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टकराव के रास्ते पर मुफ्ती मोहम्मद सईद, विवादित बयान ने पहुंचाया देश को नुकसान

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद न सिर्फ अपने बयान, बल्कि फैसले से भी देश को आहत करने का काम कर रहे हैं।

टकराव के रास्ते पर मुफ्ती मोहम्मद सईद, विवादित बयान ने पहुंचाया देश को नुकसान
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद न सिर्फ अपने बयान, बल्कि फैसले से भी देश को आहत करने का काम कर रहे हैं। बीते रविवार को शपथ ग्रहण करने के बाद सामने आए उनके विवादित बयान ने देश को पहले ही काफी नुकसान पहुंचा दिया है। अब उन्होंने अपने एक फैसले से देश की सुरक्षा को ही दांव पर लगा दिया है। दरअसल, मुफ्ती मोहम्मद सईद के आदेश पर शनिवार को भारत विरोधी मुहिम में शामिल कट्टर अलगाववादी नेता मशरत आलम को रिहा कर दिया गया। इसे पाकिस्तान समर्थक माना जाता है।
इसे 2010 में कश्मीर में पत्थरबाजी कांड का मास्टरमाइंड माना जाता है। क्योंकि इसकी गिरफ्तारी के बाद सारे प्रदर्शन खत्म हो गए थे। दोबारा उस तरह का राष्टÑ विरोधी प्रदर्शन कभी नहीं हुआ। अफजल गुरु की फांसी के बाद भी नहीं। अब मशरत आलम के बाहर आने के बाद से सुरक्षा एजेंसियां आशंका जाता रही हैं कि जम्मू-कश्मीर की शांति फिर से खतरे में पड़ सकती है। इससे पहले मुफ्ती मोहम्मद सईद ने भारत विरोधी बयान देते हुए कहा था कि राज्य में चुनावी माहौल बनाने में पाकिस्तान, आतंकवादियों और अलगाववादियों की अहम भूमिका रही। यह राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा बने इन सभी तत्वों को बल प्रदान करने वाला बयान था। पूरी दुनिया जानती हैकि जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने, आतंकवाद को बढ़ावा देने और लोकतंत्र की हत्या करने का काम पाकिस्तान और अलगाववादी करते हैं।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद के माध्यम से यह साफ कर दिया था कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के लिए बेहतर माहौल बनाने के पीछे चुनाव आयोग, राज्य की जनता और सेना का महत्वपूर्ण योगदान है। इन्हीं की वजह से जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण ढंग से विधानसभा चुनाव हो सके। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और भाजपा की साझा न्यूनतम कार्यक्रम (सीएमपी) के तहत गठबंधन सरकार बनी है, लेकिन मुफ्ती मोहम्मद सईद न तो गठबंधन धर्म का पालन कर रहे हैं और ना ही साझा न्यूनतम कार्यक्रम के तहत सरकार चलाते दिख रहे हैं। उल्टे यह कह रहे हैं कि उनके लिए गठबंधन महत्वपूर्ण नहीं है। मुफ्ती मोहम्मद सईद को याद रखनी चाहिए कि उनकी सरकार पूर्ण बहुमत की नहीं है। ऐसे में उन्हें मनमानी करने की बजाय कोई भी फैसला भाजपा से सलाह लेने के बाद करना चाहिए।
बेहतर यही होगा कि मुख्यमंत्री किसी विवाद को जन्म देने की बजाय राज्य में विकास और सुशासन बहाल करने पर ध्यान केंद्रित करें। एक तरफ जब केंद्र सरकार और भाजपा राज्य में बनी नई सरकार को पूर्ण सहयोग की भावना व्यक्त कर रही है तो दूसरी तरह उनके ऐसे रुख से टकराव के हालात बनेंगे, जो किसी भी सूरत में राज्य और देशहित में नहीं होगा। क्योंकि इससे गठबंधन प्रभावित होने का खतरा है। यदि गठबंधन टूटता है तो जम्मू-कश्मीर फिर से अनिश्चितता के भंवर में फंस जाएगा, जबकि आज राज्य को चुनी हुईसरकार की सख्त जरूरत है। अब मुफ्ती मोहम्मद सईद पर निर्भर है कि वे इसी तरह अपना राजनीतिक एजेंडा लागू करना चाहते हैं या राज्य और देश की भलाई चाहते हैं।
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