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कांग्रेस के बिगड़े बोल से पाकिस्तान हुआ खुश, सेना की शहादत पर प्रश्न क्यों ?

एक तरफ जहां कश्‍मीर पाक प्रायोजित आतंकवाद और अलगाववाद से सुलग रहा है और भारतीय सुरक्षा बल जान की बाजी लगाकर पाक के नापाक मंसूबों को नाकाम कर रहे हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस नेता के पाकपरस्‍त और आतंकी गुटों को सुहाने वाले बयान दे रहे हैं।

कांग्रेस के बिगड़े बोल से पाकिस्तान हुआ खुश, सेना की शहादत पर प्रश्न क्यों ?
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एक तरफ जहां कश्‍मीर पाक प्रायोजित आतंकवाद और अलगाववाद से सुलग रहा है और भारतीय सुरक्षा बल जान की बाजी लगाकर पाक के नापाक मंसूबों को नाकाम कर रहे हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस नेता के पाकपरस्‍त और आतंकी गुटों को सुहाने वाले बयान दे रहे हैं। गहरी चिंता की बात यह है की कांग्रेस के ऐसे नेता ने देश के मिजाज के खिलाफ बयान दिया है, जो केंद्र और कश्‍मीर में मंत्री रहे हैं।

कांग्रेस के दिग्‍गज नेता रहे सेफुददीन सोज और गुलाम नबी आजाद ने पाकिस्‍तान के मूड के मुताबिक बयान देकर अपने मुल्‍क को ही शर्मसार किया है। सोज ने कहा कि अधिकतर कश्‍मीरी आजादी चाहते हैं। उन्‍होंने अपनी आने वाली किताब में लिखा है कि पाकिस्‍तान के पूर्व शासक परवेज जनरल मुशर्रफ का मानना था की अगर कश्‍मीर के लोगों को निर्णय लेने का अधिकार दिया जाय तो अधिकतर लोग आजादी परसंद करेंगे।

जम्‍मू-कश्‍मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा की कश्‍मीर में सेना के ऑपरेशन आतंकवादी से ज्‍यादा नागरिक मारे गए हैं। एक राष्‍ट्रीय पार्टी के रूप में कांग्रेस के इन दिग्‍गज नेताओं के बयान शर्मनाक हैं, निंदनीय है और कश्‍मीर में आवाम की रक्षा के लिए तैनात सुरक्षा बलों का मनोबल तोड़ने वाले है।

उस समय जब पाकिस्‍तान की फौज, पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रायोजित लश्‍कर- जैश-हिज्‍बुल जैसे आतंकी गुट और कश्‍मीरी अलगाववादी घाटी को अस्थिर करने में जुटे हुए हैं, तब कांग्रेस के दो दिग्‍गज नेताओं के ऐसे बयान से कश्‍मीर में शांति-अमन की सरकार की कोशिशों को झटका लगेगा।

हाल में ही संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में भारतीय सुरक्षा बलों पर कश्‍मीर में मानवाधिकार उल्‍लंघन का आरोप लगाया। इस राजनीतिक एकजुटता दिखाने की जरूरत थी। विश्‍व में ऐसा संदेश दिया जाना चाहिए था कि भारत कश्‍मीर मसले पर राजनीतिक रूप से एकजुट है।

लेकिन कांग्रेस ने एक जिम्‍मेदार पार्टी के रूप में अपनी मर्यादा को तार-तार कर दिया। कांग्रेस को अपनी सोच को लेकर मंथन करना चाहिए। कांग्रेस के अध्‍यक्ष राहुल गांधी को अपने नेताओं को स्‍पष्‍ट संदेश देना चाहिए कि कश्‍मीर को लेकर कांग्रेस पार्टी का स्‍टैंड क्‍या है।

आज अगर भाजपा इस मसले को लेकर कांग्रेस से सवाल कर रही है और कांग्रेस अध्‍यक्ष से सफाई मांग रही है तो कांग्रेस को देश को जरूर बताना चाहिए की उनके नेता ऐसे बयान क्‍यों दे रहे हैं। समूचे देश को मालूम है कि कश्‍मीर भारत का अभिन्‍न अंग है। पीओके और गिलगित बाल्टिस्‍तान भी भारत का ही अंग है,

जिन पर पाकिस्‍तान अवैध रूप से कब्‍जा किया हुआ है। अभी-अभी कश्‍मीर में राज्‍यपाल शासन लागू हुआ है। सरकार और सेना वहां के बिगडे हालात को सुधारने में जुटी हुई हैं। सेना ने आतंकवाद के खिलाफ अभियान तेज किया है। दो दिनों में सेना को सफलता भी मिली है। आतंकी मारे गए हैं।

आतंकियों पर कार्रवाई में सेना की मदद के लिए एनएसजी कमांडो पहली बार कश्‍मीर भेजे गए हैं। सभी पक्षों से वार्ता के लिए सरकार काफी पहले पूर्व अधिकारी आईपीएस दिनेश्‍वर शर्मा को वार्ताकार नियुक्‍त कर चुकी है। प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह कई बार कह चुके हैं की सरकार भारतीय संविधान में आस्‍था रखने वाले सभी पक्षों से वार्ता के लिए तैयार है।

खुद पीएम लाहौर तक गए। इन कदमों से साफ है कि सरकार कश्‍मीर में अमन चाहती है और इसके प्रयास में जुटी हुई है, लेकिन पाकिस्‍तान लगातार भारतीय कोशिशों को पटरी से उतारता रहता है। ऐसे में कांग्रेस व उनके नेताओं को कश्‍मीर जैसे नाजुक मसले पर परिपक्‍वता दिखानी चाहिए।

कश्‍मीर में आगे संभावित चुनावों को देखते हुए कांग्रेस नेताओं को देश की भावना के खिलाफ बयानबाजी कतई नहीं करनी चाहिए। देश विरोधी सोच की हमदर्दी से सत्‍ता हासिल करने की कोई भी कोशिश राष्‍ट्र की एकता और अखंडता के लिए खतरनाक है। राष्‍ट्रवाद की भावना के बिना कोई भी पार्टी आवाम की चहेता नहीं बन सकती है।

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