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योगेश कुमार गोयल का लेख : गर्मी में खत्म नहीं होता कोरोना

कोरोना का कहर पूरी दुनिया में जारी है, जिससे अब तक विश्वभर में साढ़े तीन लाख से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 50 लाख से ज्यादा संक्रमित हो चुके हैं। भारत में भी अब प्रतिदिन कोरोना के छह हजार से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं और मरीजों का आंकड़ा करीब डेढ़ लाख पहुंच चुका है।

Coronavirus:वायरस बॉडी में ऐसे जींस को ब्लॉक कर रहा है जो इम्यून सिस्टम को अलर्ट करके वायरस को खत्म करने के लिए रोकते हैं
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)

योगेश कुमार गोयल

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि गर्मी के कारण कोरोना वायरस सतह पर ज्यादा देर तक नहीं टिक पाएगा। भारत में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के दृष्टिकोण से सीडीसी के इस बयान को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत के अनेक इलाके इस समय भीषण गर्मी से बुरी तरह तप रहे हैं और संक्रमण के आंकड़े भी तेजी से सामने आ रहे हैं। सीडीसी का कहना है कि किसी सतह पर वायरस वैसे भी कुछ घंटे ही टिक पाता है, लेकिन सूर्य की तेज रोशनी इसके जीवित रहने के समय को और कम कर देगी।

कोरोना का कहर पूरी दुनिया में जारी है, जिससे अब तक विश्वभर में साढ़े तीन लाख से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 50 लाख से ज्यादा संक्रमित हो चुके हैं। भारत में भी अब प्रतिदिन कोरोना के छह हजार से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं और मरीजों का आंकड़ा करीब डेढ़ लाख पहुंच चुका है। कुछ शोधकर्ता ज्यादा गर्मी बढ़ने पर कोरोना का प्रकोप कम होने की आशंका जता चुके हैं। चीन में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक बढ़ते तापमान तथा मौसम में नमी से कोरोना का बढ़ता प्रभाव कम हो सकता है। चीन के करीब सौ गर्म शहरों में बीजिंग और शिन्हुआ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन के अनुसार ज्यादा गर्मी अथवा नमी से कोरोना के प्रकोप को खत्म तो नहीं किया जा सकता लेकिन इसके तेजी से फैलने पर अंकुश अवश्य लगाया जा सकता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि सौ चीनी शहरों में जैसे ही तापमान बढ़ा, कोरोना संक्रमित मरीजों की औसत संख्या 2.5 से गिरकर 1.5 रह गई।

अमेरिका में मैसाचुसेट्स इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी तथा यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के शोधकर्ता भी कुछ ऐसा ही कह चुके हैं। उनके मुताबिक मार्च महीने के आखिर तक अमेरिका के एरिजोना, टेक्सास तथा फ्लोरिडा जैसे गर्म क्षेत्रों में न्यूयार्क तथा वाशिंगटन की भांति मामले सामने नहीं आए थे। हालांकि शोधकर्ताओं ने इसी के साथ यह चेतावनी भी दी थी कि उनके अध्ययन का अर्थ यह नहीं है कि कोरोना वायरस गर्म तथा नमी वाले क्षेत्रों में नहीं फैल सकता।

भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है। कई इलाकों में 45 डिग्री पार कर चुका है, लेकिन कोरोना के मामले कम होने के बजाय बढ़ रहे हैं। ऐसे में तापमान बढ़ने पर कोरोना का प्रकोप कम होने के दावों पर भरोसा करना कठिन हो गया है। भीषण गर्मी में भी कोरोना के मामले तेजी से सामने आने के कारण बहुत से विशेषज्ञ अब कहने लगे हैं कि गर्मी में कोरोना का प्रभाव खत्म होगा या नहीं, इसके कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं, इसलिए केवल तापमान के भरोसे मत बैठिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कह चुका है कि हमें कोरोना वायरस के प्रकोप को खत्म करने के लिए गर्म तापमान पर भरोसा नहीं करना चाहिए। वायरोलॉजिस्ट डा. परेश देशपांडे के मुताबिक यदि कोई गर्मी के मौसम में छींकता है तो ड्रॉपलेट्स किसी भी सतह पर गिरकर जल्दी सूख सकते हैं, जिससे कोरोना का संक्रमण कम हो सकता है, लेकिन इससे कोरोना का प्रकोप खत्म हो जाएगा, यह नहीं कहा जा सकता।

द एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डा. पी. रघुराम कहते हैं कि यदि कोरोना वायरस गर्मी से मरता तो ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर जैसे गर्म देशों में कोरोना संक्रमण की घटनाएं बहुत कम होनी चाहिएं थी। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथंप्टन के प्रमुख डा. माइकल के मुताबिक कोविड-19 के फैलने की रफ्तार अन्य वायरसों से तेज है और इस वायरस पर गर्मी का प्रभाव जानने के लिए हमें अभी इंतजार करना होगा। कोरोना पर बढ़ते तापमान के असर को लेकर शोधकर्ता अब तक जितने भी दावे करते रहे हैं, उनका एक अहम कारण यह माना जा सकता है कि अब तक अन्य वायरसों पर प्रायः तापमान का असर देखा जाता रहा है। दरअसल वायरस जनित ऐसी बहुत सी बीमारियां हैं, जो मौसम के बदलाव के साथ सामने आती हैं और मौसम के स्थिर होते ही अपने आप खत्म भी हो जाती हैं। इसी कारण कोरोना वायरस को लेकर ऐसे दावे किए जाते रहे हैं कि मई-जून माह में भीषण गर्मी पड़ते ही कोरोना का भी अंत हो जाएगा।

2002-03 में चीन में सार्स नामक कोरोना वायरस का प्रकोप देखा गया था, जिससे करीब आठ सौ लोगों की मौत हुई थी। वैज्ञानिकों ने उस समय जब उस वायरस पर परीक्षण किए तो पाया था कि बाहरी सतहों पर वह वायरस 22-25 डिग्री सेल्सियस तापमान और हवा में 40-50 फीसदी नमी में भी पांच दिनों तक सक्रिय रहा, लेकिन जैसे ही तापमान तथा हवा की नमी को बढ़ाया गया, उसकी सक्रियता कम होती गई। उस वायरस का प्रकोप वहां कोरोना की ही भांति नवम्बर माह के आसपास ही फैलना शुरू हुआ था और अगले वर्ष जून-जुलाई के आसपास करीब-करीब खत्म हो गया था। उस बारे में कहा गया कि मौसम में गर्मी बढ़ने के कारण उस वायरस का खात्मा हो गया था। कोविड-19 भी वास्तव में सार्स कोरोना वायरस के परिवार से संबंध रखता है। इसीलिए इसे लेकर भी कुछ लोगों द्वारा सार्स जैसे ही दावे किए जा रहे हैं। दूसरी ओर सितम्बर 2012 में सउदी अरब में फैले मर्स कोरोना वायरस के प्रकोप पर नजर डालें तो वह वहां जिस समय फैला, तब वहां काफी गर्मी थी लेकिन फिर भी मर्स ने वहां खूब पैर पसारे और काफी लोगों को मौत की नींद सुलाया। इसलिए भी वैज्ञानिक नोवेल कोरोना जैसे वायरस पर बढ़ते तापमान के प्रभाव को लेकर दावे के साथ कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना वायरसों के परिवार के नए सदस्य कोविड-19 पर प्रोटीन की एक परत होती है और इस तरह के प्रोटीन की परत वाले वायरस में मौसम चक्र की मार झेलने की क्षमता अक्सर ज्यादा होती है। स्पेन के शोधकर्ता मिगुएल अराजो के अनुसार कोई वायरस वातावरण में जितने ज्यादा समय तक जिंदा रहने की क्षमता रखता है, उसका खतरा उतना ही बढ़ता जाता है। कोरोना के बारे में अभी साफतौर पर नहीं कहा जा सकता कि यह न्यूनतम और अधिकतम कितने तापमान में नष्ट हो सकता है। कुछ वैज्ञानिकों का मत है कि चूंकि प्रयोगशालाओं की परिस्थितियां प्रकृति की परिस्थितियों से काफी भिन्न होती हैं, इसलिए प्रयोगशाला में कृत्रिम तरीके से बढ़ाए गए तापमान के आधार पर प्राकृतिक मौसमी चक्र और बदलाव को नहीं समझा जा सकता। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन व ट्रॉपिकल मेडिसन के शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना विश्व स्वास्थ्य संगठन के दायरे में आने वाले दुनिया के प्रत्येक क्षेत्र में फैल चुका है, जिनमें गर्म, ठंडे तथा आर्द्रता वाले अर्थात्ा सभी क्षेत्र शामिल हैं, इसलिए इस पर गर्मी के प्रभाव को लेकर कोई एक निष्कर्ष निकालना आसान नहीं है। बहरहाल, कोरोना को लेकर अब तक की हकीकत यही है कि अगर यह वायरस एक बार इंसानी जिस्म में प्रवेश कर गया तो इसे मारने का कोई तरीका नहीं खोजा जा सका है क्योंकि अभी इसका कोई टीका या वैक्सीन तैयार नहीं हुई है। अतः सावधानी ही इससे बचाव का एकमात्र उपाय है।

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