भी बहुत ज्यादा बढ़ रहे हैं। अब तो ब्लैक से अधिक संक्रामक ह्वाइट फंगस ने भी दस्तक दी है। बिहार के पटना में मामले सामने आए हैं। इस तरह देश के सामने स्वास्थ्य की नई चुनौती बढ़ गई है। इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रभावित राज्यों के सीएम व डीएम के साथ बैठक की। इस बार दस राज्यों के मुख्यमंत्रियों और 54 जिलाधिकारियों ने शिरकत की। इस दौरान पीएम ने कहा है कि आगे के लिए तैयार रहना होगा। पिछली महामारी हो या फिर ये समय, हर महामारी ने हमें एक बात सिखाई है कि इससे डील करने के हमारे तौर-तरीकों में निरंतर बदलाव, निरंतर इनोवेशन जरूरी है। सीएम व डीएम को पीएम का संदेश साफ है कि जमीनी स्तर काम करें और कोरोना व जुड़ी हुई चुनौतियों से पार पाएं।

हालांकि इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि किसी मुख्यमंत्री को बोलने का मौका नहीं मिला, उनकी बात सही हो सकती है, लेकिन यह समय राजनीति का नहीं है। अभी कोरोना, ब्लैक फंगस व व्हाइट फंगस से निपटने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को कंधे से कंधे मिलाकर काम करना होगा। ममता बनर्जी अब बंगाल में सरकार बना चुकी हैं, इसलिए उन्हें अब राजनीति के मोड से बाहर आकर केंद्र के साथ सहयोग का रवैया अपनाना चाहिए। राज्य अगर केंद्र से लड़ते रहेंगे, तो महामारी से लड़ाई का क्या होगा। अभी तक सरकारों, प्रशासनों व जन सहयोग के प्रयास से ही देश कोरोना से पार पाने की ओर बढ़ रहा है, इसलिए यह आवश्यक है कि केंद्र व राज्य सरकारें समन्वय बना कर रखें।

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