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नवाज के इस्तीफे के पीछे बहुत बड़ा षड्यंत्र, पाक पर पैनी नजर रखने की जरूरत

यह तीसरी बार है, जब नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।

नवाज के इस्तीफे के पीछे  बहुत बड़ा षड्यंत्र, पाक पर पैनी नजर रखने की जरूरत
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यह तीसरी बार है, जब नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। पाक सुप्रीम कोर्ट ने पनामागेट मामले में नवाज शरीफ को दोषी करार देते हुए उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। अदालत ने उन्हें अपनी पार्टी पीएमएल-एन के प्रमुख रहने के लिए भी अयोग्य करार दे दिया है। उसके तुरंत बाद पाकिस्तान चुनाव आयोग ने भी नवाज की योग्यता को खारिज करने का आदेश दे दिया।

उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है। नवाज ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि पनामा पेपर लीक उनके लिए इतना भारी पड़ेगा। जब यह मामला उठा था तब उनकी सरकार ने ही जेआईटी (संयुक्त जांच समिति) गठित की थी। आज उसकी जांच की आंच में पूरा शरीफ परिवार झुलस गया है। पिछले साल ब्रिटेन से पनामा के टैक्स दस्तावेजों का खुलासा हुआ था, जिसमें बताया गया था कि दुनियाभर के 140 नेताओं और बड़ी तादाद में सेलिब्रिटीज ने टैक्स हैवन देशों में पैसा निवेश किया था।

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इस खुलासे में नवाज परिवार का भी नाम था। उन पर टैक्स हैवन माने जाने वाले ब्रिटिश वर्जिन आयलैंड में चार कंपनियां शुरू करने और इन कंपनियों से लंदन में छह बड़ी संपत्तियां खरीदने का आरोप था। नवाज परिवार अदालत में खुद को शरीफ साबित नहीं कर सका। पाक सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ के साथ-साथ उनकी बेटी मरियम नवाज व उनके पति कप्तान मुहम्मद सफदर, शरीफ के बेटों-हसन और हुसैन नवाज के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है।

पाकिस्तान पर तो इस फैसले का दूरगामी असर पड़ेगा ही, लेकिन भारत भी इसके असर से अछूता नहीं रहेगा। वहां एक चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार के सत्ता में नहीं होने से राजनीतिक अस्थिरता पैदा होगी। पाकिस्तान में मजबूत लोकतांत्रिक सरकार भारत के हितों के अनुरूप है। वहां कमजोर नेतृत्व का सत्ता में होना या फिर सेना का सरकार पर हावी हो जाना, दोनों ही स्थितियां भारत के लिए अच्छी नहीं हैं।

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पाक की फौज और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई पारंपरिक तौर पर ही भारत के लिए पूर्वाग्रहों से भरी हैं। दोनों किस तरह भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों की मदद करते हैं, यह भी किसी से छिपा नहीं है। पाकिस्तान जब भी मुसीबत में होता है वह भारत और कश्मीर में आतंकवाद व उपद्रव को बढ़ावा देना शुरू कर देता है। पाकिस्तान स्थित आंतकी गुट सक्रिय हो जाते हैं। पाकिस्तान में आम चुनाव 2018 में होना है।

तब तक अगर कामचलाऊ या कमजोर सरकार बनती है तो निश्चित ही पर्दे के पीछे से सत्ता की कमान सेना के हाथ में चली जाएगी। गवर्नेंस और विदेशी नीति का काम रावलपिंडी में सेना के हवाले हो जाएगा। पाकिस्तान की फौज व आईएसआई द्वारा कश्मीर घाटी में हिंसा को बढ़ाने का प्रयास हो सकता है ताकि लोकतांत्रिक सरकार को बनाए रखने के अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचाव किया जा सके।

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वैसे अब तक पाक फौज प्रमुख जनरल कमर बाजवा लोकतांत्रिक सरकार को हटा कर फ्रंट पर आने के प्रति अनिच्छुक दिखे हैं, भले ही वह देश को पर्दे के पीछे से चला रहे हों। भारत को पाक की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखनी होगी। वहां कमजोर सरकार के सत्ता में आने से जहां सेना की सक्रियता बढ़ेगी, वहीं पाक चीन के हाथों की कठपुतली बन सकता है। चीन खुलकर पाकिस्तान का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर सकता है। हमें हर हाल में पाक फौज, आईएसआई और चीन से चौकन्ना रहना होगा।

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