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पाकिस्तानी गोलीबारी में नागरिकों की शहादत अफसोसनाक

सीमा पर बसे गांवों में रहने वाले लोग गोलाबारी का शिकार बन रहे हैं।

पाकिस्तानी गोलीबारी में नागरिकों की शहादत अफसोसनाक
सरहद पर पाकिस्तान की तरफ से लगातार हो रही फायरिंग का भले ही भारतीय सुरक्षा बल मुंह तोड़ जवाब दे रहे हों, हमारी तरफ के मासूम नागरिकों पर उस पार के गोले और बारूद कहर बनकर टूट रहे हैं। ताजा घटना मंगलवार सुबह की है, जिसमें आठ नागरिकों को अपने बहुमूल्य जीवन से हाथ धोना पड़ा। सीमा पर बसे गांवों को हालांकि सरकार ने खाली कराकर ग्रामीणों को आस पड़ोस के सुरक्षित ठिकानों पर भेजने के आदेश दे रखे हैं, परंतु बहुत से किसान परिवार पकी हुई फसलों और मवेशियों को भगवान भरोसे छोड़कर वहां से जाने को राजी नहीं हुए।
ये ही लोग सीमा पार से हो रही फायरिंग और गोलाबारी का शिकार बन रहे हैं। अलग-अलग सेक्टर में उस तरफ से हुई गोलीबारी में आठ व्यक्तियों के मारे जाने और पंद्रह के घायल होने की सूचना मिली है। इनमें कई महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। मंगलवार को सुरक्षाबलों के किसी जवान के हताहत होने की खबर तो नहीं है, परंतु अकेले अक्टूबर में ही सुरक्षाबलों ने सरहद पर आठ जवान गंवाए हैं। सितंबर महीने में सबसे अधिक चौबीस जवान शहीद हुए जबकि अगस्त में 10 जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। पिछले तीन महीने में भारत ने पाकिस्तान सीमा पर अपने 42 जांबाज खो दिए हैं।
28 सितंबर की रात में भारतीय सेना द्वारा पीओके में घुसकर की गई सजिर्कल स्ट्राइक से बौखलाई पाकिस्तान सेना और रेंर्जस ने भारत को उकसाने की मंशा से उस पार से फायरिंग और गोलाबारी में कई गुना वृद्धि कर दी है। हालांकि जवाबी कार्रवाई में उसके भी अनेक सैनिक हताहत हो चुके हैं। सीमा पार के गांववासी भी शिकार हुए हैं, परंतु पाकिस्तान इसके बावजूद अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। सीमा सुरक्षाबल के अधिकारियों और खुफिया सूत्रों का कहना है कि बर्फबारी से पहले सीमा पार से बड़ी तादाद में आतंकियों की घुसपैठ के लिए पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल हमेशा से यही तरीका अपनाते रहे हैं। वे फायरिंग कर भारतीय सुरक्षा बलों को एक तरफ उलझाकर दूसरी ओर से आतंकियों को घुसपैठ कराने में सफल हो जाते थे। जैसे विरोध का सामना उन्हें इस बार करना पड़ रहा है, वैसा कभी नहीं हुआ।
भारतीय सुरक्षा बल घुसपैठ की अनेक कोशिशों को नाकाम कर चुके हैं। इन नापाक कोशिशों को अंजाम देने में पाक सुरक्षा बल अबकी अपना भारी नुकसान करवा चुके हैं। भारतीय सेना में खौफ पैदा करने की मंशा से ही उरी में आत्मघाती दस्ते ने हमला करके उन्नीस जवानों की जान ले ली, परंतु इसके बाद भारत सरकार ने जो फैसला किया, उसकी कल्पना शायद पाक हुक्मरानों और सेना प्रमुख ने नहीं की होगी। पहली बार भारतीय सेना ने पीओके में घुसकर सात आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर चालीस से अधिक आतंकियों को मार गिराया। यही कारण है कि पाक सुरक्षाबल और हुकूमत बौखला गई है। उस दिन के बाद से शायद ही ऐसा कोई दिन रहा होगा, जब उस तरफ से उकसाने वाली हरकत न हुई हो।
दरअसल, 28 नवंबर को रिटायर होने जा रहे पाक सेना प्रमुख राहिल शरीफ सीमा पर युद्ध जैसा माहौल बना देना चाहते हैं ताकि उन्हें पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ आसानी से सेवा विस्तार दे दें। इसके लिए वे अपने ही सैनिकों की बलि लेने पर आमादा हैं क्योंकि भारतीय सुरक्षा बलों के कड़े जवाब में उस तरफ के भी अनेक सैनिक और रेंजर मारे जा रहे हैं। पाक हकूमत और सेना की यह सनक उन्हें किस मोड़ पर ले आई है, शायद इसका उन्हें अंदाजा नहीं है। आतंकियों को घुसपैठ कराने में नाकामी उनकी कुंठा को और बढ़ा रही है। पूरी दुनिया की निगाहें उसकी इस नापाक हरकत पर टिकी हुई है। भारत तो उसे सबक सिखा ही रहा है, विश्वभर में वह अलग-थलग भी पड़ता जा रहा है।
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