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सुशील राजेश का लेख : अब सामुदायिक संक्रमण

स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर घोषणा करें कि देश के अधिकतर हिस्सों में सामुदायिक संक्रमण फैल चुका है और उसके मद्देनजर दिशा-निर्देश भी जारी करें। यह भारत सरकार का ही दायित्व है। राज्य सरकारें सामुदायिक संक्रमण की अधिकृत घोषणा नहीं कर सकतीं। हालांकि केरल के मुख्यमंत्री पी.विजयन, पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन, आईएमए प्रमुख डाॅ. वीके मोंगा और कुछ प्रख्यात चिकित्सकों ने सामुदायिक संक्रमण की हकीकत स्वीकार की है।

कोरोना वायरस का इलाज अब निजी अस्पतालों में भी होगा सस्ता, सरकार ने की ये तैयारी
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक फोटो)

सुशील राजेश

भारत में कोरोना वायरस का सामुदायिक संक्रमण हो चुका है। यह कोरोना की तीसरी स्टेज है। संक्रमण इस कदर फैल रहा है कि काॅन्टेक्ट ट्रेसिंग भी संभव नहीं है। यानी एक व्यक्ति को किसके संपर्क में आने के बाद संक्रमण हुआ, यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है। बेशक यह स्थिति देशभर में नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल आदि राज्यों में कोरोना से संक्रमित लोगों की जो संख्या सामने आ रही है, वह सामुदायिक संक्रमण नहीं है, तो और क्या है? कुल संक्रमित 11.5 लाख के पार जा चुके हैं और यह अांकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। जब संक्रमण 7 लाख के करीब था, तो उसके बाद 3-3 दिन के अंतराल पर 1 लाख मरीज बढ़ते रहे हैं। बीते सप्ताह 13-19 जुलाई के दौरान करीब 2.5 लाख संक्रमित मामले सार्वजनिक हुए हैं। क्या इतने मरीजों के संपर्क-तंत्र तक पहुंचा जा सकता है या उसे खंगालने की कोशिश की गई है? अब 34-40 हजार नए संक्रमित चेहरे हर रोज सामने आ रहे हैं। सोमवार को संख्या कुछ घटकर 37,840 तक गई है, लेकिन यह संख्या भी ब्राजील के आंकड़े से लगभग दोगुनी है और मौतें तो अमेरिका से भी अधिक हो रही है।

संक्रमण के संदर्भ में ये दोनों देश ही भारत से आगे हैं और हम तीसरे स्थान पर हैं। क्या इस स्थिति को नियंत्रित करने की रणनीति बनाई गई है? यदि ऐसा है, तो संक्रमण के आंकड़े बढ़ क्यों रहे हैं? स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर घोषणा करें कि देश के अधिकतर हिस्सों में सामुदायिक संक्रमण फैल चुका है और उसके मद्देनजर दिशा-निर्देश भी जारी करें। यह भारत सरकार का ही दायित्व है। राज्य सरकारें सामुदायिक संक्रमण की अधिकृत घोषणा नहीं कर सकतीं। हालांकि केरल के मुख्यमंत्री पी.विजयन, पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन, आईएमए प्रमुख डाॅ. वीके मोंगा और कुछ प्रख्यात चिकित्सकों ने सामुदायिक संक्रमण की हकीकत स्वीकार की है। इससे पहले दिल्ली एम्स के निदेशक डाॅ. रणदीप गुलेरिया ने भी एक विशेष संदर्भ में सामुदायिक संक्रमण के हालात स्वीकार किए थे। बहरहाल सच जो भी हो, लेकिन भारत सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। इस संदर्भ में खामोशी से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। हम कोरोना वायरस के कारण देश की औसत मृत्यु-दर 2.46 फीसद और स्वस्थ होने की दर 62 फीसद से कुछ ज्यादा पर ही इतरा नहीं सकते। जिस तरह कोरोना वायरस का फैलाव और प्रसार हो रहा है, उसके मद्देनजर अमेरिकी संस्था एमआईटी का एक शोधात्मक निष्कर्ष सामने आया है कि आने वाले समय में भारत में ही औसतन 3 लाख संक्रमित मरीज हर रोज़ सामने आ सकते हैं। यानी कोरोना का अभी विस्तार होना शेष है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने तो आशंका जताई है कि कोरोना का दूसरा और तीसरा चरण आना बाकी है, लिहाजा सचेत और सावधान रहें।

बेशक दिल्ली में कोरोना संक्रमण के आंकड़े लगातार कम हो रहे हैं। बीती 27 मई के बाद अब 20 जुलाई को पहली बार 1000 से कम संक्रमित मामले सामने आए हैं। एम्स निदेशक डाॅ. गुलेरिया का मानना है कि दिल्ली अपना 'पीक' छू चुकी है, लिहाजा संक्रमण घट रहा है, लेकिन अब भी कोई ढिलाई और असावधानी खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि अब भी दिल्ली के कुछ इलाकों में संक्रमण जारी है। बहरहाल हमारा सरोकार सामुदायिक संक्रमण से है, क्योंकि वह देश के गांवों तक पहुंच सकता है। चूंकि यह संक्रमण समुदायों को गिरफ्त करता है, लिहाजा बाद की स्थितियों को संभालना टेढ़ी खीर होगा। यदि अमेरिकी शोध के मुताबिक भारत में रोजाना तीन लाख संक्रमित मरीजों के हालात बने, तो फिर हर रोज़ कितनी मौतें होंगी, मौजूदा दर के आधार पर गणना की जा सकती है।

फिलहाल देश में कोरोना के मरीज मिलने की दर भी तेजी से बढ़ी है। दो-तीन दिन पहले तक 100 टेस्ट करने पर 11 मरीज मिलते थे, लेकिन यह आंकड़ा अब करीब 16 हो गया है। साफ है कि लोग ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं। बहरहाल यह स्वीकारोक्ति देश हित में ही होगी कि कोरोना का सामुदायिक संक्रमण हो चुका है, लिहाजा हर परहेज करें और सावधानियां बरतें, लेकिन दहशत में न आएं।

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