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हरिभूमि संपादकीय लेख: घरेलू से वैश्विक की राह पर ठोस कदम

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 1.7 लाख करोड़ रुपये का पैकेज लेकर आई, जिससे यह सुनिश्चित किया कि देश का कोई गरीब, किसान और मजदूर भूखा न रहे। छोटे कारोबारियों और उद्योगों के लिए रिजर्व बैंक ने अपना पिटारा खोला।

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आ त्मनिर्भर होने का मतलब यह कतई नहीं होता कि हम पृथकतावादी सोच अपना लें। किसी भी राष्ट्र को पूर्ण आत्मनिर्भर तभी कहा जा सकता है जब उसके लोकल उत्पाद ग्लोबल स्तर खुद को ब्रांड के रूप में स्थापित करें। यह तभी संभव है जब राष्ट्र की इकोनॉमी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम, डेमोग्राफी और डिमांड मजबूत हो। जब पूरी दुनिया कोरोना से कराह रही है। वायरस के संक्रमण ने जिंदगी का पहिया जाम कर दिया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है।

देश में 22 मार्च के जनता कर्फ्यू के बाद से लॉकडाउन है। लगातार दो चरणों के लॉकडाउन के दौरान उद्योगों की चिमनी बंद रही, कारोबार पर ताला लटका रहा, रेल-बसों के पहिए ऐसे रुके कि मानो जीवन ही ठहर गया। इसकी मार गरीब, दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ी तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 1.7 लाख करोड़ रुपये का पैकेज लेकर आई, जिससे यह सुनिश्चित किया कि देश का कोई गरीब, किसान और मजदूर भूखा न रहे। छोटे कारोबारियों और उद्योगों के लिए रिजर्व बैंक ने अपना पिटारा खोला।

अब जब लॉकडाउन तीन में सरकार ने कुछ रियायतें दी हैं तो धीरे-धीरे जीवन पटरी पर आ रहा है। कहा जाता है कि कोई भी परेशानी अपने साथ अवसर लेकर भी आती है, ऐसा कोविड-19 के साथ भी है। वुहान शहर से शुरू होने वाले कोरोना को लेकर चीन दुनियाभर के देशों को खटक रहा है। ऐसे में भारत के लिए अवसर है कि वो खुद को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित हाे, चीन के स्थान पर खुद को ब्रांड के रूप में प्रस्तुत करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश को संबोधित करते हुए कहा था कि महामारी के बाद भारत को आत्मनिर्भर बनना है। जब संकट शुरू हुआ था, तब भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती था। आज भारत में रोज दो लाख पीपीई किट बनती हैं। अब वोकल फॉर लोकल अभियान से मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को एक नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। मेक इन इंडिया मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट था।

अब संकट के बीच लोकल के लिए वोकल बनने के लिए प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान किया था। अब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वदेशी की राह पर आगे बढ़ते हुए एमएसएमई, एनबीएफसी, एमएफआई, डिस्कॉम, रियल एस्टेट, टैक्स और कॉन्ट्रैक्टर्स को राहत देने के लिए 15 घोषणाएं की, जिनसे हमारे उद्योगों में नई जान आना तय है। संकट से दो-चार हो रहे एमएमएमई को 3 लाख करोड़ का लोन दिया जाएगा। इससे 45 लाख उद्योगों को फायदा होगा। पीएफ में सरकार भी अपना योगदान देगी, इससे करीब 70.22 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा। इसके अलावा, टीडीएस की दरों में 25 फीसदी तक कटौती मार्च 2021 तक की जाएगी। इससे 55 हजार करोड़ रुपये का फायदा होगा। आयकर रिटर्न की तारीख भी 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है। टैक्स ऑडिट की डेट भी अब 30 सितंबर की जगह 31 अक्टूबर कर दी गई है। गैर बैंकिग वित्तीय कंपनियों की लिक्विडिटी की समस्या दूर करने के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की स्पेशल लिक्विडिटी स्कीम शुरू होगी।

मुश्किल में घिरी राज्यों की पावर जनरेटिंग कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए 90,000 करोड़ रुपये मिलेंगेे। सभी सरकारी एजेंसियां जैसे रेलवे, रोडवेज कॉन्ट्रैक्ट में 6 महीने का एक्सटेंशन देंगी। टीडीएस की दरों में 25 फीसदी की कमी की जाएगी। बुधवार को वित्तमंत्री ने छह लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान किया है। वो लगातार तीन दिनों तक रियायतों का पिटारा खोलने वाली हैं। तय है कि आज की गई घोषणाओं से हमारे उद्योगों को बड़ी राहत मिलने वाली है और यह राहत घरेलू को वैश्विक मार्ग पर ले जाना वाला ठोस भी कदम है।

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